
ओडिशा : रायगढ़ जिले के रहने वाले असम राइफल्स के जवान वी. तेजा सोमवार को नागालैंड में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गए। उनकी उम्र 30 वर्ष थी और 7 अक्टूबर को उनका 31वां जन्मदिन आने वाला था। जवान की मौत की खबर मिलते ही परिवार, दोस्तों और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जा रहा है कि ड्यूटी के दौरान वी. तेजा को गोली लगी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें तत्काल नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया।
वी. तेजा असम राइफल्स में जवान के रूप में तैनात थे। परिवार के अनुसार, वह 2022 में भारतीय सेना से जुड़े थे और उसके बाद से देश की सेवा में लगातार तैनात रहे। उनकी शहादत ने परिवार के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।
यह घटना परिवार के लिए इसलिए भी बेहद दर्दनाक है क्योंकि तेजा की शादी की तैयारियां चल रही थीं। उनकी शादी 10 दिसंबर को तय थी। घर में कुछ ही समय बाद विवाह समारोह की खुशियां शुरू होने वाली थीं, लेकिन अचानक आई उनकी शहादत की खबर ने पूरे परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया।
परिजनों ने बताया कि तेजा को करीब 50 दिनों की छुट्टी मिली थी और उम्मीद की जा रही थी कि वह दिवाली के आसपास अपने घर रायगढ़ लौटेंगे। परिवार उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा था। शादी से पहले घर में कई तैयारियां भी शुरू हो चुकी थीं।
लेकिन इससे पहले ही नागालैंड से आई दुखद खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया। जिन हाथों से शादी की तैयारियां होनी थीं, वही परिवार अब जवान की अंतिम यात्रा की तैयारी कर रहा है।
तेजा के छोटे भाई ने बताया कि उनके बड़े भाई हमेशा समाज और दूसरों के लिए कुछ करने की भावना रखते थे। इसी सोच के तहत उन्होंने करीब दो साल पहले अंगदान का संकल्प लिया था। परिवार ने उनकी इस अंतिम इच्छा का सम्मान करने का फैसला किया।
परिवार के मुताबिक, नागालैंड के एक स्थानीय अस्पताल में तेजा के अंग निकाले गए और उन्हें सुरक्षित रखा गया। उनके अंगदान के संकल्प को पूरा करने के लिए आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रिया की गई। इस फैसले को परिवार ने उनके व्यक्तित्व और सेवा भावना से जोड़कर देखा।
अंगदान का निर्णय तेजा की शहादत को एक और मानवीय अर्थ देता है। देश की सेवा करते हुए अपनी जान गंवाने के बाद भी उनके अंग जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई उम्मीद दे सकते हैं।
तेजा की मौत से रायगढ़ क्षेत्र में भी गहरा शोक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह बेहद सरल और जिम्मेदार स्वभाव के युवक थे। सेना में जाने के बाद भी वह परिवार और गांव से लगातार जुड़े रहते थे।
परिवार के सदस्य उन्हें याद करते हुए बताते हैं कि वह हर बार छुट्टी में घर आने पर रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलते थे। उनकी शादी को लेकर पूरे परिवार में उत्साह था और रिश्तेदारों को भी निमंत्रण देने की तैयारी की जा रही थी।
अब 10 दिसंबर की तारीख, जो परिवार के लिए खुशियों का दिन होने वाली थी, हमेशा एक दर्दनाक याद बनकर रह जाएगी। परिवार के लिए यह स्वीकार कर पाना मुश्किल है कि जिस बेटे के विवाह की तैयारी हो रही थी, वही अब वापस घर नहीं लौटेगा।
तेजा के 31वें जन्मदिन से ठीक पहले हुई शहादत ने परिवार के दुख को और बढ़ा दिया है। 7 अक्टूबर को उनका जन्मदिन मनाया जाना था, लेकिन अब परिवार इस तारीख को उन्हें श्रद्धांजलि देकर याद करेगा।
नागालैंड में ड्यूटी के दौरान उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। बताया गया है कि उन्हें गोली लगी थी, लेकिन घटना कैसे हुई, इसकी पूरी जानकारी आधिकारिक स्तर पर सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
असम राइफल्स की ओर से भी आगे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। जवान के पार्थिव शरीर को उनके गृह क्षेत्र लाने की तैयारी की जा सकती है, जहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होने की संभावना है।
स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से भी परिवार के संपर्क में रहने की उम्मीद है। शहीद जवान के घर बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।
तेजा की शहादत ने एक बार फिर देश की सीमाओं और संवेदनशील इलाकों में तैनात जवानों के जोखिम भरे जीवन को सामने रखा है। जवान कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी करते हुए देश की सुरक्षा में लगातार योगदान देते हैं और कई बार सर्वोच्च बलिदान भी देते हैं।
वी. तेजा की कहानी केवल एक सैनिक की शहादत तक सीमित नहीं है। उनकी शादी की अधूरी तैयारी, घर लौटने का इंतजार और अंगदान का संकल्प इस घटना को और भावुक बना देता है।
परिवार के अनुसार, उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए अंग सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि जरूरतमंद लोगों को जीवन मिल सके। यह कदम उनकी सेवा भावना को शहादत के बाद भी आगे बढ़ाता है।
फिलहाल रायगढ़ में शोक का माहौल है। परिवार अपने बेटे की अंतिम विदाई की तैयारी कर रहा है, जबकि स्थानीय लोग उनके साहस और बलिदान को याद कर रहे हैं।





