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सेल का तिमाही मुनाफा चार गुना से ज्यादा बढ़ा बिक्री में भी तेजी
नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड यानी सेल ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। कंपनी की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, स्टैंडअलोन आधार पर कर के बाद लाभ पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब 315 प्रतिशत बढ़ा है। बेहतर बिक्री, लागत नियंत्रण और अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर जोर ने प्रदर्शन को मजबूती दी। इसी दौरान वंदे भारत ट्रेनों के लिए पहियों की आपूर्ति भी स्थिर हुई है। हालांकि, कंपनी ने मुनाफे की पूरी बढ़ोतरी का कारण केवल पहियों की आपूर्ति को नहीं बताया है।
सेल के जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 1,774 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 427 करोड़ रुपये था। इस तरह लाभ चार गुना से अधिक हुआ है। कंपनी ने दूसरी तिमाही में 31,998 करोड़ रुपये का परिचालन राजस्व दर्ज किया, जबकि एक साल पहले यह 26,704 करोड़ रुपये था। यहां करीब 315 प्रतिशत वृद्धि पिछले वर्ष की समान तिमाही से तुलना पर आधारित है। इसे पिछली तिमाही के मुकाबले वृद्धि या शेयर की कीमत में बढ़ोतरी नहीं समझना चाहिए। उत्पादन और बिक्री के आंकड़े भी परिचालन सुधार की तस्वीर दिखाते हैं। कंपनी की दूसरी तिमाही की बिक्री 49.1 लाख टन से बढ़कर 51.6 लाख टन रही, जो लगभग पांच प्रतिशत की वृद्धि है। कच्चे इस्पात का उत्पादन 46.5 लाख टन के मुकाबले 48.5 लाख टन दर्ज हुआ। कंपनी ने अपने उत्पादों को बाजार की मांग के अनुसार तैयार करने और ग्राहकों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया है। उत्पादन बढ़ने के साथ उसकी बिक्री और आपूर्ति का तालमेल भी महत्वपूर्ण रहता है, क्योंकि तैयार माल के भंडार में अनावश्यक वृद्धि से वित्तीय संसाधन फंस सकते हैं।
कंपनी ने बताया कि अधिक मूल्य वाले उत्पादों की मात्रा पहली तिमाही के मुकाबले दूसरी तिमाही में 36 प्रतिशत बढ़ी। इस श्रेणी के उत्पादों पर जोर देकर सेल अपने उत्पाद मिश्रण को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है। वंदे भारत के पहियों की आपूर्ति में स्थिरता को कंपनी ने राष्ट्रीय परियोजनाओं की कड़ी जरूरतें पूरी करने की क्षमता का उदाहरण बताया है। अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. ए.के. पांडा के अनुसार, बाजार की जरूरत के अनुरूप अलग-अलग ग्रेड और आकार के उत्पाद उपलब्ध कराने से बुनियादी ढांचा, इंजीनियरिंग, रक्षा तथा रेलवे जैसे क्षेत्रों में कंपनी की पहुंच मजबूत हो रही है।
वंदे भारत के लिए पहियों की आपूर्ति कंपनी की व्यापक रेलवे उत्पाद क्षमता का हिस्सा है। सितंबर में हुई 54वीं वार्षिक आम बैठक में सेल ने बताया था कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान स्वदेश में विकसित वंदे भारत पहियों की पहली खेप भेजी गई थी। इस उपलब्धि का महत्व उन्नत रेलवे जरूरतों के लिए घरेलू उत्पाद विकसित करने में है। फिर भी पहियों के कारोबार से प्राप्त अलग राजस्व या तिमाही मुनाफे में उसके सटीक योगदान का आंकड़ा संबंधित विज्ञप्ति में नहीं दिया गया है। इसलिए समूचे लाभ को इस एक उत्पाद से जोड़ना सही तस्वीर नहीं देगा।
रेलवे को आपूर्ति के अन्य आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पांच अक्टूबर को जारी परिचालन जानकारी के अनुसार, अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान भारतीय रेलवे को लंबी रेल पटरियों की आपूर्ति पिछले वर्ष की समान अवधि से सात प्रतिशत बढ़ी। व्हील और एक्सल की आपूर्ति में तीन प्रतिशत वृद्धि हुई। कंपनी ने इस छमाही में लगभग बीस लाख टन हाई-एंड स्टील का उत्पादन किया, जो सालाना आधार पर तीस प्रतिशत अधिक था। कुल बिक्री योग्य इस्पात में तैयार इस्पात उत्पादन की हिस्सेदारी भी बेहतर हुई। ये आंकड़े कंपनी के अधिक मूल्य वाले उत्पादों की ओर बढ़ते ध्यान को दर्शाते हैं।
खनन कारोबार भी प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू रहा। सेल के अनुसार, पहली छमाही में लौह अयस्क उत्पादन तेरह प्रतिशत बढ़ा, जबकि इसकी बिक्री 26.71 लाख टन रही और सालाना आधार पर 190 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अपने संयंत्रों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने के अतिरिक्त घरेलू बाजार में अतिरिक्त मात्रा बेचने से कंपनी को कारोबार का एक और स्रोत मिलता है। इसी अवधि में विशिष्ट ऊर्जा खपत के मानक में सुधार हुआ। कंपनी ने भंडार कम करने और उधारी घटाने के प्रयासों की जानकारी भी दी है।
सेल की रणनीति में तकनीकी सुधार, नए उत्पाद और विशेष गुणवत्ता वाले इस्पात का विस्तार शामिल है। वार्षिक आम बैठक में कंपनी ने बताया था कि पिछले वित्त वर्ष में बुनियादी ढांचा, वाहन, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों के लिए 28 नए उत्पाद प्रस्तुत किए गए। मूल्यवर्धित इस्पात का उत्पादन 107 लाख टन था, जो कुल बिक्री योग्य इस्पात का 56 प्रतिशत रहा। ये पिछले वित्त वर्ष के आंकड़े हैं और इन्हें मौजूदा दूसरी तिमाही के उत्पादन के साथ नहीं मिलाना चाहिए। इनसे कंपनी की दीर्घकालिक उत्पाद रणनीति की दिशा समझ आती है। आगे कंपनी का जोर विशेष इस्पात, ग्राहक संपर्क, डिजिटलीकरण और उत्पादन क्षमता के विस्तार पर रहेगा। सेल ने वित्त वर्ष 2030-31 तक कच्चे इस्पात की क्षमता लगभग 350 लाख टन सालाना तक पहुंचाने का लक्ष्य बताया है। यह भविष्य की योजना है, वर्तमान उपलब्ध क्षमता का आंकड़ा नहीं। दूसरी तिमाही के नतीजों में बिक्री, उत्पाद मिश्रण और परिचालन अनुशासन का संयुक्त असर दिखता है। वंदे भारत के पहियों की आपूर्ति इस प्रगति की महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जबकि लाभ की निरंतरता पूरे कारोबार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
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