
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में दान प्रक्रिया को आसान और आधुनिक बनाने के लिए ई-हुंडी सिस्टम शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत भक्त अब ऑनलाइन माध्यम से भी मंदिर में दान कर सकेंगे, जिससे देश और विदेश में बैठे श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।
इस संबंध में कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें डिजिटल डोनेशन प्लेटफॉर्म को लागू करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। बैठक में यह तय करने पर जोर दिया गया कि सिस्टम को सरल, सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाए, ताकि अधिक से अधिक भक्त इसका लाभ उठा सकें।
प्रस्तावित ई-हुंडी सिस्टम के तहत श्रद्धालु अपने विशेष अवसरों जैसे जन्मदिन, शादी की सालगिरह या किसी मनोकामना पूरी होने पर डिजिटल माध्यम से दान कर सकेंगे। इसके लिए एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जिसके जरिए भक्त कहीं से भी मंदिर में योगदान दे सकेंगे।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस डिजिटल दान प्रणाली के माध्यम से किए गए योगदान पर इनकम टैक्स में छूट का लाभ भी दिया जाएगा। यह कदम भक्तों को प्रोत्साहित करने और मंदिर को अधिक पारदर्शी वित्तीय प्रणाली से जोड़ने के उद्देश्य से लिया जा रहा है।
इस योजना के तहत एकत्रित धनराशि का उपयोग श्री जगन्नाथ मंदिर के विकास कार्यों और प्रबंधन गतिविधियों में किया जाएगा। इसमें मंदिर की सुविधाओं का आधुनिकीकरण, श्रद्धालुओं के लिए बेहतर व्यवस्थाएं और रखरखाव कार्य शामिल होंगे।
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि ई-हुंडी सिस्टम को तकनीकी रूप से मजबूत और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या तकनीकी समस्या से बचा जा सके। अधिकारियों ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यह सभी आयु वर्ग के भक्तों के लिए आसान हो।
इस पहल से न केवल ओडिशा, बल्कि देश और विदेश में रहने वाले लाखों जगन्नाथ भक्तों को लाभ मिलने की उम्मीद है। जो लोग किसी कारणवश मंदिर नहीं आ पाते, वे भी अब आसानी से ऑनलाइन दान कर सकेंगे और अपनी श्रद्धा व्यक्त कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मंदिर प्रबंधन को आधुनिक डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगा। इससे न केवल दान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि मंदिर की आय और प्रबंधन व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित होगी।
ओडिशा सरकार का यह प्रयास धार्मिक परंपराओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले समय में इसे अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है।





