
भुवनेश्वर: शादी-शुदा ज़िंदगी के झगड़ों में निजी रंजिश निकालने के लिए 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिकाओं के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए, ओडिशा हाई कोर्ट ने एक पति की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने अपनी पत्नी के अपहरण का आरोप लगाया था। साथ ही, कोर्ट ने उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस एमएस रमन की डिवीजन बेंच ने पाया कि यह याचिका गैर-कानूनी तरीके से बंधक बनाने का असली मामला नहीं थी, बल्कि पत्नी पर ससुराल लौटने का दबाव बनाने की एक साफ़ कोशिश थी।
बेंच ने कहा, "पत्नी बालिग है और अपनी ज़िंदगी के फ़ैसले खुद लेने में सक्षम है; उसे पति के हाथों की कठपुतली नहीं माना जा सकता।"
कोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ता ने खुद 12 मई को बालासोर के अनंतपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR की कॉपी साथ लगाई थी। FIR के मुताबिक, पति उस व्यक्ति के घर गया था जिस पर उसने बाद में अपनी पत्नी के अपहरण का आरोप लगाया, और उसने पत्नी से घर लौटने को कहा। लेकिन महिला ने मना कर दिया।





