
भुवनेश्वर: सरकारी ऊर्जा कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) को ओडिशा के तट के पास महानदी ऑफशोर बेसिन में प्राकृतिक गैस की खोज हुई है। कंपनी ने सोमवार को इसकी जानकारी देते हुए बताया कि कोणार्क से लगभग 43 किलोमीटर दूर गहरे समुद्र में खोदे गए एक कुएं में गैस की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह खोज ONGC के महत्वाकांक्षी 'समुद्र मंथन' डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन कैंपेन के तहत की गई है।
कंपनी के मुताबिक महानदी बेसिन में इस अभियान के तहत खोदा गया यह पहला कुआं है। शुरुआती नतीजों में गैस का प्रवाह और रिजर्वॉयर प्रेशर उत्साहजनक बताया गया है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि इस गैस भंडार से व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन करना आर्थिक रूप से फायदेमंद होगा या नहीं।
18 सितंबर को मिली गैस
ONGC के अनुसार प्राकृतिक गैस की यह खोज 18 सितंबर को MN-DW18-1-H-D नाम के कुएं में हुई। यह कुआं ओडिशा के तट से दूर महानदी ऑफशोर बेसिन में स्थित है।
कंपनी लंबे समय से भारत के समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडार तलाशने के लिए अभियान चला रही है। इसी रणनीति के तहत गहरे समुद्री क्षेत्रों में खोज का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
महानदी बेसिन में मिली इस गैस को इसी दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआती उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
कोणार्क से करीब 43 किलोमीटर दूर कुआं
जिस स्थान पर प्राकृतिक गैस मिली है, वह ओडिशा के प्रसिद्ध कोणार्क क्षेत्र से लगभग 43 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है।
गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज जमीन पर होने वाली ड्रिलिंग की तुलना में तकनीकी रूप से अधिक चुनौतीपूर्ण होती है। इसके लिए विशेष ड्रिलशिप, अत्याधुनिक उपकरण और विशेषज्ञों की जरूरत होती है।
ONGC ने इस कुएं की खुदाई के लिए 'प्लेटिनम एक्सप्लोरर' ड्रिलशिप का इस्तेमाल किया।
25 जुलाई को शुरू हुई थी ड्रिलिंग
कंपनी के मुताबिक MN-DW18-1-H-D कुएं की ड्रिलिंग 25 जुलाई को शुरू की गई थी। लगातार ड्रिलिंग के बाद इसे 1,623 मीटर की निर्धारित लक्ष्य गहराई तक पहुंचाया गया।
खुदाई के दौरान अलग-अलग गहराइयों पर मौजूद भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन किया गया। इसी दौरान 1,441 मीटर से 1,452 मीटर की गहराई के बीच प्राकृतिक गैस की मौजूदगी का पता चला।
इसका मतलब है कि करीब 11 मीटर के अंतराल में गैस वाली संरचना दर्ज की गई है। हालांकि इस क्षेत्र में कुल गैस संसाधन कितना है, यह विस्तृत परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
तीन दिनों से निकल रही गैस
ONGC ने बताया कि खोज के बाद कुएं से पिछले तीन दिनों से गैस का प्रवाह जारी है। कंपनी के मुताबिक शुरुआती परीक्षण में गैस का फ्लो और रिजर्वॉयर प्रेशर उत्साहजनक पाया गया है।
किसी नए गैस भंडार की खोज के बाद उसके प्रवाह और दबाव का अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण होता है। इससे विशेषज्ञों को यह समझने में मदद मिलती है कि रिजर्वॉयर में मौजूद गैस किस दर से बाहर आ सकती है और लंबे समय तक उत्पादन की क्या संभावना हो सकती है।
शुरुआती संकेत सकारात्मक होने के बावजूद अभी कई तकनीकी परीक्षण बाकी हैं।
व्यावसायिक उत्पादन पर फैसला बाकी
ONGC ने साफ किया है कि गैस की खोज होने का मतलब यह नहीं है कि यहां तत्काल व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।
कंपनी को सबसे पहले यह पता लगाना होगा कि खोज का आकार कितना बड़ा है और कुल कितनी प्राकृतिक गैस निकाली जा सकती है। इसके बाद उत्पादन की लागत और गैस को तट तक पहुंचाने के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का आकलन किया जाएगा।
इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही यह तय किया जा सकेगा कि इस क्षेत्र में व्यावसायिक उत्पादन आर्थिक रूप से लाभदायक है या नहीं।
आगे होंगे और परीक्षण
ONGC अब इस खोज का विस्तृत मूल्यांकन करेगी। इसके तहत रिजर्वॉयर के आकार, गैस की मात्रा, दबाव और निकाले जा सकने वाले संसाधनों का आकलन किया जाएगा।
कंपनी को यह भी देखना होगा कि आसपास इसी भूगर्भीय संरचना में गैस के और भंडार मौजूद हैं या नहीं। इसके लिए अतिरिक्त खोज और मूल्यांकन कुओं की आवश्यकता पड़ सकती है।
यदि आगे के परीक्षणों में पर्याप्त मात्रा में गैस मिलने की पुष्टि होती है तो इसके बाद क्षेत्र को विकसित करने की योजना बनाई जा सकती है।
समुद्र मंथन अभियान के लिए अहम खोज
यह खोज ONGC के 'समुद्र मंथन' डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन कैंपेन के लिए भी महत्वपूर्ण है। कंपनी के अनुसार इस अभियान के तहत महानदी बेसिन में ड्रिल किया गया यह पहला कुआं है।
पहले ही कुएं में प्राकृतिक गैस मिलने से इस क्षेत्र में आगे की खोज के लिए महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक जानकारी मिल सकती है।
डीपवॉटर क्षेत्रों में ड्रिलिंग काफी खर्चीली होती है। इसलिए शुरुआती खोज के बाद प्रत्येक तकनीकी और आर्थिक पहलू का सावधानी से मूल्यांकन किया जाता है।
भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में देश के भीतर नए तेल और गैस भंडार की खोज घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यदि महानदी ऑफशोर बेसिन में मिली गैस का भंडार व्यावसायिक उत्पादन के योग्य पाया जाता है तो भविष्य में यह घरेलू प्राकृतिक गैस आपूर्ति में योगदान दे सकता है।
हालांकि इसके लिए खोज से उत्पादन तक पहुंचने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है और इसमें कई तकनीकी, पर्यावरणीय तथा आर्थिक मूल्यांकन शामिल होंगे।
महानदी बेसिन पर बढ़ी उम्मीद
ओडिशा के तट से लगे महानदी बेसिन को हाइड्रोकार्बन खोज के लिहाज से संभावनाओं वाला क्षेत्र माना जाता रहा है। नई खोज के बाद इस बेसिन में गहरे समुद्री क्षेत्रों की संभावनाओं पर ध्यान बढ़ सकता है।
ONGC आगे मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर तय करेगी कि किन क्षेत्रों में अतिरिक्त खोज की जानी चाहिए।
फिलहाल MN-DW18-1-H-D कुएं से मिल रहे गैस प्रवाह और रिजर्वॉयर प्रेशर को कंपनी ने उत्साहजनक बताया है।
विस्तृत मूल्यांकन के बाद साफ होगी तस्वीर
इस खोज की वास्तविक अहमियत आगे होने वाले परीक्षणों के बाद सामने आएगी। कंपनी को गैस के भंडार की मात्रा, उसकी गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और विकास पर आने वाली लागत का आकलन करना होगा।
यदि सभी तकनीकी और आर्थिक मानक अनुकूल पाए जाते हैं तो महानदी ऑफशोर बेसिन में गैस उत्पादन की दिशा में आगे कदम बढ़ाया जा सकता है।
फिलहाल ONGC के लिए यह एक महत्वपूर्ण खोज है, लेकिन व्यावसायिक सफलता का अंतिम फैसला विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही होगा।





