ओडिशा

SIR के खिलाफ दिल्ली में विपक्षी मार्च, BJD सांसद भी चुनाव आयोग तक पहुंचे

Kavita2
6 Oct 2026 10:59 AM IST
SIR के खिलाफ दिल्ली में विपक्षी मार्च, BJD सांसद भी चुनाव आयोग तक पहुंचे
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नई दिल्ली/भुवनेश्वर। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर देशभर में तेज होती राजनीतिक बहस के बीच बीजू जनता दल (BJD) भी मंगलवार को नई दिल्ली में विपक्षी दलों के विरोध मार्च में शामिल हुआ। पार्टी अध्यक्ष नवीन पटनायक के निर्देश पर BJD सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर निकाले गए मार्च में हिस्सा लिया। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

BJD का इस प्रदर्शन में शामिल होना इसलिए अहम है क्योंकि पार्टी ने हाल के दिनों में SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां खुलकर सामने रखी हैं। राज्यसभा में BJD संसदीय दल के नेता मानस मंगराज ने कहा कि नवीन पटनायक पहले ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची संशोधन के दौरान लिए गए कुछ फैसलों से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

ओडिशा में SIR की प्रक्रिया के बाद प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची में करीब 20.14 लाख नाम हटाने के लिए चिन्हित किए गए थे। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इनमें करीब 8.32 लाख ऐसे मतदाता थे जिन्हें मृत बताया गया, 10.07 लाख स्थानांतरित या अनुपस्थित पाए गए और करीब 1.58 लाख नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज होने की श्रेणी में आए। SIR से पहले राज्य में करीब 3.33 करोड़ मतदाता थे, जबकि मसौदा सूची में यह संख्या घटकर लगभग 3.13 करोड़ रह गई थी।

BJD ने इसी आंकड़े को लेकर चिंता जताई है। पार्टी का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से बाहर होना गंभीर मामला है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी पात्र मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो। हालांकि चुनाव आयोग का पक्ष रहा है कि SIR का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अन्य अपात्र प्रविष्टियों को पहचानकर मतदाता सूची को अद्यतन करना है। चुनाव आयोग ने बाद में ऐसे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान भी शुरू किया जिन्हें गलती से सूची से बाहर कर दिया गया हो।

राष्ट्रीय स्तर पर भी मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक अलग-अलग राज्यों में SIR के बाद मसौदा मतदाता सूचियों में करीब 13 करोड़ नाम कम दिखाई दिए थे। विपक्षी दल इसे बड़े पैमाने पर मतदाता बहिष्करण का मामला बता रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हैं। आयोग का कहना है कि मसौदा सूची अंतिम सूची नहीं होती और दावे-आपत्तियों के बाद पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं।

इसी विवाद के बीच मंगलवार को INDIA गठबंधन समेत विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। दिल्ली में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए और मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। विपक्षी दलों की मांग है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पद छोड़ें और SIR से जुड़े फैसलों की पारदर्शी जांच हो।

BJD सांसदों की इस मार्च में मौजूदगी ने ओडिशा की राजनीति में भी नई चर्चा शुरू कर दी है। BJD लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष से समान दूरी बनाए रखने की रणनीति अपनाता रहा है। लेकिन SIR के सवाल पर पार्टी ने विपक्ष के साथ सड़क पर उतरने का फैसला किया है। इसे किसी औपचारिक राष्ट्रीय राजनीतिक गठबंधन का संकेत मानना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि BJD की ओर से इस संबंध में कोई ऐसी घोषणा नहीं की गई है।

मानस मंगराज ने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र का आधार है और इसमें किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटना चाहिए। BJD का कहना है कि अगर SIR में कोई त्रुटि हुई है तो उसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए। पार्टी की मांग है कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए और प्रभावित लोगों को अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए पर्याप्त समय और सुविधा मिले।

चुनाव आयोग ने मई 2026 में SIR के तीसरे चरण की घोषणा की थी। इस चरण में ओडिशा समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया। आयोग के अनुसार ओडिशा में करीब 3.34 करोड़ मतदाताओं की सूची की समीक्षा के लिए 38 हजार से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों की तैनाती की गई थी। घर-घर जाकर सत्यापन की प्रक्रिया के बाद मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित की गई।

ओडिशा में विपक्ष ने शुरू से ही मसौदा सूची में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए थे। BJD और कांग्रेस दोनों ने मांग की थी कि छोटी-मोटी विसंगतियों या दस्तावेजों की कमी के कारण वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित न किया जाए। चुनाव आयोग की ओर से दावा और आपत्ति प्रक्रिया के जरिए नाम जोड़ने का अवसर उपलब्ध कराया गया है।

SIR से जुड़ा विवाद अब अदालत तक भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों से कुछ आरोपों पर जवाब मांगा है। हालांकि अदालत ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल हटाने की अंतरिम मांग स्वीकार नहीं की है। मामला आगे सुनवाई के लिए लंबित है।

इस बीच दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं। विपक्षी दलों और अन्य समूहों का आरोप है कि मतदाता सूची की समीक्षा में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखने तथा गलत तरीके से छूटे नामों को जोड़ने के लिए सुधारात्मक प्रक्रिया उपलब्ध है।

BJD की सबसे बड़ी चिंता ओडिशा के 20 लाख से अधिक मतदाताओं के मसौदा सूची से बाहर होने को लेकर है। पार्टी का कहना है कि हर मामले की सावधानीपूर्वक जांच होनी चाहिए और किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम सिर्फ तकनीकी या प्रशासनिक कारण से नहीं हटना चाहिए।

फिलहाल BJD ने SIR और मतदाता सूची के मुद्दे पर अपना विरोध स्पष्ट कर दिया है। नवीन पटनायक के निर्देश पर पार्टी सांसदों का दिल्ली में विपक्षी मार्च में शामिल होना इस बात का संकेत है कि पार्टी इस मुद्दे को केवल ओडिशा तक सीमित नहीं रखना चाहती। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, चुनाव आयोग की आगे की कार्रवाई और मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया पर राजनीतिक नजर बनी रहेगी।

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