
भुवनेश्वर। ओडिशा विजिलेंस ने सोमवार को भुवनेश्वर के केशरी नगर आरआई सर्कल में कार्रवाई करते हुए एक रेवेन्यू इंस्पेक्टर (RI) को कथित तौर पर 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। आरोपी अधिकारी पर एक आवेदक से कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रकम मांगने का आरोप है। विजिलेंस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाकर यह कार्रवाई की गई और अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
आरोपी अधिकारी की पहचान भुवनेश्वर के यूनिट-VI, केशरी नगर सर्कल के रेवेन्यू इंस्पेक्टर निरंजन सिंह के रूप में हुई है। विजिलेंस के मुताबिक, उन्होंने कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए शिकायतकर्ता से 5,000 रुपये की मांग की थी। शिकायतकर्ता ने इस मांग की जानकारी विजिलेंस को दी, जिसके बाद जांच एजेंसी ने कार्रवाई की योजना बनाई।
मामला एक ऐसे आवेदक से जुड़ा है, जिसने अपनी मां और छोटे भाई की मौत के बाद कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। विजिलेंस के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 9 सितंबर 2026 को ऑनलाइन आवेदन किया था और इसके साथ प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए जरूरी सभी दस्तावेज भी जमा कराए थे।
आवेदन जमा करने के बाद आवेदक कई बार संबंधित रेवेन्यू इंस्पेक्टर के संपर्क में गया। उसने अधिकारी से अनुरोध किया कि आवेदन की जांच रिपोर्ट तैयार कर उसे सक्षम अधिकारी के पास भेजा जाए, ताकि कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
विजिलेंस के अनुसार, शिकायतकर्ता तीन से चार बार निरंजन सिंह से मिला और अपनी फाइल पर कार्रवाई करने का अनुरोध करता रहा। आरोप है कि इसके बावजूद अधिकारी ने आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई। बाद में कथित तौर पर उन्होंने जांच रिपोर्ट को प्रोसेस करने और आवेदन को आगे भेजने के लिए 5,000 रुपये की मांग की।
शिकायतकर्ता के मुताबिक, प्रमाण पत्र की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उससे रिश्वत मांगी गई। इसके बाद उसने मामले की जानकारी ओडिशा विजिलेंस को दी। शिकायत की प्रारंभिक जांच के बाद एजेंसी ने कथित रिश्वत मांग की पुष्टि के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू की।
इसके बाद सोमवार को विजिलेंस की टीम ने निर्धारित योजना के तहत कार्रवाई की। एजेंसी के अधिकारियों ने निरंजन सिंह को कथित तौर पर 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान विजिलेंस टीम ने रिश्वत की रकम भी बरामद की। इसके बाद आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।
कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारियों की पहचान से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। ऐसे प्रमाण पत्र का इस्तेमाल विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी मामलों में किया जाता है। इसी प्रक्रिया से जुड़े आवेदन को आगे बढ़ाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप इस मामले में सामने आया है।
विजिलेंस के अनुसार, शिकायतकर्ता की मां और छोटे भाई की मृत्यु के बाद उसे कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की जरूरत थी। उसने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन आवेदन किया और सभी जरूरी दस्तावेज भी जमा किए थे। इसके बावजूद कथित तौर पर आवेदन की जांच और रिपोर्ट को आगे बढ़ाने में देरी की गई।
आवेदक का कहना था कि वह अपनी प्रक्रिया पूरी कराने के लिए संबंधित अधिकारी से लगातार संपर्क कर रहा था। लेकिन उसे आवेदन आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त रकम देने के लिए कहा गया। इसी के बाद उसने विजिलेंस में शिकायत की।
सोमवार की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच की जा रही है। विजिलेंस टीम अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि रिश्वत की मांग से जुड़ा पूरा घटनाक्रम क्या था और आवेदन की प्रक्रिया को जानबूझकर रोके जाने के आरोप में किन परिस्थितियों की भूमिका रही। जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी पड़ताल की जा सकती है।
मामले में आरोपी अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, रिश्वत लेने के आरोप की अंतिम पुष्टि जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल विजिलेंस ने कार्रवाई करते हुए रेवेन्यू इंस्पेक्टर निरंजन सिंह को कथित तौर पर 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है।
ओडिशा विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद सरकारी दफ्तरों में काम कराने के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने के मामलों को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। खास तौर पर राजस्व विभाग से जुड़े प्रमाण पत्र और दस्तावेजों की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मामले में आवेदक ने ऑनलाइन आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे, फिर भी प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए रकम मांगे जाने का आरोप सामने आया।
फिलहाल जांच एजेंसी मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। आरोपी रेवेन्यू इंस्पेक्टर निरंजन सिंह के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी। विजिलेंस की कार्रवाई के बाद अब यह देखना होगा कि जांच में रिश्वत मांगने और आवेदन में देरी से जुड़े कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।





