
भुवनेश्वर। पूर्वी भारत में बढ़ते संगठित अपराध, साइबर ठगी, मादक पदार्थों की तस्करी और वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए पांच राज्यों की पुलिस ने मिलकर रणनीति तैयार करने का फैसला किया है। इसके लिए ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में पूर्वी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति (ईआरपीसीसी) की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें पांच राज्यों के पुलिस महानिदेशक (DGP) और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ के पुलिस प्रमुखों ने हिस्सा लिया। बैठक की अध्यक्षता ओडिशा के डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने की। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में अपराध और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां किसी एक राज्य की सीमा तक सीमित नहीं रह गई हैं। संगठित अपराधी गिरोह, साइबर अपराधी नेटवर्क, नशे के कारोबारी और उग्रवादी संगठन कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला चुके हैं। ऐसे में इनसे निपटने के लिए राज्यों के बीच बेहतर तालमेल और सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान जरूरी है।
डीजीपी खुरानिया ने कहा कि कोई भी राज्य अकेले इन गंभीर चुनौतियों का सामना नहीं कर सकता। इसके लिए संयुक्त अभियान, रीयल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस बलों के बीच बेहतर समन्वय से अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा अंतरराज्यीय अपराधों और नक्सल गतिविधियों को रोकने को लेकर हुई। अधिकारियों ने आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों की निगरानी, उनके पुनर्वास और उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी बनाकर नक्सलवाद की जड़ों को कमजोर किया जा सकता है।
साइबर अपराध को लेकर भी बैठक में विशेष चिंता जताई गई। अधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन ठगी, डिजिटल फ्रॉड और साइबर हमलों में शामिल अपराधी अक्सर कई राज्यों में फैले नेटवर्क के जरिए वारदात को अंजाम देते हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों के बीच तुरंत सूचना साझा करना और संयुक्त कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। बैठक में साइबर अपराधियों के खिलाफ बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई की व्यवस्था बनाने पर सहमति बनी।
इसके अलावा मादक पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी पर भी सख्ती से रोक लगाने की रणनीति तैयार की गई। अधिकारियों ने ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क को खत्म करने के लिए संयुक्त अभियान चलाने और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया। मानव तस्करी, संगठित अपराध गिरोहों की गतिविधियों और सीमावर्ती इलाकों में कानून व्यवस्था की चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में रेलवे सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में होने वाले अपराधों को रोकने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के उपायों पर चर्चा की गई। वहीं अवैध घुसपैठ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए भी संयुक्त और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता बताई गई।
अधिकारियों ने जीरो एफआईआर मामलों के जल्द हस्तांतरण और समयबद्ध जांच को लेकर भी चर्चा की। उन्होंने माना कि कई अपराध ऐसे होते हैं जिनका संबंध एक से अधिक राज्यों से होता है, इसलिए जांच प्रक्रिया को आसान और तेज बनाना जरूरी है।
बैठक में शामिल सभी राज्यों ने भविष्य में नियमित अंतराल पर ऐसी समन्वय बैठकें आयोजित करने पर सहमति जताई। इन बैठकों में सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा, सफल अभियानों के अनुभव साझा करने और नई रणनीतियां तैयार करने का निर्णय लिया गया।
बैठक के समापन पर डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने कहा कि इस बैठक में लिए गए फैसले पूर्वी भारत में कानून व्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से संगठित अपराध, नक्सलवाद और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकेगा।
इस बैठक में सीआईडी-सीबी, खुफिया विभाग, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने माना कि बदलते अपराध के तरीकों को देखते हुए पुलिस व्यवस्था में भी लगातार बदलाव और तकनीकी मजबूती जरूरी है।





