ओडिशा

परीक्षा में देरी पर FM यूनिवर्सिटी में बवाल

Kavita2
10 July 2026 9:59 AM IST
परीक्षा में देरी पर FM यूनिवर्सिटी में बवाल
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Odisha ओडिशा: बालेश्वर स्थित फकीर मोहन यूनिवर्सिटी में गुरुवार देर रात उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब एक निजी नर्सिंग कॉलेज के छात्रों ने लंबित सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने आरोप लगाया कि चार वर्षीय नर्सिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के छह वर्ष बाद भी उनके सातवें और आठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित नहीं की गई हैं, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और लंबित परीक्षाओं की तिथि तत्काल घोषित करने की मांग की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का यह भी आरोप है कि विरोध के दौरान विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने उनके साथ मारपीट की। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार, उन्होंने चार वर्षीय नर्सिंग कोर्स में समय पर प्रवेश लिया था, लेकिन विभिन्न कारणों से उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित होती रही। उनका कहना है कि अब छह वर्ष बीत जाने के बावजूद सातवें और आठवें सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित नहीं की गई हैं। इससे उनकी डिग्री पूरी नहीं हो पा रही है और नौकरी तथा उच्च शिक्षा के अवसर भी प्रभावित हो रहे हैं।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि लंबित परीक्षाओं को लेकर कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद परीक्षा कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया, जिससे वे मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, छात्रों ने गुरुवार सुबह लगभग 9 बजे विश्वविद्यालय परिसर में धरना शुरू किया। पूरे दिन प्रदर्शन जारी रहा और देर रात तक छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल परीक्षा तिथियों की घोषणा और समस्या के स्थायी समाधान की मांग की।

स्थिति उस समय और अधिक तनावपूर्ण हो गई, जब फकीर मोहन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर संतोष कुमार त्रिपाठी प्रदर्शनकारी छात्रों से बातचीत करने पहुंचे। छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत के दौरान माहौल गर्म हो गया और परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

इसी दौरान कुलपति प्रोफेसर त्रिपाठी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल उन्हें चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई और विश्वविद्यालय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। फिलहाल उनकी स्थिति को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।

प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग छात्रों ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान फकीर मोहन यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के बावजूद उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। छात्रों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि एक दिन पहले जब उनके माता-पिता विश्वविद्यालय प्रशासन से मिलने पहुंचे थे, तब कुलपति ने उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया। छात्रों का कहना है कि इस घटना से अभिभावकों में भी नाराजगी है और विश्वविद्यालय प्रशासन को संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान करना चाहिए था।

दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि छात्रों के मारपीट संबंधी आरोपों पर प्रशासन ने कोई जांच शुरू की है या नहीं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में परीक्षा में लंबी देरी छात्रों के करियर पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। समय पर परीक्षाएं और परिणाम न आने से न केवल डिग्री पूरी होने में विलंब होता है, बल्कि रोजगार, उच्च शिक्षा और पंजीकरण जैसी प्रक्रियाएं भी प्रभावित होती हैं।

घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रदर्शनकारी छात्रों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अपना आंदोलन आगे भी जारी रख सकते हैं।

फिलहाल पूरे मामले में छात्रों की प्रमुख मांग यही है कि सातवें और आठवें सेमेस्टर की लंबित परीक्षाओं का कार्यक्रम जल्द घोषित किया जाए और उनकी पढ़ाई में आई देरी का समाधान किया जाए। वहीं मारपीट और अन्य आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग भी लगातार उठाई जा रही है।

यह घटनाक्रम एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में समय पर परीक्षाएं आयोजित करने, छात्रों के साथ प्रभावी संवाद बनाए रखने और विवाद की स्थिति में शांतिपूर्ण समाधान निकालने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम और छात्रों की मांगों पर होने वाले निर्णय पर टिकी हुई है।

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