
राउरकेला। ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की आवाजाही ने रेलवे प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर रेल मंडल अंतर्गत बंडामुंडा सेक्शन में करीब 25 जंगली हाथियों का झुंड पहुंचने से हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ। वन्यजीवों और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे ने ए-केबिन, पी-केबिन और डी-केबिन के बीच कई बार एहतियातन ट्रेनों की आवाजाही रोकी। इस दौरान कई यात्री ट्रेनों को अलग-अलग स्थानों पर खड़ा करना पड़ा। रेलवे और वन विभाग की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को भी हाथियों की गतिविधियों के मद्देनजर सतर्कता बरती गई। इससे पहले रविवार तड़के बंडामुंडा रेलवे यार्ड के आसपास 24 हाथियों का झुंड पहुंचने की पुष्टि हुई थी। उस दौरान चार यात्री ट्रेनों सहित कई रेल सेवाओं पर असर पड़ा था।
रेलवे ट्रैक के पास पहुंचा हाथियों का झुंड
जानकारी के अनुसार, बंडामुंडा सेक्शन में जंगल की ओर से आए हाथियों का झुंड रेलवे लाइन के आसपास घूम रहा था।
हाथियों की संख्या लगभग 25 बताई जा रही है। हालांकि, रविवार की रिपोर्ट में वन विभाग के हवाले से 24 हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
झुंड में बड़े हाथियों के साथ छोटे बच्चे भी शामिल हैं।
हाथियों के रेलवे लाइन के इतने करीब पहुंचने से ट्रेन दुर्घटना की आशंका पैदा हो गई।
इसी कारण रेलवे अधिकारियों ने एहतियातन परिचालन नियंत्रित करने का फैसला लिया।
ए-केबिन से डी-केबिन तक बढ़ाई निगरानी
बंडामुंडा रेलवे सेक्शन में ए-केबिन, पी-केबिन और डी-केबिन के आसपास विशेष सतर्कता बरती गई।
इन स्थानों पर हाथियों की गतिविधियों के संबंध में वन विभाग से लगातार जानकारी प्राप्त हो रही थी।
रेलवे नियंत्रण कक्ष को सूचनाएं भेजकर ट्रेनों के परिचालन को आवश्यकतानुसार रोका गया।
इस दौरान लोको पायलटों और संबंधित रेल कर्मचारियों को भी सतर्क रहने की आवश्यकता रही।
वन्यजीवों की मौजूदगी वाले स्थानों से ट्रेनों को सुरक्षित निकालना रेलवे के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
चार यात्री ट्रेनें हुईं प्रभावित
रविवार तड़के करीब दो बजे हाथियों के रेलवे लाइन के आसपास पहुंचने से रेल यातायात प्रभावित होना शुरू हुआ था।
झुंड के पटरियों और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद रहने के कारण चार यात्री ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई।
इसके अलावा कुछ एक्सप्रेस ट्रेनों को भी निर्धारित मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए इंतजार करना पड़ा।
कई यात्री गंतव्य तक पहुंचने में हुई देरी से परेशान हुए।
रेलवे ने ट्रेनों की गति और आवाजाही को नियंत्रित कर संभावित दुर्घटनाओं से बचने का प्रयास किया।
वन विभाग और रेलवे ने संभाला मोर्चा
हाथियों की गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद रेलवे और वन विभाग के अधिकारियों ने समन्वय बढ़ाया।
सुंदरगढ़ के कलेक्टर डॉ. शुभंकर महापात्र, राउरकेला वन विभाग के अधिकारी और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति की निगरानी की।
रेलवे के डीआरएम तथा अन्य संबंधित अधिकारियों ने हाथियों की आवाजाही के संबंध में प्राप्त सूचनाओं के आधार पर परिचालन व्यवस्था की समीक्षा की।
वन विभाग की टीमों को भी प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया।
प्रशासन की प्राथमिकता हाथियों और रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही।
वन विभाग की टीमें मौके पर सक्रिय
राउरकेला वन मंडल के पानपोष और बीरमित्रपुर क्षेत्र के आसपास हाथियों की आवाजाही लंबे समय से देखी जाती रही है।
इस घटना में पानपोष और बीसरा वन परिक्षेत्र की टीमें हाथियों की निगरानी तथा उन्हें सुरक्षित जंगल की ओर ले जाने के प्रयासों में जुटीं।
राउरकेला के डीएफओ रविकांत मीणा के अनुसार, वन विभाग का उद्देश्य झुंड को रेलवे लाइन से दूर करना और उसे दोबारा पटरियों की ओर आने से रोकना है।
इसके लिए वन कर्मचारियों और विशेष दस्तों की सहायता ली गई।
झुंड में तीन छोटे हाथी भी शामिल
वन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को देखे गए 24 हाथियों के झुंड में पांच नर हाथी, तीन बच्चे और 16 मादा हाथी शामिल थीं।
बच्चों की मौजूदगी के कारण झुंड को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण था।
छोटे हाथी अक्सर झुंड के साथ धीमी गति से चलते हैं।
ऐसी स्थिति में वन विभाग को हाथियों के व्यवहार और उनकी दिशा पर लगातार ध्यान देना पड़ता है।
अचानक तेज आवाज या अन्य व्यवधान से हाथियों के विचलित होने का खतरा रहता है।
इसी कारण उन्हें सुरक्षित रास्ते से जंगल की ओर ले जाने के प्रयास किए गए।
हावड़ा-मुंबई रेलमार्ग पर बढ़ी चुनौती
हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग देश के महत्वपूर्ण रेलवे मार्गों में शामिल है।
इस मार्ग से लंबी दूरी की यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों का भी परिचालन होता है।
बंडामुंडा सेक्शन रेलवे परिचालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
यहां हाथियों के झुंड के पहुंचने से ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
रेलवे को ऐसी परिस्थितियों में समयबद्ध परिचालन और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
ट्रेनें रोकने से यात्रियों को असुविधा होती है, लेकिन हाथियों से टक्कर जैसी गंभीर दुर्घटना को रोकना अधिक महत्वपूर्ण होता है।
पहले भी रेलवे ट्रैक तक पहुंचे हाथी
बंडामुंडा क्षेत्र में रेलवे लाइन के आसपास हाथियों के पहुंचने की यह पहली घटना नहीं है।
13 अक्टूबर को भी 24 हाथियों का झुंड ए-केबिन के पास रेलवे पटरी तक पहुंच गया था।
उस समय सुरक्षा के मद्देनजर रात करीब 10:30 बजे ट्रेनों की आवाजाही रोकनी पड़ी थी।
वन विभाग की टीम ने तड़के करीब 4:30 बजे हाथियों को जंगल की ओर हटाने में सफलता हासिल की थी।
इसके बाद रेल परिचालन सामान्य किया गया था।
रात के समय बढ़ जाती है परेशानी
जंगल से सटे रेलवे क्षेत्रों में रात के समय हाथियों की आवाजाही रेल प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है।
अंधेरे में वन्यजीवों की गतिविधियों का पता लगाना दिन की तुलना में कठिन होता है।
ऐसे में वन विभाग से मिलने वाली सूचनाएं रेलवे के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।
लोको पायलटों को भी संवेदनशील रेलखंडों में विशेष सतर्कता बरतनी पड़ती है।
संभावित खतरे की जानकारी मिलने पर ट्रेनों की गति घटाना या परिचालन रोकना सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी सतर्कता
रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी केवल रेल परिचालन की समस्या नहीं है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण से भी जुड़ा विषय है।
तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आने से हाथियों को गंभीर चोट लग सकती है या उनकी मौत हो सकती है।
इसके अलावा हाथियों से टकराने पर रेल कर्मचारियों और यात्रियों की सुरक्षा को भी खतरा पैदा हो सकता है।
इसलिए रेलवे और वन विभाग के बीच सूचना साझा करना तथा संवेदनशील क्षेत्रों में निरंतर निगरानी आवश्यक है।
हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जंगल से जुड़े प्राकृतिक रास्तों की पहचान भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
ट्रेनों की आवाजाही पर लगातार नजर
बंडामुंडा सेक्शन में हाथियों की मौजूदगी के कारण रेलवे को कई बार परिचालन नियंत्रित करना पड़ा।
रेलवे अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि हाथियों के आसपास रहते हुए कोई ट्रेन असुरक्षित स्थिति में आगे न बढ़े।
वन विभाग की टीमों द्वारा झुंड की गतिविधियों की जानकारी दिए जाने के आधार पर आगे के परिचालन संबंधी फैसले लिए जा सकते हैं।
हालांकि, सोमवार को प्रभावित हुई सभी ट्रेनों और उनकी देरी की अंतिम अवधि का विस्तृत आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षा को प्राथमिकता, यात्रियों से सहयोग की अपेक्षा
हाथियों के झुंड के कारण ट्रेनों को रोकना यात्रियों के लिए असुविधाजनक जरूर है, लेकिन दुर्घटना रोकने के लिए यह आवश्यक कदम है।
रेलवे और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों का उद्देश्य झुंड को सुरक्षित जंगल की ओर भेजना और रेल परिचालन को सामान्य बनाए रखना है।
बंडामुंडा में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने वन्यजीवों की आवाजाही वाले रेलखंडों पर स्थायी निगरानी और प्रभावी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता को फिर रेखांकित किया है।





