ओडिशा

बीजू पटनायक की मूर्ति तोड़े जाने से भड़का आक्रोश

Kavita2
10 Sept 2026 5:44 PM IST
बीजू पटनायक की मूर्ति तोड़े जाने से भड़का आक्रोश
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ओडिशा : जगतसिंहपुर जिले में स्थित प्रसिद्ध सियाली समुद्र तट पर पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक की प्रतिमा को कथित रूप से अज्ञात उपद्रवियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना बुधवार देर रात की बताई जा रही है। गुरुवार सुबह समुद्र तट पर पहुंचे पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त अवस्था में देखा। इसकी जानकारी फैलते ही आसपास के इलाकों में नाराजगी बढ़ गई और लोगों ने घटना के जिम्मेदार व्यक्तियों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, प्रतिमा को रात के समय नुकसान पहुंचाया गया, जब समुद्र तट पर लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम रहती है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि घटना किस समय हुई और इसमें कितने लोग शामिल थे। प्रतिमा के क्षतिग्रस्त हिस्सों को देखने के बाद स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों और पुलिस को सूचना दी।

सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे तथा प्रतिमा की स्थिति का निरीक्षण किया। आसपास मौजूद लोगों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई गई। अधिकारियों द्वारा घटनास्थल और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जानकारी भी एकत्र किए जाने की संभावना है। यदि किसी होटल, दुकान, पार्किंग स्थल या सड़क के किनारे लगे कैमरे में संदिग्धों की गतिविधि दर्ज हुई होगी तो उससे उनकी पहचान करने में मदद मिल सकती है।

स्थानीय लोगों ने इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बीजू पटनायक केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि ओडिशा के गौरव और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा को नुकसान पहुंचाना राज्य की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है। लोगों ने प्रशासन से निष्पक्षता के साथ मामले की तह तक पहुंचने और दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की मांग की।

सियाली बीच क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह समुद्र तट धीरे-धीरे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। यहां प्रतिदिन स्थानीय पर्यटकों के साथ आसपास के जिलों से भी लोग आते हैं। ऐसे प्रमुख सार्वजनिक स्थान पर स्थापित प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों ने समुद्र तट पर रात्रिकालीन निगरानी बढ़ाने और प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की है।

घटना के पीछे का वास्तविक कारण अभी तक सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि प्रतिमा को जानबूझकर किसी राजनीतिक उद्देश्य से नुकसान पहुंचाया गया या इसके पीछे असामाजिक तत्वों की भूमिका है। पुलिस द्वारा सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों पर विश्वास न करें तथा ऐसी कोई जानकारी मिलने पर प्रशासन को उपलब्ध कराएं, जिससे संदिग्धों तक पहुंचा जा सके।

इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आने की भी संभावना है। बीजू पटनायक की विरासत राज्य की राजनीति और सामाजिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में उनकी प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ का मामला जल्द ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। स्थानीय लोगों ने राजनीतिक दलों से इस घटना पर बयानबाजी करने के बजाय दोषियों की पहचान और प्रतिमा की जल्द मरम्मत के लिए सहयोग करने की अपील की है।

बीजू पटनायक स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेता, विमान चालक और दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। उनकी साहसिक छवि और राष्ट्र निर्माण में योगदान के कारण उन्हें राज्य में व्यापक सम्मान प्राप्त है। राज्य के अनेक सार्वजनिक संस्थानों, हवाई अड्डों, खेल परिसरों और अन्य स्थानों का नाम उनके नाम पर रखा गया है। सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित उनकी प्रतिमाएं उनके जीवन, राजनीतिक योगदान और जनसेवा की स्मृति से जुड़ी हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त प्रतिमा को शीघ्र ठीक कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मूर्ति की मरम्मत विशेषज्ञों से कराई जानी चाहिए, ताकि उसका मूल स्वरूप सुरक्षित रह सके। इसके साथ ही प्रतिमा के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, पर्याप्त रोशनी लगाने और रात में नियमित गश्त की व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता भी बताई गई है।

लोगों ने सवाल उठाया कि यदि पर्यटन स्थल पर पर्याप्त निगरानी होती तो उपद्रवी इतनी आसानी से प्रतिमा को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। समुद्र तटों पर अक्सर शाम और रात के समय असामाजिक तत्वों के जमा होने की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसे में पर्यटन स्थलों की सुरक्षा केवल पर्यटकों के लिए ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद सार्वजनिक संपत्तियों और स्मारकों के संरक्षण के लिए भी जरूरी है।

स्थानीय प्रशासन के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है। पहली जिम्मेदारी घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाना है, जबकि दूसरी प्रतिमा की मरम्मत और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था करना है। सार्वजनिक संपत्ति और महापुरुषों की प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाएं कानून-व्यवस्था के साथ सामाजिक सद्भाव को भी प्रभावित कर सकती हैं।

इस घटना की जानकारी गुरुवार को सामने आने के बाद सियाली बीच पर लोगों की भीड़ बढ़ गई। कई लोगों ने क्षतिग्रस्त प्रतिमा की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए। इसके बाद मामला व्यापक चर्चा में आ गया। घटना की पुष्टि करते हुए प्रकाशित रिपोर्ट में भी बुधवार रात प्रतिमा को नुकसान पहुंचाने और गुरुवार सुबह स्थानीय लोगों द्वारा उसे क्षतिग्रस्त अवस्था में देखे जाने की जानकारी दी गई है।

प्रशासन से यह भी अपेक्षा की जा रही है कि घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच की प्रगति की जानकारी सार्वजनिक की जाए। पारदर्शी तरीके से तथ्य सामने आने पर अटकलों और अफवाहों को रोकने में मदद मिलेगी। राजनीतिक या सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिशों पर भी नजर रखने की आवश्यकता बताई गई है।

फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन ने घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है और न ही किसी संदिग्ध की पहचान सार्वजनिक की गई है। घटना के पीछे व्यक्तिगत शरारत, राजनीतिक दुर्भावना या किसी अन्य कारण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वास्तविक कारण और शामिल व्यक्तियों का पता उपलब्ध साक्ष्यों तथा आसपास के लोगों से पूछताछ के बाद ही चल सकेगा।

स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द परिणाम सामने लाएगा। लोगों का कहना है कि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई से भविष्य में सार्वजनिक स्मारकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वालों को स्पष्ट संदेश मिलेगा। सियाली बीच की सुरक्षा बढ़ाने और प्रतिमा को फिर से सम्मानजनक स्वरूप में स्थापित करने की मांग लगातार तेज हो रही है।

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