ओडिशा

पुरी रथ यात्रा हादसे पर OHRC सख्त, गृह विभाग और कलेक्टर से मांगा जवाब

Kavita2
18 July 2026 2:37 PM IST
पुरी रथ यात्रा हादसे पर OHRC सख्त, गृह विभाग और कलेक्टर से मांगा जवाब
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भुवनेश्वर : ओडिशा मानवाधिकार आयोग (ओएचआरसी) ने पुरी की विश्व प्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान हुई भगदड़ जैसी घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है। इस घटना में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी, जबकि लगभग 100 अन्य श्रद्धालु घायल हुए थे। आयोग ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव और पुरी के जिला कलेक्टर को नोटिस जारी किया है तथा घटना से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।

यह कार्रवाई अधिवक्ता निशिकांत मिश्रा द्वारा दायर याचिका के आधार पर की गई। याचिका में रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इसे मानवाधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना और स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि धार्मिक आयोजनों में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, चिकित्सा सुविधाएं और आपातकालीन प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। यदि इन व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही होती है, तो उसका सीधा असर लोगों के जीवन और सुरक्षा पर पड़ता है।

आयोग ने गृह विभाग के प्रधान सचिव और पुरी के जिला कलेक्टर से पूछा है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई, प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण के लिए क्या व्यवस्था की थी और हादसे के बाद राहत एवं बचाव कार्य किस प्रकार संचालित किए गए। इसके अलावा आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सरकार ने कौन-कौन से कदम उठाए हैं।

पुरी की रथ यात्रा देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथों के दर्शन और यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन बड़ी चुनौती रहती है।

बताया जाता है कि रथ यात्रा के दौरान अचानक भीड़ का दबाव बढ़ने से भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। इस दौरान दो श्रद्धालुओं की जान चली गई, जबकि करीब 100 लोग घायल हो गए। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। घटना के बाद प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों को तैनात किया।

हादसे के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इतने बड़े आयोजन के लिए पहले से अधिक प्रभावी भीड़ प्रबंधन योजना तैयार की जानी चाहिए थी, ताकि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी, ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी नेटवर्क, पर्याप्त बैरिकेडिंग और प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की तैनाती बेहद आवश्यक है। इसके अलावा श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए अलग-अलग मार्ग, मेडिकल सहायता केंद्र और आपातकालीन निकासी योजना भी प्रभावी ढंग से लागू की जानी चाहिए।

ओडिशा मानवाधिकार आयोग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

अब गृह विभाग और पुरी जिला प्रशासन को आयोग के समक्ष विस्तृत जवाब प्रस्तुत करना होगा। इस रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे की सुनवाई करेगा और यदि आवश्यक हुआ तो अतिरिक्त निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं।

धार्मिक आयोजनों में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह मामला भविष्य की व्यवस्थाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आयोग की पहल से उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में धार्मिक आयोजनों में भाग ले सकें।

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