ओडिशा

कोचिंग के बहाने छात्र को होटल ले गया प्रिंसिपल गिरफ्तार

Kavita2
13 Sept 2026 4:42 PM IST
कोचिंग के बहाने छात्र को होटल ले गया प्रिंसिपल गिरफ्तार
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बारगढ़। ओडिशा के बारगढ़ जिले में एक निजी कॉलेज के प्रिंसिपल को दसवीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि प्रिंसिपल छात्र को कोचिंग देने के बहाने बारगढ़ ले गया और वहां एक होटल का कमरा बुक कर उसे रात भर रुकने को कहा। होटल के कमरे में छात्र के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न किया गया। छात्र ने किसी तरह अपने परिवार को संदेश भेजकर घटना की जानकारी दी, जिसके बाद परिजन पुलिस की मदद से होटल पहुंचे और उसे बचाया गया।

आरोपी की पहचान देबादत्त प्रधान के रूप में हुई है। वह जिले के बारडोल स्थित एक निजी कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत बताया गया है। मामले में दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपी पहले छात्र को कॉलेज के कोचिंग सेंटर से अपने साथ बारगढ़ ले गया था। परिवार को बताया गया कि पढ़ाई और कोचिंग से जुड़े काम के कारण छात्र को रात भर वहां रुकना पड़ेगा।

परिवार ने प्रिंसिपल और शिक्षण संस्थान से जुड़े पद पर भरोसा करते हुए छात्र को उसके साथ जाने की अनुमति दे दी। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने इस भरोसे का दुरुपयोग किया। छात्र को पढ़ाई कराने के नाम पर एक होटल में ले जाया गया, जहां आरोपी ने कथित रूप से उसका यौन उत्पीड़न किया।

बताया गया है कि होटल के कमरे में मौजूद छात्र ने परिस्थिति को समझते हुए किसी तरह अपने परिवार को मोबाइल से संदेश भेजा। संदेश मिलने के बाद परिवार के सदस्यों को अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने तत्काल पुलिस से सहायता मांगी। इसके बाद संबंधित होटल तक पहुंचकर छात्र को वहां से सुरक्षित निकाला गया।

परिवार की शिकायत के आधार पर आरोपी प्रिंसिपल को हिरासत में लिया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। मामले में छात्र तथा उसके परिवार के बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। घटनाक्रम से संबंधित होटल के रिकॉर्ड, कमरे की बुकिंग का विवरण, मोबाइल फोन पर भेजे गए संदेश और अन्य संभावित साक्ष्य भी मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया में अहम हो सकते हैं। हालांकि इन साक्ष्यों की आधिकारिक पुष्टि से संबंधित विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

घटना में पीड़ित दसवीं कक्षा का छात्र नाबालिग है। कानून के अनुसार किसी भी प्रकार के यौन अपराध से जुड़े मामले में नाबालिग पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है। इसलिए छात्र का नाम, तस्वीर, स्कूल, निवास स्थान या परिवार की पहचान उजागर करने वाली जानकारी प्रकाशित नहीं की जानी चाहिए। उसकी निजता और मानसिक स्थिति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

यह मामला शिक्षक और विद्यार्थी के बीच भरोसे के संबंध को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाई, कोचिंग और मार्गदर्शन के लिए शिक्षकों तथा संस्थान के जिम्मेदार लोगों के पास भेजते हैं। आरोप सही पाए जाने की स्थिति में यह केवल एक आपराधिक कृत्य ही नहीं, बल्कि शिक्षक के पद से जुड़े विश्वास के दुरुपयोग का मामला भी होगा।

घटना सामने आने के बाद अभिभावकों के लिए भी सतर्कता से जुड़े कई सवाल उठे हैं। किसी शिक्षक या संस्थान के प्रतिनिधि द्वारा बच्चे को दूसरे शहर, होटल या किसी निजी स्थान पर ले जाने की बात कही जाए तो यात्रा का उद्देश्य, ठहरने का स्थान और कार्यक्रम की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। बच्चे से नियमित संपर्क बनाए रखना तथा किसी भी असामान्य स्थिति में तत्काल संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि छात्रों के लिए स्पष्ट बाल-सुरक्षा नीति लागू करें। किसी शिक्षक द्वारा छात्र को अकेले बाहर ले जाने, रात में रुकवाने या निजी स्थान पर बुलाने से संबंधित नियम निर्धारित होने चाहिए। ऐसी गतिविधियों के लिए अभिभावकों की लिखित सहमति, संस्थान की आधिकारिक जानकारी और निगरानी की व्यवस्था बच्चों की सुरक्षा को मजबूत कर सकती है।

बाल यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में पीड़ित बच्चे को बार-बार घटना का विवरण बताने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उससे संवेदनशील और बाल-अनुकूल वातावरण में बातचीत होनी चाहिए। परिवार को भी बच्चे को दोष देने या उस पर सवाल उठाने के बजाय उसका भरोसा बनाए रखना चाहिए। मनोवैज्ञानिक परामर्श और भावनात्मक सहयोग ऐसी घटना के बाद बच्चे को सामान्य जीवन की ओर लौटने में मदद कर सकते हैं।

इस मामले में छात्र की सूझबूझ ने परिवार तक समय रहते सूचना पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई। बच्चों को यह बताया जाना चाहिए कि किसी भी असहज स्पर्श, धमकी या अनुचित व्यवहार की जानकारी तुरंत माता-पिता अथवा किसी विश्वसनीय व्यक्ति को दें। ऐसे मामलों में बच्चे की बात को गंभीरता से सुनना और त्वरित सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।

फिलहाल आरोपी को शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। उस पर लगाए गए आरोपों की अंतिम सत्यता साक्ष्यों, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद निर्धारित होगी। गिरफ्तारी को दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। संबंधित संस्थान की ओर से आरोपी के खिलाफ किसी विभागीय कार्रवाई या निलंबन के संबंध में तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

मामले ने निजी शिक्षण संस्थानों और कोचिंग केंद्रों में छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर दोबारा ध्यान खींचा है। अभिभावकों ने अपेक्षा जताई है कि मामले की निष्पक्षता से कार्रवाई हो और पीड़ित छात्र को आवश्यक कानूनी, चिकित्सकीय तथा मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।

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