
Odisha ओडिशा: आदिवासी छात्रों में विज्ञान शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशभर के 75 चुने हुए एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों (EMRS) में स्पेस लैब्स का उद्घाटन किया। इस पहल के तहत ओडिशा के 13 स्कूल भी शामिल हैं, जहां अब आधुनिक स्पेस लैब्स की सुविधा उपलब्ध होगी।
इस पहल का उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में मजबूत बनाना है, ताकि वे भविष्य में वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ सकें। इन लैब्स के माध्यम से छात्रों को अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी प्रयोग और आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के उपयोग का अवसर मिलेगा।
ओडिशा में जिन EMRS स्कूलों को इस योजना में शामिल किया गया है, उनमें कोरापुट जिले के कोटपाड़ और कुंद्रा, मलकानगिरी जिले का मथिली, कालाहांडी का थुआमुल रामपुर, क्योंझर का पटाना और मयूरभंज जिले के आठ स्कूल शामिल हैं। मयूरभंज के इन स्कूलों में रायरंगपुर, ठाकुरमुंडा, बारीपदा, बड़ासाही, कपटीपाड़ा, कोलियाना, रसगोविंदपुर और उडाला शामिल हैं।
इस कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री जुएल ओराम और राज्य मंत्री दुर्गादास उइके की मौजूदगी में किया गया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के EMRS संस्थानों के छात्र, शिक्षक, प्रिंसिपल और शिक्षा विभाग के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर कहा कि शिक्षा में विज्ञान और तकनीक का समावेश आदिवासी समुदाय के बच्चों के भविष्य को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेंगे।
केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्रालय के अनुसार, इन स्पेस लैब्स का मुख्य उद्देश्य छात्रों में इनोवेशन, क्रिटिकल थिंकिंग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करना है। इन लैब्स में छात्रों को प्रैक्टिकल ट्रेनिंग, मॉडल प्रोजेक्ट्स और आधुनिक टेक्नोलॉजी के साथ काम करने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने में मील का पत्थर साबित होगी। इससे न केवल विज्ञान शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि छात्रों को STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए भी प्रेरणा मिलेगी।
सरकार का लक्ष्य है कि EMRS स्कूलों को आधुनिक शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए, जहां ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को भी शहरी स्तर की सुविधाएं मिल सकें।
इस योजना के तहत आने वाले समय में अन्य EMRS स्कूलों को भी इस प्रकार की सुविधाओं से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है, ताकि देशभर में आदिवासी शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।





