
Odisha ओडिशा: पुरी शहर में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को स्नान यात्रा के अवसर पर धार्मिक आस्था और परंपरा का भव्य दृश्य देखने को मिला। इस विशेष अवसर पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा को पारंपरिक रूप से अलग-अलग दिव्य परिधानों से सजाया गया।
स्नान बेदी पर विधिवत अनुष्ठान के बाद भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र को हाथी बेशा (हस्ती रूपी परिधान) से अलंकृत किया गया, जबकि देवी सुभद्रा को पद्म बेशा यानी कमल पुष्प की पोशाक में सजाया गया। इसी दौरान भगवान सुदर्शन, जिन्हें भगवान के पवित्र शस्त्र के रूप में पूजा जाता है, को भी विशेष रूप से स्नान बेदी पर उपस्थित कर अनुष्ठान संपन्न कराया गया।
देवताओं के समक्ष गजपति राजा दिव्यसिंह देव द्वारा पारंपरिक छेरा पन्हारा अनुष्ठान संपन्न किया गया, जिसके बाद मंदिर सेवकों ने विधिवत रूप से देवताओं को हाथी बेश में श्रृंगारित किया। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत आकर्षण का केंद्र रहा।
इस अवसर पर पुरी और आसपास के क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और देवताओं के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। भक्तों में इस विशेष श्रृंगार को लेकर भारी उत्साह और आस्था देखने को मिली।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्नान यात्रा के बाद देवताओं को मानव रूप में “बुखार” आने की परंपरा मानी जाती है। इसी मान्यता के आधार पर स्नान अनुष्ठान के बाद भगवान को अनासार गृह में ले जाया जाता है, जहां उन्हें विश्राम और औषधीय उपचार के रूप में रखा जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, 15वीं शताब्दी में भगवान जगन्नाथ ने अपने भक्त गणपति भट्ट को स्नान बेदी पर भगवान गणेश के रूप में दर्शन दिए थे, जिसके बाद से हाथी बेश की परंपरा का विशेष महत्व माना जाता है।
परंपरागत रूप से राघव दास और गोपाल तीर्थ मठ के सेवक श्रीमंदिर में देवताओं के लिए इस दिव्य हाथी बेश की व्यवस्था करते हैं, जो आज भी उसी श्रद्धा और भक्ति के साथ निभाई जाती है।
पुरी में आयोजित यह स्नान यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत और जगन्नाथ परंपरा की जीवंत झलक भी प्रस्तुत करती है, जिसे देखने के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से यहां पहुंचते हैं।





