
बालेश्वर। ओडिशा विजिलेंस ने बुधवार को बालेश्वर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक राजस्व निरीक्षक (RI) को कथित तौर पर 5,000 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान खैरा तहसील के अंतर्गत तुदिगाडिया क्षेत्र में तैनात रेवेन्यू इंस्पेक्टर शरत कुमार सेठी के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने जमीन के म्यूटेशन यानी नाम-परिवर्तन से जुड़े मामले में एक आवेदक से रिश्वत की मांग की थी।
विजिलेंस के अनुसार, आरोपी RI ने कथित तौर पर आवेदक की जमीन से संबंधित फील्ड इंक्वायरी रिपोर्ट उसके पक्ष में तैयार कराने और आवेदक के दादा के नाम पर रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (RoR) जारी कराने के लिए 5,000 रुपये की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने मामले की जांच की और बुधवार को आरोपी को कथित रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ लिया।
सरकारी राजस्व व्यवस्था में जमीन के रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों और नाम-परिवर्तन की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण स्थान होता है। किसी जमीन के स्वामित्व या उत्तराधिकार से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट कराने के लिए संबंधित राजस्व कार्यालय में आवेदन करना पड़ता है। इसी प्रक्रिया के तहत आवेदक ने म्यूटेशन से संबंधित आवेदन किया था। आरोप है कि प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और रिपोर्ट अपने पक्ष में कराने के लिए आरोपी अधिकारी ने अवैध रूप से रकम की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। आरोप की पुष्टि के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्रवाई की गई। बुधवार को टीम ने जाल बिछाकर आरोपी RI को कथित तौर पर 5,000 रुपये स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान विजिलेंस अधिकारियों ने रिश्वत की रकम बरामद करने की प्रक्रिया भी पूरी की।
आरोप है कि शरत कुमार सेठी ने आवेदक से कहा था कि जमीन से संबंधित फील्ड इंक्वायरी रिपोर्ट उसके पक्ष में तैयार कराने और उसके दादा के नाम पर RoR जारी कराने के लिए भुगतान करना होगा। शिकायतकर्ता द्वारा रकम देने की सहमति जताने के बाद विजिलेंस ने उसे रंगे हाथ पकड़ने की योजना बनाई।
विजिलेंस की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों में भी चर्चा शुरू हो गई है। सरकारी कार्यालयों में जमीन और राजस्व से जुड़े काम कराने के लिए आम लोगों को कई स्तरों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में रिश्वत मांगने की शिकायतों पर कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।
जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया में संबंधित दस्तावेजों की जांच और मौके पर स्थिति का सत्यापन महत्वपूर्ण होता है। फील्ड इंक्वायरी के आधार पर संबंधित अधिकारी अपनी रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके बाद उपलब्ध रिकॉर्ड और नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया होती है। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में अपनी भूमिका का इस्तेमाल करते हुए आरोपी RI ने शिकायतकर्ता से पैसे मांगे।
रिकॉर्ड ऑफ राइट्स यानी RoR जमीन से जुड़े अधिकारों और राजस्व रिकॉर्ड का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें जमीन से संबंधित अधिकारों और अन्य आवश्यक विवरण दर्ज होते हैं। किसी व्यक्ति के नाम पर रिकॉर्ड अपडेट कराने की प्रक्रिया में संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका होती है। इसलिए इस प्रक्रिया में अनियमितता या रिश्वत की मांग गंभीर मामला मानी जाती है।
विजिलेंस की कार्रवाई के बाद आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि आरोपी ने इससे पहले भी किसी अन्य व्यक्ति से इसी तरह की रकम की मांग की थी या नहीं। साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है।
ऐसी कार्रवाइयों का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना और रिश्वतखोरी पर रोक लगाना है। ओडिशा विजिलेंस समय-समय पर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोपों में कार्रवाई करता रहा है। शिकायत के आधार पर की जाने वाली ट्रैप कार्रवाई में आमतौर पर आरोपी को रिश्वत की रकम स्वीकार करते हुए पकड़ने का प्रयास किया जाता है।
इस मामले में भी शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई। विजिलेंस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर आवेदक से 5,000 रुपये की मांग की थी। रकम लेने के दौरान उसे गिरफ्तार किया गया। अब जांच के दौरान रिश्वत मांगने की परिस्थितियों और जमीन के म्यूटेशन से जुड़े पूरे रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी।
कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर भी इस मामले की चर्चा रही। जमीन से जुड़े मामलों में लोगों को अक्सर राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी पर काम कराने के बदले पैसे मांगने का आरोप लगता है तो यह आम लोगों के लिए चिंता का विषय बन जाता है। विजिलेंस की कार्रवाई से ऐसे मामलों में शिकायत करने वालों को भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश मिलता है।
हालांकि आरोपी पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी। फिलहाल विजिलेंस ने उसे गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी यह सुनिश्चित करेगी कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पूरी तस्वीर सामने आए।
विजिलेंस टीम की कार्रवाई में आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया के साथ उसके आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच भी महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में यह सामने आता है कि रिश्वत की मांग जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए की गई थी, तो मामले में आगे और कार्रवाई हो सकती है।
बालेश्वर जिले की खैरा तहसील के तुदिगाडिया क्षेत्र में हुई यह कार्रवाई सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ विजिलेंस की सख्ती को दर्शाती है। 5,000 रुपये की कथित रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किए गए RI शरत कुमार सेठी के खिलाफ जांच जारी है। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे और क्या इस तरह की रिश्वत की मांग पहले भी की गई थी।
फिलहाल विजिलेंस की कार्रवाई के बाद जमीन के म्यूटेशन और RoR से जुड़े इस मामले में आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह मामला एक बार फिर यह रेखांकित करता है कि सरकारी सेवाओं से जुड़े कार्यों में रिश्वतखोरी की शिकायत सामने आने पर जांच एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं और दोष साबित होने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।





