ओडिशा

ओडिशा के गजपति में बारिश और तेज हवाएँ, भूस्खलन की आशंका से प्रशासन सतर्क

nidhi
28 Oct 2026 11:25 AM IST
ओडिशा के गजपति में बारिश और तेज हवाएँ, भूस्खलन की आशंका से प्रशासन सतर्क
x
भुवनेश्वर: चक्रवात अर्नब का असर ओडिशा के दक्षिणी जिलों में दिखाई देने लगा है। गजपति जिले में तेज हवाओं और बारिश के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़कर गिर गए, जिससे सड़क संपर्क और बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। सूचना मिलने के बाद दमकल विभाग की टीमों ने प्रभावित स्थानों पर पहुँचकर पेड़ हटाने का काम शुरू किया। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन की आशंका भी बनी हुई है। प्रशासन राहत कार्यों के साथ संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने पर ध्यान दे रहा है।
गजपति जिले के गुम्मा ब्लॉक के किंडगा गाँव में तेज हवाओं से पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की जानकारी सामने आई है। दमकल कर्मियों ने गिरे पेड़ों को हटाने तथा अवरोध दूर करने के लिए कार्रवाई की। खराब मौसम के बीच रास्ते खुले रखना जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर बचाव दल और आवश्यक सेवाएँ प्रभावित बस्तियों तक पहुँच सकें। गुम्मा का बड़ा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र में आता है, इसलिए वहाँ बारिश के साथ ढलानों की स्थिति भी चिंता का विषय है।
इसी ब्लॉक के तुमुला गाँव में सड़क किनारे लगा एक बड़ा पेड़ उखड़ गया था। दमकल विभाग के कर्मचारियों ने उसे हटाया। जिले में प्रशासन ने भूस्खलन की आशंका वाले स्थानों पर एहतियाती कदम उठाए हैं। आर. उदयगिरि, रायगड़ा, नुआगड़ा और गुम्मा ब्लॉक के संवेदनशील क्षेत्रों में बैरिकेड लगाए गए हैं। एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, जिले में 139 भूस्खलन संभावित स्थानों पर आवाजाही रोकने की व्यवस्था की गई। काशीनगर के पास नदी घाट पर भी लोगों के प्रवेश को नियंत्रित करने के कदम उठाए गए। पहाड़ी बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए समझाने में आशा और आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद ली जा रही है। प्रशासन ने पर्यटकों की आवाजाही पर भी रोक लगाई है। महेंद्रगिरि, झरनों और बीएन पैलेस सहित जिले के पर्यटन स्थलों को अगले आदेश तक बंद करने की जानकारी दी गई है। इन कदमों का उद्देश्य खराब मौसम के दौरान जोखिम वाले स्थानों पर लोगों की मौजूदगी कम करना है। अधिकारी राहत आश्रयों और संवेदनशील इलाकों की तैयारियों का निरीक्षण भी कर रहे हैं।
गजपति में बचाव और राहत के लिए अलग-अलग एजेंसियों की टीमें तैनात की गई हैं। प्रकाशित जानकारी के अनुसार, जिले में ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स की छह टीमें, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की एक टीम और दमकल विभाग की आठ टीमें लगाई गई हैं। इनकी जिम्मेदारियों में जरूरत पड़ने पर लोगों को निकालना, रास्तों से बाधाएँ हटाना और स्थानीय प्रशासन की सहायता करना शामिल है। राज्य और जिला स्तर पर नियंत्रण कक्ष भी सक्रिय किए गए हैं, जहाँ से मौसम संबंधी सूचनाओं और राहत कार्यों पर नजर रखी जा रही है।
ओडिशा में व्यापक स्तर पर एहतियाती निकासी भी शुरू की गई है। 28 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, आठ जिलों से लगभग 18 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका था। करीब 48 हजार लोगों को जरूरत के अनुसार स्थानांतरित करने के लिए चिह्नित किया गया था। इनमें गजपति जिले के लगभग 11 हजार लोग शामिल हैं। प्रभावित जिलों में अस्थायी आश्रयों की व्यवस्था की गई है। ये आँकड़े संबंधित रिपोर्ट के समय की स्थिति बताते हैं और मौसम तथा निकासी अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पहले ही संभावित चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की थी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में विभागों को सतर्क रहने और समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए गए हैं। निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित आश्रयों में पहुँचाने के साथ गर्भवती महिलाओं और मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं तक ले जाने पर जोर दिया गया है। संभावित रूप से प्रभावित स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों, मेडिकल किट और अन्य जरूरी सामग्री का पर्याप्त भंडार रखने को भी कहा गया है।
भारी बारिश की संभावना को देखते हुए गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरि जिलों में स्कूल, कॉलेज और आँगनबाड़ी केंद्र 28 तथा 29 अक्टूबर को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य जिलों में स्थिति के अनुसार निर्णय लेने की जिम्मेदारी संबंधित कलेक्टरों को दी गई है। सड़क, बिजली और पेयजल सेवाओं से जुड़े विभागों को भी तैयार रहने को कहा गया है। चक्रवात के बाद बाधित सेवाओं की बहाली और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
चक्रवात का मुख्य प्रभाव आंध्र प्रदेश के तट पर पड़ने के बावजूद पड़ोसी ओडिशा में बारिश और तेज हवाओं से मुश्किलें बढ़ी हैं। राज्य में राहत दलों को गिरे पेड़ और मलबा हटाकर सड़कें चालू रखने के लिए तैयार किया गया है। विशेष रूप से गजपति के भूस्खलन संभावित इलाकों पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने और निकासी में सहयोग देने की अपील की है। फिलहाल जिले में पेड़ हटाने, संपर्क बहाल रखने और संवेदनशील बस्तियों की सुरक्षा पर काम जारी है।
Next Story