ओडिशा

पहाला रसगुल्ला बाजार पर मंदी की मार, छेना की सप्लाई 40 से घटकर 10 क्विंटल

Kavita2
24 Aug 2026 12:37 PM IST
पहाला रसगुल्ला बाजार पर मंदी की मार, छेना की सप्लाई 40 से घटकर 10 क्विंटल
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भुवनेश्वर। ओडिशा का प्रसिद्ध पहाला रसगुल्ला बाजार इन दिनों कारोबार में भारी मंदी का सामना कर रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से मिलावटी छेना के खिलाफ सख्ती के बाद बाजार में छेना की आपूर्ति अचानक कम हो गई है। रसगुल्ला बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल छेना है और इसकी उपलब्धता घटने से मिठाई दुकानदारों के सामने उत्पादन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। पिछले तीन दिनों में छेना की आपूर्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर पहाला के प्रसिद्ध रसगुल्ला कारोबार पर पड़ा है।

पाहाला बाजार में बड़ी संख्या में मिठाई की दुकानें हैं और यहां तैयार होने वाले रसगुल्ले की मांग ओडिशा के साथ-साथ दूसरे क्षेत्रों में भी रहती है। लेकिन फिलहाल दुकानदारों को पर्याप्त मात्रा में छेना नहीं मिल पा रहा है। इसके कारण उत्पादन कम करना पड़ रहा है और कई दुकानों के सामने ग्राहकों की मांग पूरी करना मुश्किल हो गया है।

40 क्विंटल से घटकर 10 क्विंटल हुई सप्लाई

पहाला के मिठाई कारोबारियों के अनुसार, बाजार में करीब 100 मिठाई की दुकानें हैं। कुछ समय पहले तक इन दुकानों के लिए रोजाना करीब 40 क्विंटल छेना की आपूर्ति होती थी। इससे दुकानदार अपनी जरूरत के मुताबिक रसगुल्ले और अन्य छेना आधारित मिठाइयों का उत्पादन कर लेते थे।

लेकिन पिछले तीन दिनों में स्थिति तेजी से बदली है। अब बाजार में रोजाना करीब 10 क्विंटल ही छेना पहुंच पा रहा है। यानी आपूर्ति में करीब 75 फीसदी की गिरावट आई है। इतनी कम मात्रा में छेना उपलब्ध होने के कारण दुकानदारों को उत्पादन सीमित करना पड़ रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि यदि पर्याप्त छेना नहीं मिला तो आने वाले दिनों में बाजार में रसगुल्ले की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। कई दुकानों को अपनी उत्पादन क्षमता घटानी पड़ रही है, जबकि कुछ दुकानदार सीमित मात्रा में ही मिठाई तैयार कर रहे हैं।

मिलावटी छेना के खिलाफ कार्रवाई का असर

छेना की सप्लाई में आई कमी के पीछे खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विभाग ने मिलावटी छेना के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया है। कार्रवाई के बाद छेना तैयार करने और बाजार में इसकी आपूर्ति करने वाले उत्पादकों और व्यापारियों में सतर्कता बढ़ गई है।

मिलावट के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आम तौर पर उपभोक्ताओं की सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है। हालांकि अचानक हुई सख्ती का असर आपूर्ति श्रृंखला पर भी दिखाई दे रहा है। जिन इलाकों से नियमित रूप से पहाला में छेना पहुंचता है, वहां के दूध उत्पादक और डेयरी व्यापारी भी अब गुणवत्ता और जांच को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि कार्रवाई के कारण बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाला छेना भी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। इससे रसगुल्ला बनाने वाले दुकानदारों की परेशानी बढ़ गई है।

नियाली और अदासपुर से आता है बड़ा हिस्सा

पहाला बाजार में छेना की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा नियाली और अदासपुर क्षेत्रों से आता है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में दूध उत्पादक और डेयरी कारोबारी छेना तैयार कर नियमित रूप से पहाला बाजार में भेजते हैं।

स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था में इन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। दूध से छेना तैयार करने के बाद इसे रोजाना पहाला की मिठाई दुकानों तक पहुंचाया जाता है। इसी छेना से बाजार में बड़े पैमाने पर रसगुल्ले तैयार किए जाते हैं।

अब जब इन क्षेत्रों से आने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है तो इसका सीधा असर पहाला के बाजार पर पड़ा है। दुकानदारों को वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं, लेकिन कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में नई आपूर्ति व्यवस्था तैयार करना आसान नहीं है।

चीनी की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई मुश्किल

छेना की कमी के साथ-साथ चीनी की बढ़ती कीमतों ने भी मिठाई कारोबारियों की परेशानी बढ़ा दी है। रसगुल्ला तैयार करने में छेना के अलावा चीनी भी बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होती है। ऐसे में कच्चे माल की लागत बढ़ने से दुकानदारों का मुनाफा प्रभावित हो रहा है।

व्यापारियों के सामने एक तरफ छेना की उपलब्धता कम होने की समस्या है, तो दूसरी तरफ चीनी महंगी होने से उत्पादन लागत बढ़ रही है। यदि दुकानदार कीमत बढ़ाते हैं तो ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है और मांग प्रभावित होने की आशंका रहती है। वहीं कीमतें स्थिर रखने पर कारोबारियों का मार्जिन कम हो जाता है।

दुकानदारों के सामने दोहरी चुनौती

पहाला के रसगुल्ला कारोबारी इस समय दोहरी चुनौती से गुजर रहे हैं। पहली चुनौती पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण छेना की उपलब्धता है और दूसरी बढ़ती उत्पादन लागत। बाजार में आने वाले ग्राहक सामान्य दिनों की तरह रसगुल्ले और अन्य मिठाइयों की मांग कर रहे हैं, लेकिन दुकानदारों के पास उनकी मांग के अनुरूप उत्पादन करने के लिए पर्याप्त कच्चा माल नहीं है।

कारोबारियों का कहना है कि पहाला की पहचान ही रसगुल्ले से जुड़ी है। ऐसे में यदि छेना की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो बाजार की प्रतिष्ठा और व्यापार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। दुकानदार चाहते हैं कि खाद्य सुरक्षा विभाग मिलावट के खिलाफ कार्रवाई जारी रखे, लेकिन साथ ही गुणवत्तापूर्ण छेना की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग और उत्पादक मिलकर रास्ता निकालें।

गुणवत्ता और आपूर्ति के बीच संतुलन जरूरी

खाद्य सुरक्षा के लिहाज से मिलावटी छेना के खिलाफ कार्रवाई महत्वपूर्ण है। उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ मिलना जरूरी है। लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि बाजार में मानकों के अनुरूप तैयार होने वाले छेना की आपूर्ति बाधित न हो।

पहाला के कारोबारियों के लिए आने वाले दिन महत्वपूर्ण हैं। यदि नियाली, अदासपुर और अन्य आपूर्ति क्षेत्रों से गुणवत्तापूर्ण छेना की नियमित सप्लाई फिर शुरू होती है तो बाजार में उत्पादन सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल करीब 100 दुकानों वाले इस प्रसिद्ध रसगुल्ला बाजार में रोजाना 40 क्विंटल से घटकर केवल 10 क्विंटल छेना पहुंचना कारोबार की गंभीर स्थिति को दर्शाता है।

ओडिशा की मिठाई पहचान में पहाला रसगुल्ले की खास जगह है। ऐसे में कारोबारियों और प्रशासन दोनों के सामने चुनौती यही है कि मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ शुद्ध छेना की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित हो, ताकि स्वाद और गुणवत्ता के लिए मशहूर पहाला का रसगुल्ला बाजार जल्द सामान्य स्थिति में लौट सके।

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