
भुवनेश्वर। माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2026 के आर्थिक प्रभाव को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच ओडिशा विधानसभा में यह मुद्दा उठाया गया है। बारीपदा से बीजेपी विधायक प्रकाश सोरेन ने राज्य सरकार से पूछा है कि संशोधित खनन कानून से ओडिशा को आर्थिक फायदा होगा या राज्य को राजस्व के मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इसके संभावित आर्थिक प्रभाव की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
विधानसभा में विधायक प्रकाश सोरेन ने संशोधित MMDR कानून का मुद्दा उठाते हुए सरकार से इसके आर्थिक प्रभाव से जुड़ी जानकारी मांगी। उन्होंने पूछा कि नए प्रावधानों के लागू होने के बाद ओडिशा के खनन क्षेत्र और राज्य के राजस्व पर क्या असर पड़ने का अनुमान है। इसके साथ ही उन्होंने यह जानना चाहा कि क्या सरकार ने कानून में हुए बदलाव के बाद राज्य को होने वाले संभावित लाभ या नुकसान का कोई विस्तृत आकलन कराया है।
सोरेन ने सरकार से कहा कि संशोधित कानून के कारण यदि राज्य के राजस्व में किसी तरह की कमी आने की आशंका है, तो उससे निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी जवाब मांगा कि ओडिशा के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए राज्य सरकार की क्या रणनीति है।
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए वाणिज्य, परिवहन, इस्पात और खान मंत्री विभूति भूषण जेना ने कहा कि सरकार ने अभी तक संशोधित प्रावधानों के तहत ओडिशा को होने वाले आर्थिक लाभ या नुकसान का कोई विशेष आकलन नहीं किया है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि संशोधित कानून का राज्य के राजस्व पर कितना सकारात्मक या नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सरकार के इस जवाब के बाद MMDR संशोधन के आर्थिक प्रभाव का मुद्दा चर्चा में आ गया है। खनिज संसाधनों के लिहाज से ओडिशा देश के महत्वपूर्ण राज्यों में शामिल है। राज्य की अर्थव्यवस्था में खनन और खनिज आधारित उद्योगों की अहम भूमिका है। ऐसे में खनन क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय कानून में होने वाले बदलावों के आर्थिक प्रभाव को लेकर राज्य स्तर पर सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है।
विधायक प्रकाश सोरेन की ओर से उठाए गए सवाल मुख्य रूप से राज्य के संभावित राजस्व और आर्थिक हितों पर केंद्रित रहे। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि संशोधित कानून लागू होने के बाद राज्य के राजस्व संग्रह पर किस तरह का असर पड़ सकता है। यदि बदलावों के कारण ओडिशा को वित्तीय नुकसान होने की संभावना बनती है तो राज्य सरकार की ओर से उसकी भरपाई या प्रभाव को कम करने के लिए किस प्रकार के कदम उठाए जाएंगे।
खनन से प्राप्त होने वाला राजस्व राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण आय स्रोतों में शामिल होता है। खनिजों के उत्पादन, नीलामी, रॉयल्टी और इससे जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं में होने वाला बदलाव राज्य की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि संशोधित MMDR कानून को लेकर इसके व्यावहारिक और आर्थिक प्रभाव पर नजर बनी हुई है।
विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक फिलहाल संशोधित प्रावधानों से होने वाले आर्थिक लाभ या नुकसान को लेकर कोई विशिष्ट आकलन उपलब्ध नहीं है। इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार की ओर से अभी ऐसा कोई निश्चित आंकड़ा सामने नहीं रखा गया है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि कानून में बदलाव के बाद ओडिशा को कितना आर्थिक फायदा या नुकसान होगा।
इस मुद्दे का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ओडिशा में लौह अयस्क, कोयला, बॉक्साइट और अन्य खनिज संसाधनों से जुड़ी गतिविधियां बड़े स्तर पर होती हैं। खनन गतिविधियों से न केवल सरकार को राजस्व मिलता है, बल्कि इससे उद्योग, परिवहन और रोजगार सहित कई क्षेत्रों की गतिविधियां भी जुड़ी रहती हैं। ऐसे में खनन कानून में बदलाव का असर केवल सरकारी राजस्व तक सीमित न रहकर व्यापक आर्थिक गतिविधियों तक पहुंच सकता है।
हालांकि किसी भी संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष विस्तृत आकलन और वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। मंत्री विभूति भूषण जेना के जवाब से फिलहाल यही स्थिति सामने आई है कि सरकार ने आर्थिक फायदे या नुकसान का कोई खास आकलन नहीं किया है।
विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार भविष्य में संशोधित MMDR कानून के आर्थिक प्रभाव का विस्तृत अध्ययन कराती है या नहीं। साथ ही यदि कानून के नए प्रावधानों से राज्य के राजस्व पर किसी तरह का असर सामने आता है, तो ओडिशा सरकार अपने हितों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल बीजेपी विधायक प्रकाश सोरेन के सवाल और सरकार के जवाब ने खनन कानून के आर्थिक असर को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। राज्य सरकार के पास अभी लाभ या नुकसान का निश्चित आकलन नहीं होने के कारण वास्तविक आर्थिक प्रभाव आने वाले समय में उपलब्ध आंकड़ों और कानून के क्रियान्वयन के बाद अधिक स्पष्ट हो सकेगा।





