
Odisha ओडिशा: विधानसभा सचिवालय की ओर से जारी एक नोटिफिकेशन के अनुसार, बीजू जनता दल (BJD) विधायक दल की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ओडिशा विधानसभा की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
यह नियुक्ति 25 जून को जारी आधिकारिक अधिसूचना के माध्यम से की गई। नोटिफिकेशन में बताया गया है कि ओडिशा विधानसभा की कार्य-संचालन नियमावली के नियम 135(1) के तहत लोक लेखा समिति के लिए 12 सदस्यों का चयन किया गया है।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने नियम 197(1) के तहत प्रमिला मलिक को इस महत्वपूर्ण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। लोक लेखा समिति को राज्य की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय समितियों में से एक माना जाता है, जो सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन की निगरानी में अहम भूमिका निभाती है।
इस 12 सदस्यीय समिति में विभिन्न राजनीतिक दलों और सदस्यों को शामिल किया गया है, जिससे समिति की कार्यप्रणाली में संतुलन और पारदर्शिता बनी रहे। समिति के सदस्यों में प्रमिला मलिक के अलावा कांग्रेस विधायक दल के नेता रामा चंद्र कदम, डॉ. अरुणा कुमार साहू, गनेश्वर बेहरा, सनातन बिजुली, आकाश दासनायक, कालीकेश नारायण सिंह देव, अशोक मोहंती, बाबू सिंह, संतोष खटुआ, अमर कुमार नायक और अरबिंद महापात्रा शामिल हैं।
लोक लेखा समिति का मुख्य कार्य नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों की जांच करना और सरकारी खर्चों की समीक्षा करना होता है। यह समिति यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग विधायी मंजूरी और निर्धारित वित्तीय नियमों के अनुसार ही किया गया हो।
सरकारी वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता बनाए रखने में PAC की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह समिति यह भी देखती है कि सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं में खर्च की गई राशि का सही और प्रभावी उपयोग हुआ है या नहीं।
प्रमिला मलिक की अध्यक्षता में गठित यह समिति आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य के विभिन्न विभागों के खर्चों की समीक्षा करेगी और CAG रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुझाव और रिपोर्ट तैयार करेगी।
इस नियुक्ति को ओडिशा विधानसभा की कार्यप्रणाली में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि PAC राज्य की वित्तीय जवाबदेही तय करने वाली प्रमुख इकाई होती है। समिति की रिपोर्टें सरकार की नीतियों और खर्चों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि इसमें विभिन्न दलों के अनुभवी विधायकों को शामिल किया गया है। इससे समिति के कामकाज में संतुलन और निष्पक्षता बनाए रखने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल समिति के गठन के बाद इसके औपचारिक कार्य शुरू होने की प्रक्रिया चल रही है। आने वाले समय में यह समिति राज्य के वित्तीय प्रबंधन की गहन समीक्षा करेगी और विधानसभा को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।





