ओडिशा

ओडिशा में 46 छात्राओं के बीमार होने से हड़कंप, हॉस्टल के खाने पर सवाल

Ashish verma
8 Oct 2026 10:15 PM IST
ओडिशा में 46 छात्राओं के बीमार होने से हड़कंप, हॉस्टल के खाने पर सवाल
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मयूरभंज। ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक सरकारी आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में खाना खाने के बाद 46 छात्राओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। अचानक इतनी बड़ी संख्या में छात्राओं के बीमार पड़ने से स्कूल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। बीमार छात्राओं को उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी परेशानियां होने लगीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए छात्राओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में पहुंचाया गया, जबकि कुछ का इलाज छात्रावास में ही किया गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया और मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर फूड पॉइजनिंग या दूषित पेयजल के कारण छात्राओं की तबीयत बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मंत्री एसएसडी गर्ल्स हाई स्कूल में सामने आया मामला
यह घटना मयूरभंज जिले के बड़साही ब्लॉक स्थित मंत्री एसएसडी गर्ल्स हाई स्कूल के छात्रावास की है। यह आवासीय विद्यालय अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग से संबंधित है।जानकारी के अनुसार, छात्राओं ने रात में हॉस्टल में तैयार भोजन किया था। इसके बाद वे अपने कमरों में सोने चली गईं। कुछ समय बाद छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
शुरुआत में कुछ छात्राओं ने पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत की। इसके बाद उल्टी और दस्त की समस्या होने लगी। धीरे-धीरे अन्य छात्राओं में भी इसी तरह के लक्षण दिखाई देने लगे।एक साथ कई छात्राओं की हालत बिगड़ने के बाद हॉस्टल प्रबंधन ने तत्काल चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की।
8 छात्राएं मंत्री स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती
जिला प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कुल 46 छात्राएं बीमार पाई गईं। इनमें आठ छात्राओं को मंत्री स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए रखा गया है।इसके अलावा 11 छात्राओं का इलाज बड़साही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। शेष 27 छात्राओं को विद्यालय के छात्रावास में ही चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें छात्राओं की स्थिति पर नजर रख रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार, उपचार प्राप्त कर रही छात्राओं की हालत स्थिर बताई गई है।प्रशासन ने सभी प्रभावित छात्राओं को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
खाना खाने के बाद बिगड़ी छात्राओं की तबीयत
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्राओं को रात के भोजन में चावल और सब्जी परोसी गई थी। भोजन करने के लगभग एक घंटे बाद कुछ छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी।
इसके बाद बीमार छात्राओं की संख्या बढ़ती गई। स्थिति को देखते हुए हॉस्टल वार्डन ने उन्हें स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाने की व्यवस्था की।कुछ छात्राओं को प्राथमिक उपचार के बाद भी चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता पड़ी, जिसके कारण उन्हें बड़साही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।चिकित्सकों ने आशंका जताई है कि भोजन में किसी प्रकार की गड़बड़ी या दूषित पानी का सेवन बीमारी का कारण हो सकता है। हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
कलेक्टर ने अस्पताल पहुंचकर लिया हालचाल
घटना की जानकारी मिलते ही मयूरभंज के जिला कलेक्टर हेमकांत साय ने अस्पताल पहुंचकर बीमार छात्राओं की स्थिति का जायजा लिया।उन्होंने उपचार कर रहे चिकित्सकों से बातचीत की और छात्राओं को समय पर उचित इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।इसके बाद कलेक्टर ने मंत्री एसएसडी गर्ल्स हॉस्टल का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छात्रावास की रसोई, भोजन कक्ष और पेयजल सुविधाओं की स्थिति देखी।
कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को भोजन तथा पेयजल की जांच रिपोर्ट जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में किसी कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति की लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
एडीएम ने कहा, जांच के बाद स्पष्ट होगा कारण
मयूरभंज के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट नेत्रानंद मलिक ने बताया कि जिला प्रशासन को घटना की जानकारी गुरुवार को मिली थी।सूचना मिलने के बाद कलेक्टर ने तत्काल विद्यालय का दौरा किया और स्वास्थ्य अधिकारियों से स्थिति की जानकारी प्राप्त की।एडीएम ने कहा कि प्रशासन पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित छात्राओं का उपचार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से सभी जिलों को भोजन और अन्य सुविधाओं में स्वच्छता बनाए रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।छात्राओं के बीमार पड़ने का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
भोजन और पानी के नमूने जांच के लिए भेजे
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छात्रावास पहुंचकर भोजन और पेयजल के नमूने एकत्र किए हैं।इन नमूनों की प्रयोगशाला जांच के माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने का संबंध भोजन या पानी से था या नहीं।
बड़साही और जिला मुख्यालय अस्पताल की मेडिकल टीमों ने भी छात्रावास का दौरा किया।जांच के दौरान भोजन तैयार करने की व्यवस्था, रसोई की साफ-सफाई और पेयजल की गुणवत्ता जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।जिला कल्याण अधिकारी को भी पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
मयूरभंज जिले के आवासीय विद्यालयों में छात्राओं के बीमार पड़ने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।अप्रैल 2026 में जिले के काकाबंधा आश्रम विद्यालय में बासी भोजन खाने के बाद 100 से अधिक विद्यार्थी बीमार पड़ गए थे। उस घटना में पांचवीं कक्षा की एक छात्रा की मौत भी हुई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया था और ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी।
जुलाई 2026 में सरगड़ा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में भी कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया था। उस समय भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की गई थीं।
छात्रावासों की भोजन व्यवस्था पर उठे सवाल
एक ही छात्रावास में 46 छात्राओं के बीमार पड़ने की घटना ने आवासीय विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को नियमित रूप से सुरक्षित भोजन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना आवश्यक है।भोजन तैयार करने वाली रसोई की साफ-सफाई, खाद्य सामग्री का उचित भंडारण और पानी की नियमित जांच जैसी व्यवस्थाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं।जिला प्रशासन की जांच में इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद होगी कार्रवाई
फिलहाल सभी प्रभावित छात्राओं का उपचार किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निगरानी रखने और जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं।कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि छात्राओं के बीमार पड़ने की वजह दूषित भोजन, पेयजल या कोई अन्य कारण था।
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