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Bhubaneswar भुवनेश्वर। ओडिशा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। फास्ट सप्लीमेंट्री बजट और लोन ऑर्डर को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। विपक्षी सदस्यों ने सरकार पर वित्तीय पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जबकि सरकार ने विपक्ष पर बिना वजह कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। विधानसभा में उत्पन्न स्थिति पर संसदीय कार्य मंत्री मुकेश माहलिंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “सदन फास्ट सप्लीमेंट्री बजट और लोन ऑर्डर पर चर्चा के बीच था। इस दौरान कुछ बिंदुओं पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच मतभेद उत्पन्न हो गए। विपक्ष ने कुछ संवेदनशील वित्तीय मामलों पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए और हंगामा किया।
उन्होंने कहा कि बजट और लोन ऑर्डर जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन विपक्ष ने चर्चा में रचनात्मक भूमिका निभाने के बजाय नारेबाजी और व्यवधान का रास्ता चुना, जिससे सदन की गरिमा प्रभावित हुई। “सरकार पूरी तरह तैयार थी कि बजट और ऋण से संबंधित हर मुद्दे पर विपक्ष के सवालों का विस्तृत जवाब दिया जाए, लेकिन विपक्ष ने बहस से बचने के लिए जानबूझकर अफरा-तफरी मचाई,” माहलिंग ने कहा। दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष का कहना है कि सरकार तेजी से सप्लीमेंट्री बजट पास करना चाहती है, जबकि कई योजनाओं में खर्च और लोन से जुड़े पहलुओं पर स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि राज्य में लगातार बढ़ते ऋण बोझ के बीच ऐसे बजट को जल्दबाजी में पारित करना जनता के हित में नहीं है।
सदन के अंदर विपक्षी सदस्यों ने वेल तक पहुंचकर नारेबाजी की और अध्यक्ष से मांग की कि सरकार पहले खर्च के विवरण और नए ऋण के औचित्य को स्पष्ट करे। कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार ऋण लेने के मुद्दे पर पारदर्शिता से बच रही है और विधानसभा को सिर्फ “फॉर्मेलिटी” समझकर कार्यवाही आगे बढ़ाना चाहती है। हंगामे के बीच अध्यक्ष को कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि विपक्ष सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को तूल दे रहा है और विकास-सम्बंधी योजनाओं पर जनता को गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि सप्लीमेंट्री बजट में अधिकांश प्रावधान कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने के लिए हैं, और विपक्ष को इन योजनाओं पर चर्चा से बचना नहीं चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री माहलिंग ने कहा, “सरकार की मंशा स्पष्ट है—सदन में प्रत्येक विषय पर पारदर्शी और विस्तृत चर्चा हो। लेकिन विपक्ष ने सदन को बाधित करके विकास कार्यों को रोकने की कोशिश की है। हम विपक्ष से अपील करते हैं कि वे सदन की परंपराओं का सम्मान करें और जनहित को ध्यान में रखते हुए चर्चा में भाग लें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले महीनों में ओडिशा की राजनीति को और गर्म करेगा, क्योंकि विपक्ष वित्तीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। वहीं, सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश में है। ओडिशा विधानसभा में यह टकराव बताता है कि वित्तीय मामलों पर सत्ता और विपक्ष के बीच अविश्वास की खाई और गहरी होती जा रही है।
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