
Odisha ओडिशा: ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में एक धार्मिक संगठन द्वारा प्रस्तावित समय से पहले रथ यात्रा आयोजन पर आपत्ति जताई है। मंदिर प्रशासन ने इस संबंध में हापुड़ जिला प्रशासन को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने और निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार ही आयोजनों को सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है।
जानकारी के अनुसार, हापुड़ में श्री जगन्नाथ रथ यात्रा सेवा समिति द्वारा 13 जून को नेत्रोत्सव और 14 जून को रथ यात्रा आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इसी प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन पारंपरिक धार्मिक कैलेंडर और शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार नहीं है।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के मुख्य प्रशासक अरबिंद कुमार पाधी ने अपने पत्र में कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस तरह की तिथियों पर आयोजन की तैयारी की जा रही है, जो निर्धारित परंपरा से मेल नहीं खाती। उन्होंने कहा कि पुरी में भगवान जगन्नाथ का नेत्रोत्सव पारंपरिक रूप से 14 जुलाई को मनाया जाता है, जबकि रथ यात्रा 16 जुलाई को आयोजित होती है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि धार्मिक परंपराओं और शास्त्रों में निर्धारित तिथियों से अलग किसी भी समय इन पवित्र अनुष्ठानों का आयोजन करने से देश और विदेश में भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्तों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है। मंदिर प्रशासन ने इस विषय को गंभीर बताते हुए स्थानीय प्रशासन से उचित कदम उठाने का अनुरोध किया है।
SJTA ने कहा कि जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सदियों पुरानी परंपरा और आस्था से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण पर्व है, जिसका पालन निश्चित तिथियों और विधि-विधान के अनुसार ही किया जाना चाहिए। किसी भी प्रकार का बदलाव न केवल परंपरा के विरुद्ध है, बल्कि इससे भक्तों के बीच भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
इस मामले को लेकर अभी हापुड़ जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, मंदिर प्रशासन के पत्र के बाद इस विवाद पर चर्चा तेज हो गई है और धार्मिक संगठनों तथा श्रद्धालुओं के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा अब धार्मिक संवेदनशीलता और परंपरा के पालन को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन इस मामले में उचित कदम उठाएगा और धार्मिक आयोजनों को परंपरा के अनुरूप ही सुनिश्चित करेगा।





