
पुरी : ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने इस्कॉन (ISKCON) के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन साल में किसी भी समय किया जा सकता है और यह शास्त्रों के अनुसार है। मंदिर प्रशासन ने इसे गलत जानकारी बताते हुए कहा कि इस तरह के दावे दुनिया भर के श्रद्धालुओं को भ्रमित कर सकते हैं।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने मंगलवार को जारी एक बयान में इस्कॉन नेशनल कम्युनिकेशंस ऑफिस, नई दिल्ली की ओर से जारी प्रेस रिलीज पर आपत्ति जताई। SJTA ने कहा कि प्रेस रिलीज में दी गई जानकारी तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है और इसका उद्देश्य असमय श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के आयोजन को लेकर लोगों को गुमराह करना है।
मंदिर प्रशासन ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा एक निर्धारित परंपरा और धार्मिक नियमों के अनुसार आयोजित की जाती है। इसका समय और विधि सदियों से चली आ रही धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रीय परंपराओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी भी अन्य समय पर रथ यात्रा आयोजित करने को लेकर मंदिर प्रशासन सहमत नहीं है।
दरअसल, भारत के बाहर भगवान जगन्नाथ से जुड़े रथ यात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों के समय को लेकर लंबे समय से इस्कॉन और पुरी मंदिर प्रशासन के बीच मतभेद रहे हैं। इस्कॉन दुनिया के कई देशों में भगवान जगन्नाथ से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता है, जिनमें रथ यात्रा भी शामिल है। इनमें से कुछ आयोजन पुरी की पारंपरिक रथ यात्रा की तारीख से अलग समय पर होते हैं।
इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच कई बार मतभेद सामने आए हैं। पुरी मंदिर प्रशासन का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का धार्मिक महत्व और परंपरा पुरी की मूल परंपराओं से जुड़ी हुई है, इसलिए इसके आयोजन को शास्त्रीय नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
SJTA ने अपने बयान में कहा कि असमय रथ यात्रा का आयोजन धार्मिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। प्रशासन ने यह भी कहा कि दुनिया भर में भगवान जगन्नाथ के करोड़ों भक्त हैं और उन्हें सही जानकारी देना जरूरी है, ताकि धार्मिक मान्यताओं को लेकर भ्रम पैदा न हो।
वहीं, इस्कॉन का पक्ष रहा है कि भगवान जगन्नाथ की भक्ति को दुनिया के हर हिस्से तक पहुंचाने के लिए अलग-अलग देशों में रथ यात्राओं का आयोजन किया जाता है। संगठन का कहना है कि इन आयोजनों का उद्देश्य भगवान जगन्नाथ की महिमा और भक्ति का प्रचार करना है।
इस्कॉन दुनिया भर में कृष्ण भक्ति आंदोलन के लिए जाना जाता है और कई देशों में इसके मंदिर और धार्मिक केंद्र हैं। संगठन की ओर से विदेशों में आयोजित होने वाली रथ यात्राओं में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और भारतीय समुदाय के लोग शामिल होते हैं।
हालांकि, पुरी मंदिर प्रशासन का कहना है कि पुरी की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि एक प्राचीन परंपरा है, जिसके अपने नियम और धार्मिक महत्व हैं। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि परंपराओं का पालन करना आवश्यक है।
जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास में आयोजित की जाती है। इस यात्रा में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और इसे दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।
पुरी की रथ यात्रा को लेकर देश-विदेश में भारी आस्था है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं और भगवान जगन्नाथ के दर्शन करते हैं। इसी वजह से इस परंपरा और इससे जुड़े नियमों को लेकर मंदिर प्रशासन विशेष सतर्कता बरतता है।
मंदिर प्रशासन ने कहा कि धार्मिक आयोजनों को लेकर कोई भी गलत जानकारी फैलाना उचित नहीं है। प्रशासन ने सभी संगठनों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करें।
इस विवाद के बीच अब यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है कि विदेशों में भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक आयोजनों को किस तरह आयोजित किया जाए। जहां इस्कॉन इसे वैश्विक भक्ति अभियान का हिस्सा बताता है, वहीं पुरी मंदिर प्रशासन इसे पारंपरिक धार्मिक व्यवस्था से जोड़कर देखता है।
फिलहाल पुरी मंदिर प्रशासन ने अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है और असमय रथ यात्रा के आयोजन से जुड़े दावों को खारिज कर दिया है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बातचीत या किसी समाधान की संभावना पर नजर रहेगी।





