ओडिशा

महानदी जल विवाद पर दिल्ली बैठक को लेकर सियासत तेज

Kavita2
31 July 2026 3:24 PM IST
महानदी जल विवाद पर दिल्ली बैठक को लेकर सियासत तेज
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भुवनेश्वर। ओडिशा में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के दिल्ली दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) प्रमुख नवीन पटनायक के आरोपों पर ओडिशा सरकार के मंत्री सुरेश पुजारी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए प्रयास कर रहे थे और यह उनका "राज धर्म" निभाने का हिस्सा है।

सुरेश पुजारी ने कहा कि मुख्यमंत्री का दिल्ली जाना किसी राजनीतिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं था, बल्कि राज्य के एक महत्वपूर्ण जल विवाद के समाधान के लिए था। उन्होंने कहा कि महानदी जल बंटवारे का मुद्दा ओडिशा के हितों से जुड़ा हुआ है और इसे हल करने के लिए केंद्र और संबंधित राज्यों के साथ बातचीत जरूरी है।

दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी गुरुवार को दिल्ली में थे, जहां उन्होंने महानदी नदी के जल बंटवारे और प्रबंधन को लेकर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में हिस्सा लिया। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सी.आर. पाटिल ने की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद थे।

बैठक का उद्देश्य महानदी जल विवाद से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना और दोनों राज्यों के बीच समाधान की संभावनाओं पर विचार करना था। ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं।

इस बीच, ओडिशा के कई तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति को लेकर विपक्ष ने राज्य सरकार पर निशाना साधा। बीजद प्रमुख नवीन पटनायक ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया कि जब राज्य के लोग बाढ़ की समस्या से जूझ रहे थे, तब मुख्यमंत्री दिल्ली में बैठक में शामिल हो रहे थे।

विपक्ष ने सवाल उठाया कि बाढ़ जैसी आपात स्थिति के दौरान मुख्यमंत्री को राज्य में मौजूद रहकर राहत और बचाव कार्यों की निगरानी करनी चाहिए थी। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है।

नवीन पटनायक के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरेश पुजारी ने कहा कि मुख्यमंत्री माझी ने बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा राज्य के हित में था और इसे राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है।

मंत्री ने कहा कि महानदी जल विवाद कई वर्षों से लंबित है और इसका समाधान ओडिशा के भविष्य के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्य के हितों को मजबूती से रखा और इस दिशा में सकारात्मक प्रयास किए।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। पुजारी ने कहा कि आपदा के समय राजनीति करने के बजाय सभी दलों को मिलकर लोगों की मदद करनी चाहिए।

ओडिशा में मानसून के दौरान महानदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बना रहता है। राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत कार्य किए जा रहे हैं।

महानदी जल विवाद ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चला आ रहा एक प्रमुख मुद्दा है। ओडिशा का आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ में बनाए गए बांधों और बैराजों के कारण राज्य में नदी के प्रवाह पर असर पड़ा है। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार अपने स्तर पर जल प्रबंधन और विकास योजनाओं को लेकर अपने तर्क देती रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि महानदी का मुद्दा ओडिशा में काफी संवेदनशील है और किसी भी सरकार के लिए इससे जुड़े फैसले राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री की दिल्ली बैठक को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर इस मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

फिलहाल राज्य सरकार बाढ़ की स्थिति से निपटने और महानदी जल विवाद के समाधान दोनों मोर्चों पर काम करने का दावा कर रही है। वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

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