ओडिशा

रिटायर्ड IAS नित्यानंद मोहंती को एक साल की सजा

Kavita2
3 Sept 2026 5:05 PM IST
रिटायर्ड IAS नित्यानंद मोहंती को एक साल की सजा
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धेनकनाल। ओडिशा के धेनकनाल जिले के पूर्व कलेक्टर और रिटायर्ड IAS अधिकारी नित्यानंद मोहंती को सरकारी फंड से कथित गबन के मामले में दोषी ठहराया गया है। भ्रष्टाचार के इस मामले में अदालत ने मोहंती समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए एक-एक साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है।

धेनकनाल स्थित विजिलेंस स्पेशल कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व कलेक्टर नित्यानंद मोहंती, जिला ग्रामीण विकास एजेंसी (DRDA) के पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर सूर्यनारायण दास और ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर सत्यानंद बालसामंत को दोषी ठहराया।

अदालत ने तीनों दोषियों को एक-एक साल की कठोर कारावास की सजा सुनाने के साथ जुर्माना भी लगाया है। यह मामला सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और करीब 9 लाख रुपये के गबन से जुड़ा हुआ है।

ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, जब कथित अनियमितताएं हुई थीं, उस समय नित्यानंद मोहंती धेनकनाल जिले के कलेक्टर के पद पर तैनात थे। वहीं सूर्यनारायण दास DRDA के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे और सत्यानंद बालसामंत ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर थे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, सरकारी फंड के इस्तेमाल में कथित गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

विजिलेंस की जांच में आरोप लगाया गया था कि सरकारी धन का सही तरीके से उपयोग नहीं किया गया और करीब 9 लाख रुपये की राशि में अनियमितता हुई। इसके बाद मामले को अदालत में पेश किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजों और अन्य सबूतों के आधार पर आरोप साबित करने की कोशिश की। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दोषी माना।

रिटायर्ड IAS अधिकारी नित्यानंद मोहंती लंबे समय तक प्रशासनिक सेवा में रहे हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में अदालत का यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ओडिशा विजिलेंस समय-समय पर सरकारी विभागों और अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करती रही है। एजेंसी का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है।

अदालत के फैसले के बाद सरकारी विभागों में भी चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा और पारदर्शिता बनाए रखना हर जिम्मेदार अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भ्रष्टाचार के मामलों में दोषसिद्धि से प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही का संदेश जाता है। इससे सरकारी योजनाओं और फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलती है।

इस मामले में अदालत ने सजा सुनाते हुए दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है। हालांकि, मामले से जुड़े अन्य कानूनी विकल्पों पर आगे निर्णय लिया जा सकता है।

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई की जाएगी।

धेनकनाल के इस मामले में अदालत का फैसला सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

फिलहाल पूर्व कलेक्टर नित्यानंद मोहंती और अन्य दो दोषियों को अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के बाद मामला फिर चर्चा में है।

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