
भुवनेश्वर। कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन की ओर से 8 अक्टूबर को बुलाए गए ओडिशा बंद के बावजूद राज्य में निजी बस सेवाएं सामान्य रूप से चलेंगी। ओडिशा प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन ने बुधवार को स्पष्ट किया कि बंद के समर्थन में बस सेवाएं रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रियब्रत त्रिपाठी ने कहा कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल या संगठन ने बंद के समर्थन के लिए बस मालिकों या एसोसिएशन से संपर्क नहीं किया है। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा स्थिति में निजी बस सेवाएं बंद करने का कोई सवाल नहीं है और गुरुवार को बसें सामान्य रूप से चलाने की तैयारी है।
त्रिपाठी ने कहा, “अभी तक हमारा फैसला यही है कि कल बस सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी।” उनके इस बयान के बाद उन यात्रियों को राहत मिली है जिन्हें 8 अक्टूबर को एक शहर से दूसरे शहर या जिलों के बीच यात्रा करनी है।
INDIA गठबंधन ने 8 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। बंद के पीछे MMDR संशोधन कानून, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और स्कूल की पाठ्यपुस्तकों से जुड़े विवाद जैसे मुद्दों को प्रमुख रूप से उठाया गया है। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने कहा है कि बंद शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित किया जाएगा।
ऐसे में परिवहन सेवाओं को लेकर लोगों के बीच असमंजस था कि निजी बसें चलेंगी या नहीं। खासकर रोजाना नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और जरूरी कामों के लिए बसों पर निर्भर रहने वाले यात्रियों की नजर बस मालिक संघ के फैसले पर थी।
एसोसिएशन ने अब स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उसकी ओर से बस संचालन रोकने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है।
बस मालिक संघ का कहना है कि यदि किसी बंद या आंदोलन में उनकी औपचारिक भागीदारी मांगी जाती है तो संगठन स्तर पर विचार किया जाता है, लेकिन इस बार फिलहाल ऐसा कोई संपर्क नहीं हुआ है।
इसलिए निजी बस ऑपरेटरों को सामान्य समय के अनुसार सेवाएं जारी रखने की तैयारी रखने को कहा गया है।
हालांकि बंद के दौरान सड़क की वास्तविक स्थिति के आधार पर अलग-अलग मार्गों पर बसों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। यदि प्रदर्शनकारियों की ओर से सड़क जाम या चक्का जाम किया जाता है तो कुछ स्थानों पर बसों को रुकना पड़ सकता है।
एसोसिएशन की ओर से सेवाएं जारी रखने का निर्णय इस बात की गारंटी नहीं है कि हर मार्ग पर संचालन बिना किसी बाधा के होगा। स्थानीय परिस्थिति, यातायात और कानून-व्यवस्था के आधार पर बस चालक और ऑपरेटर निर्णय ले सकते हैं।
राज्य में निजी बसों का नेटवर्क सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दूरदराज के जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग रोजाना निजी बस सेवाओं पर निर्भर रहते हैं।
यदि बड़े स्तर पर बस सेवाएं बंद हो जाती हैं तो आम यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि एसोसिएशन के ताजा बयान को यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इससे पहले राज्य में हुए बंद के दौरान निजी बस सेवाएं प्रभावित होने के उदाहरण भी सामने आए हैं। 30 सितंबर को एक अन्य बंद के दौरान कई निजी बसें सुबह के समय सड़कों पर नहीं उतरी थीं और बाद में स्थिति सामान्य होने पर दोपहर से सेवाएं बहाल की गई थीं।
इस बार बस मालिक संघ पहले ही कह चुका है कि उसने सेवा रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया है।
INDIA गठबंधन की ओर से बंद की तैयारी कई दिनों से चल रही है। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने अलग-अलग जिलों में कार्यकर्ताओं से बंद को सफल बनाने की अपील की है।
इसके साथ ही खनन क्षेत्रों में आर्थिक नाकेबंदी और विरोध कार्यक्रमों की भी घोषणा की गई है। गठबंधन की प्रमुख मांगों में MMDR संशोधन कानून वापस लेना शामिल है।
कांग्रेस का आरोप है कि खनन कानून में बदलाव से ओडिशा के आर्थिक और खनिज हित प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर यह मुद्दा राजनीतिक विवाद का विषय बना हुआ है और सत्तारूढ़ दल विपक्ष के आरोपों से सहमत नहीं है।
बंद के दौरान सार्वजनिक परिवहन का संचालन राजनीतिक आंदोलनों में हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दा होता है। बस, टैक्सी और ऑटो सेवाओं के प्रभावित होने पर आम लोगों की दिनचर्या पर सीधा असर पड़ता है।
स्कूल-कॉलेज, कार्यालय, अस्पताल और रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट जाने वाले लोगों को सबसे अधिक दिक्कत होती है।
ओडिशा प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन के बयान के बाद कम से कम निजी बसों को लेकर स्थिति फिलहाल स्पष्ट हो गई है।
एसोसिएशन ने कहा है कि बस मालिक अपने निर्धारित रूट पर सेवाएं देने की तैयारी में हैं और संगठन की तरफ से किसी सामूहिक हड़ताल या संचालन बंद करने का आह्वान नहीं किया गया है।
यदि गुरुवार सुबह किसी इलाके में विरोध प्रदर्शन या रास्ता अवरुद्ध होने की स्थिति बनती है तो स्थानीय स्तर पर बस सेवाओं में बदलाव किया जा सकता है।
यात्रियों को भी यात्रा से पहले अपने संबंधित बस ऑपरेटर या बस स्टैंड से स्थानीय स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी जा सकती है।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन ने बंद को शांतिपूर्ण रखने की बात कही है। OPCC अध्यक्ष भक्त चरण दास पहले कह चुके हैं कि सहयोगी दल पूरे राज्य में शांतिपूर्ण तरीके से बंद कराएंगे।
ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती होगी कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ लोगों की आवाजाही भी यथासंभव प्रभावित न हो।
राज्य के प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की जा सकती है। विशेष रूप से बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और बाजार क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाए जाने की संभावना है।
बस ऑपरेटरों के लिए भी सुरक्षा बड़ा मुद्दा रहेगा। यदि कहीं प्रदर्शनकारियों की भीड़ या तनाव की स्थिति बनती है तो चालक यात्रियों और वाहन की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बस रोक सकते हैं।
फिलहाल एसोसिएशन का आधिकारिक रुख साफ है कि 8 अक्टूबर को निजी बस सेवाएं बंद नहीं की जाएंगी।
इस फैसले से राज्य के लाखों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन वास्तविक संचालन सड़क की स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
गुरुवार को बंद के असर का सबसे स्पष्ट संकेत सुबह से ही मिलना शुरू हो जाएगा, जब अलग-अलग जिलों में बस सेवाएं सामान्य रूप से शुरू होंगी और प्रदर्शनकारी अपने कार्यक्रम के तहत सड़कों पर उतरेंगे।
फिलहाल ओडिशा प्राइवेट बस ओनर्स एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि बंद के समर्थन में निजी बस सेवाएं रोकने का कोई फैसला नहीं लिया गया है और मौजूदा योजना के अनुसार बसें सामान्य रूप से चलेंगी।





