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Puri पूरी: श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार की इन्वेंट्री प्रक्रिया 48 साल बाद पूरी हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं और मंदिर समिति के सदस्यों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। इस अवसर पर सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पट्टनायक ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “देखिए, इतने वर्षों के बाद यह काम आखिरकार पूरा हुआ। जब मैं प्रबंध समिति का सदस्य था, तब हम सभी यही कह रहे थे कि रत्न भंडार सुरक्षित नहीं है।”
पट्टनायक ने बताया कि केवल प्रबंध समिति के सदस्य ही नहीं, बल्कि जगन्नाथ महाप्रभु के सभी भक्त भी इसी चिंता को साझा कर रहे थे। उनका कहना था कि रत्न भंडार में सुरक्षा और ट्रैकिंग की कमी थी, जिससे इस ऐतिहासिक खजाने की सुरक्षा पर सवाल उठते थे। उन्होंने इसके सुरक्षित और व्यवस्थित होने पर प्रसन्नता जताई।
मंदिर प्रशासन ने इस प्रक्रिया के तहत रत्न भंडार में मौजूद सोने, चांदी और कीमती गहनों का पूरा लेखा-जोखा तैयार किया। यह इन्वेंट्री न केवल मंदिर के खजाने की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, बल्कि पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ाएगी। अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया अत्यंत सावधानी और नियमों का पालन करते हुए संपन्न की गई।
श्रद्धालुओं और विशेषज्ञों ने भी इस कदम की सराहना की और इसे मंदिर इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। इस इन्वेंट्री के पूरा होने से रत्न भंडार में किसी भी प्रकार की अनियमितता और चोरी की संभावना कम हो जाएगी। सुदर्शन पट्टनायक ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि सभी भक्तों की decades-long चिंता का समाधान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी मंदिर के खजाने और संपत्तियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
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