
कटक: उड़ीसा उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत कई लाभार्थियों को अपात्र घोषित करने वाली दूसरी जाँच रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने इस प्रक्रिया को "प्रासंगिक दिशानिर्देशों के विपरीत" और "कानून की नज़र में टिकने योग्य नहीं" करार दिया है।
न्यायमूर्ति शशिकांत मिश्रा की एकल पीठ ने शुक्रवार को भद्रक ज़िले के गोपीनाथपुर ग्राम पंचायत के 10 निवासियों द्वारा दायर याचिकाओं पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया, जिसमें पीएमएवाई-जी के लाभों को रोकने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी।
शुरुआत में, ब्लॉक-स्तरीय जाँच में 30 जनवरी, 2023 को ग्राम सभा द्वारा उनके नामों को मंजूरी दिए जाने के बाद, याचिकाकर्ताओं सहित 258 पात्र लाभार्थी पाए गए थे।
19 जून, 2023 को कार्य आदेश जारी किए गए और कुछ याचिकाकर्ताओं को 40,000 रुपये की पहली किस्त मिली। हालाँकि, 27 जून, 2023 को मालतिलता साहू नामक एक व्यक्ति द्वारा अपात्र लाभार्थियों को शामिल करने का आरोप लगाने वाली शिकायत के बाद अधिकारियों द्वारा दूसरी जाँच किए जाने के बाद, उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया और जारी की गई धनराशि वापस करने का आदेश जारी किया गया।





