ओडिशा

रथ यात्रा: भगवान जगन्नाथ के संध्या दर्शन से मिलता है विशेष पुण्य, श्रद्धालुओं में उत्साह

nidhi
23 July 2026 9:04 AM IST
रथ यात्रा: भगवान जगन्नाथ के संध्या दर्शन से मिलता है विशेष पुण्य, श्रद्धालुओं में उत्साह
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पुरी में रथ यात्रा का अंतिम चरण, संध्या दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु

ODISHA: पुरी में चल रही प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए संध्या दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी क्रम में आज शाम 6 बजे के बाद दर्शन बंद कर दिए जाएंगे, क्योंकि अगले दिन होने वाली बहुड़ा यात्रा (वापसी रथ यात्रा) की तैयारियां शुरू की जाएंगी।

लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस पवित्र अवसर पर पुरी पहुंच रहे हैं। मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा और सुचारु दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
संध्या दर्शन का क्या है महत्व?
रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ कुछ दिनों के लिए श्रीमंदिर से बाहर आकर गुंडिचा मंदिर में विराजमान होते हैं। इस दौरान भक्तों को भगवान के विशेष दर्शन का अवसर मिलता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, संध्या समय भगवान के दर्शन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस दर्शन को आध्यात्मिक रूप से विशेष फलदायी मानते हैं।
शाम 6 बजे बंद होंगे दर्शन
रथ यात्रा की परंपराओं और अगले दिन की तैयारियों को देखते हुए आज शाम 6 बजे के बाद दर्शन व्यवस्था बंद कर दी जाएगी। इसके बाद सेवायत और मंदिर प्रशासन बहुड़ा यात्रा से जुड़ी तैयारियों में जुटेंगे।
श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय के अनुसार ही दर्शन के लिए पहुंचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
कल होगी बहुड़ा यात्रा
भगवान जगन्नाथ की वापसी यात्रा को बहुड़ा यात्रा कहा जाता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर से वापस श्रीमंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं।
बहुड़ा यात्रा भी रथ यात्रा जितनी ही महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
रथ यात्रा की धार्मिक परंपरा
जगन्नाथ रथ यात्रा भारत की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक यात्राओं में से एक है। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के विशाल रथ निकाले जाते हैं।
तीनों रथों के नाम भी विशेष महत्व रखते हैं—
भगवान जगन्नाथ का रथ: नंदीघोष।
भगवान बलभद्र का रथ: तालध्वज।
देवी सुभद्रा का रथ: दर्पदलन।
भक्त इन रथों के दर्शन और सेवा को अत्यंत शुभ मानते हैं।
सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था
पुरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रमुख मार्गों, रथ यात्रा क्षेत्र और मंदिर परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आपात सेवाओं को लेकर भी विशेष योजना लागू की गई है।
श्रद्धालुओं में उत्साह
रथ यात्रा के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। भगवान जगन्नाथ के दर्शन और रथों की सेवा को लेकर भक्तों में खास उत्साह देखने को मिलता है।
लोग भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस पावन अवसर में शामिल होते हैं।

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