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सिमिलिपाल में 1 नवंबर से जीप सफारी
भुवनेश्वर: ओडिशा के मयूरभंज जिले में स्थित सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में पर्यटकों का इंतजार जल्द खत्म होने वाला है। रिजर्व को 1 नवंबर 2026 से पर्यटन सत्र 2026-27 के लिए खोला जाएगा। मानसून के कारण बंद रहने के बाद यहां पर्यटक दोबारा जंगल, झरनों और वन्यजीवों से समृद्ध प्राकृतिक क्षेत्र की सैर कर सकेंगे। रिजर्व प्रशासन ने पर्यटकों के प्रवेश, वाहनों की पात्रता और गाइड की व्यवस्था को लेकर नियम निर्धारित किए हैं। यात्रा की योजना बनाते समय इन शर्तों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
हर दिन अधिकतम 60 वाहनों को अनुमति
जारी अधिसूचना के अनुसार, रिजर्व में प्रतिदिन अधिकतम 60 वाहनों को प्रवेश दिया जाएगा। वाहनों का ग्राउंड क्लियरेंस कम से कम 180 मिलीमीटर होना चाहिए। इसका अर्थ है कि वाहन के निचले हिस्से और जमीन के बीच निर्धारित न्यूनतम दूरी आवश्यक होगी। जंगल के भीतर जाने वाले प्रत्येक पर्यटक वाहन के साथ गाइड रखना भी अनिवार्य किया गया है।
रिजर्व को मानसून के दौरान 29 जून से पर्यटकों के लिए बंद किया गया था। अब नवंबर से पर्यटन गतिविधियां फिर शुरू होंगी। प्रवेश की दैनिक सीमा तय होने के कारण पर्यटकों को अपनी यात्रा से पहले अनुमति और वाहन की उपलब्धता की जानकारी लेनी चाहिए।
दो प्रवेश बिंदुओं के लिए अलग-अलग समय
पर्यटक जशीपुर प्रवेश द्वार से सुबह पांच बजे से नौ बजे के बीच प्रवेश कर सकेंगे। वहीं, बारीपदा डिवीजन के पिथाबाटा प्रवेश बिंदु से सुबह आठ बजे से नौ बजे तक प्रवेश की अनुमति होगी। दोनों स्थानों के समय अलग हैं, इसलिए चुने गए रास्ते के अनुसार पहुंचने की तैयारी करनी होगी।
दिन में भ्रमण करने वाले पर्यटकों को जोरांडा और बरेहीपानी जलप्रपात क्षेत्र शाम चार बजे से पहले छोड़ना होगा। उसी दिन शाम छह बजे तक रिजर्व से बाहर निकलना अनिवार्य रहेगा। जंगल के भीतर घूमने और वापसी का कार्यक्रम इस तरह बनाना होगा कि निर्धारित समय पर निकास द्वार तक पहुंचा जा सके।
पहचान पत्र और नियमों की सहमति जरूरी
प्रवेश के समय पर्यटकों को वैध पहचान पत्र दिखाना होगा। रिजर्व के निर्धारित नियमों का पालन करने के लिए लिखित सहमति भी देनी होगी। अधिसूचना में नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है। दैनिक भ्रमण और रिजर्व के भीतर रात रुकने की बुकिंग की प्रक्रिया अलग हो सकती है। आधिकारिक परमिट संबंधी जानकारी में पर्यटकों को यात्रा के प्रकार के अनुसार व्यवस्था चुनने को कहा गया है। रात में ठहरने की इच्छा रखने वालों को पहले से आरक्षण कराना चाहिए। पहचान पत्र और बुकिंग का विवरण साथ रखने से प्रवेश के समय आवश्यक सत्यापन पूरा करने में सुविधा होगी।
खुली जीप सफारी की भी व्यवस्था
पर्यटक ओडिशा की आधिकारिक इकोटूरिज्म बुकिंग व्यवस्था के माध्यम से खुली जीप सफारी का आरक्षण कर सकते हैं। घोषित व्यवस्था के अनुसार, सफारी के लिए गुडुगुड़िया, पिथाबाटा चेक गेट, जमुआनी चेक गेट, तालबंधा चेक गेट और बरेहीपानी जैसे स्थान निर्धारित हैं। सुबह की सफारी साढ़े पांच बजे शुरू होकर लगभग पांच घंटे चलेगी। दोपहर की सफारी दो बजे शुरू होकर करीब चार घंटे की होगी। यात्रा से पहले अपने बुकिंग विवरण में दर्ज समय और प्रस्थान स्थल की पुष्टि करना उचित रहेगा। इससे सामान्य प्रवेश और विशेष सफारी के कार्यक्रम को लेकर भ्रम नहीं होगा।
प्राकृतिक विविधता है सिमिलिपाल की पहचान
सिमिलिपाल के आकर्षणों में घने जंगलों के साथ बरेहीपानी और जोरांडा के जलप्रपात शामिल हैं। यह क्षेत्र अपनी वनस्पतियों, ऑर्किड और विविध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यहां बाघ, हाथी, तेंदुए और हिरण सहित कई प्रजातियां पाई जाती हैं। मानसून के महीनों में सुरक्षा तथा वन क्षेत्र के प्राकृतिक पुनर्जीवन को ध्यान में रखते हुए पर्यटन गतिविधियां बंद रखी जाती हैं। रिजर्व की विशेष पहचान दुर्लभ स्यूडो-मेलानिस्टिक बाघ भी हैं। इनकी चौड़ी और आपस में मिलती काली धारियां सामान्य बाघों से अलग स्वरूप देती हैं। सफारी के दौरान वन्यजीवों का दिखना प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर रहता है। पर्यटकों को गाइड के निर्देशों और निर्धारित मार्ग का पालन करते हुए जंगल का अनुभव लेना होगा।
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