
ओडिशा। देशभर में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस उत्साह और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 48 स्कूली शिक्षकों को ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’ से सम्मानित किया। सम्मान पाने वाले शिक्षकों में ओडिशा के पदराज उमाकांत नायक भी शामिल रहे। राष्ट्रपति के हाथों प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने से उनके विद्यालय और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह में देश के अलग-अलग हिस्सों से चयनित शिक्षक पहुंचे थे। इन शिक्षकों को विद्यार्थियों की शिक्षा, नवाचार, बेहतर शिक्षण पद्धतियों और स्कूल स्तर पर उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी चयनित शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान कर उनके कार्यों की सराहना की।
Shri Padaraj Umakanta Nayak of Government High School Alipingal, Jagatsinghpur, Odisha, is an innovative and committed educator with over two decades of service, dedicated to transforming rural education through STEM, experiential learning, innovation and community participation.… pic.twitter.com/UVsuz8CUOG
— Ministry of Education (@EduMinOfIndia) September 5, 2026
पुरस्कार पाने वाले पदराज उमाकांत नायक ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले के अलीपिंगल स्थित ओडिशा गवर्नमेंट हाई स्कूल में शिक्षक हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और शनिवार को विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में उन्हें राष्ट्रपति के हाथों राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया गया।
राष्ट्रीय मंच पर मिला सम्मान
पदराज उमाकांत नायक के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार देश में शिक्षकों को दिए जाने वाले प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल है। इसके माध्यम से ऐसे शिक्षकों के योगदान को पहचान दी जाती है, जो कक्षा में पढ़ाई तक सीमित न रहते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में काम करते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से न केवल संबंधित शिक्षक बल्कि उनका विद्यालय और वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी भी गौरवान्वित होते हैं। नायक की उपलब्धि ने उनके स्कूल को भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
समारोह के दौरान देशभर से पहुंचे शिक्षकों की उपलब्धियों और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया गया। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य शिक्षकों की मेहनत को सम्मान देने के साथ दूसरे शिक्षकों को भी नई और प्रभावी शिक्षण पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करना है।
48 स्कूली शिक्षकों को मिला पुरस्कार
इस वर्ष कुल 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया। ये शिक्षक देश के विभिन्न क्षेत्रों और शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आते हैं। सभी ने अपने-अपने स्तर पर शिक्षा को बेहतर बनाने और विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रोत्साहित करने में योगदान दिया है।
शिक्षकों का चयन उनके शैक्षणिक योगदान और विद्यार्थियों के लिए किए गए कार्यों के आधार पर किया जाता है। स्कूल में शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाने, नए प्रयोग करने और बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने जैसे प्रयास भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बनाया। सम्मानित शिक्षकों के लिए राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करना उनके लंबे शैक्षणिक सफर का यादगार क्षण रहा।
शिक्षक दिवस पर खास आयोजन
भारत में हर वर्ष 5 सितंबर को देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। इस दिन स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षकों के योगदान को याद करते हुए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह भी शिक्षक दिवस के प्रमुख आयोजनों में से एक है। इसका उद्देश्य समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को सम्मान देना है। शिक्षक विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उनके व्यक्तित्व, सोच और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस वर्ष का समारोह उन शिक्षकों के लिए विशेष रहा, जिन्होंने अपने कार्यों के जरिए शिक्षा के क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। अलग-अलग परिस्थितियों में काम करते हुए इन शिक्षकों ने विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को अधिक उपयोगी और प्रभावी बनाने का प्रयास किया।
नायक की उपलब्धि से बढ़ा गौरव
पदराज उमाकांत नायक का राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयन उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि होने के साथ उनके विद्यालय के लिए भी गौरव का विषय है। अलीपिंगल स्थित ओडिशा गवर्नमेंट हाई स्कूल से जुड़े शिक्षक को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान मिलने से स्थानीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले दूसरे शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
एक शिक्षक के लिए विद्यार्थियों की सफलता सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होती है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उसके प्रयासों को मान्यता मिलना उसके काम के प्रभाव को व्यापक पहचान देता है। नायक को मिला यह पुरस्कार इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
शिक्षकों की भूमिका को मिला सम्मान
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के साथ शिक्षकों की जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ रही हैं। पारंपरिक शिक्षण के साथ डिजिटल माध्यम, नई तकनीक और विद्यार्थियों की बदलती जरूरतों के अनुरूप खुद को तैयार करना आज के शिक्षकों के लिए जरूरी हो गया है।
ऐसे में नवाचार और समर्पण के साथ काम करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना उनके मनोबल को बढ़ाने का काम करता है। इससे दूसरे शिक्षक भी शिक्षा में नए प्रयोग और विद्यार्थियों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने को प्रेरित होते हैं।
स्कूली शिक्षा किसी भी विद्यार्थी के भविष्य की बुनियाद तैयार करती है। इस स्तर पर शिक्षक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों को विकसित करने में भी शिक्षक महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
विज्ञान भवन में यादगार पल
शनिवार को विज्ञान भवन में आयोजित समारोह पदराज उमाकांत नायक सहित सभी 48 शिक्षकों के लिए यादगार बन गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान प्राप्त कर शिक्षकों के वर्षों के परिश्रम को राष्ट्रीय पहचान मिली।
पदराज उमाकांत नायक की उपलब्धि ने यह संदेश भी दिया कि स्कूल स्तर पर समर्पण के साथ किया गया कार्य राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकता है। उनके सम्मान से विद्यार्थियों और साथी शिक्षकों के बीच भी नई प्रेरणा पैदा होने की उम्मीद है।
शिक्षक दिवस पर आयोजित यह समारोह देश के उन शिक्षकों के प्रति सम्मान का प्रतीक बना, जो लगातार नई पीढ़ी के भविष्य को संवारने में जुटे हैं। 48 शिक्षकों को मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार उनकी उपलब्धियों का सम्मान होने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता और नवाचार को आगे बढ़ाने का संदेश भी देता है।





