भुवनेश्वर। ओडिशा की समृद्ध पारंपरिक लोक कला ‘पाला’ के प्रसिद्ध कलाकार और ‘पाला सम्राट’ के नाम से सम्मानित पंडित जगन्नाथ बेहरा का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। उन्होंने 101 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन से ओडिशा के कला और सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। लोक कलाकारों, साहित्यकारों और कला प्रेमियों ने उनके निधन को राज्य की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी क्षति बताया है।
पंडित जगन्नाथ बेहरा जगतसिंहपुर जिले के एरासामा ब्लॉक के कटिजंगा गांव के रहने वाले थे। वे पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे और बीमारी के कारण लंबे समय से बिस्तर पर थे। उम्र अधिक होने के कारण उनकी शारीरिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही थी। आखिरकार लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया।
जगन्नाथ बेहरा ने अपना पूरा जीवन ओडिशा की पारंपरिक लोक कला ‘पाला’ को समर्पित कर दिया। अपनी विशिष्ट शैली, प्रभावशाली प्रस्तुति और गहरी विद्वता के कारण उन्होंने पाला कला को नई पहचान दिलाई। उनकी कला और योगदान के सम्मान में उन्हें ‘पाला सम्राट’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था।
ओडिशा की पाला कला एक पारंपरिक लोक प्रस्तुति है, जिसमें संगीत, कथा वाचन, धार्मिक और सामाजिक विषयों का समावेश होता है। इसमें कलाकार अपनी गायन शैली, संवाद और शास्त्रीय ज्ञान के माध्यम से दर्शकों को आकर्षित करते हैं। पंडित जगन्नाथ बेहरा इस कला के उन कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने इसे पीढ़ियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनकी प्रस्तुति में आध्यात्मिकता, साहित्य और लोक संस्कृति का अनूठा मेल देखने को मिलता था। वे धार्मिक कथाओं, पौराणिक प्रसंगों और सामाजिक संदेशों को अपनी विशेष शैली में प्रस्तुत करते थे। उनकी आवाज, संवाद अदायगी और ज्ञान ने उन्हें पाला कला जगत में अलग पहचान दिलाई।
कई दशकों तक पंडित बेहरा ने ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में पाला कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों का मनोरंजन और ज्ञानवर्धन किया। उन्होंने न केवल मंचों पर प्रस्तुति दी, बल्कि कई युवा कलाकारों को इस पारंपरिक कला से जोड़ने और प्रशिक्षित करने का काम भी किया।
कला जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि पंडित जगन्नाथ बेहरा का योगदान केवल एक कलाकार तक सीमित नहीं था। उन्होंने ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कला के माध्यम से नई पीढ़ी को राज्य की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित होने का अवसर मिला।
उनके निधन की खबर सामने आने के बाद कलाकारों और स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लोगों ने कहा कि पंडित बेहरा के जाने से पाला कला के क्षेत्र में एक युग का अंत हो गया है। उनकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।
कटिजंगा गांव में भी उनके निधन के बाद शोक का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार, पंडित जगन्नाथ बेहरा न केवल एक महान कलाकार थे, बल्कि एक सरल और सम्मानित व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति भी थे। गांव के लोगों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा कला और समाज सेवा को समर्पित किया।
पंडित बेहरा को ओडिशा की लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक माना जाता था। उन्होंने ऐसे समय में पाला कला को आगे बढ़ाया, जब आधुनिक मनोरंजन के साधनों के बढ़ते प्रभाव के कारण पारंपरिक कलाओं के सामने चुनौतियां बढ़ रही थीं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी कला के माध्यम से लोगों को जोड़कर रखा।
उनके निधन पर कला और संस्कृति से जुड़े लोगों ने सरकार से आग्रह किया है कि राज्य की पारंपरिक कलाओं और उनके कलाकारों के संरक्षण के लिए और अधिक प्रयास किए जाएं। उनका मानना है कि पंडित जगन्नाथ बेहरा जैसे कलाकारों की विरासत को आगे बढ़ाना आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है।
स्थानीय लोगों और कलाकारों ने कहा कि पंडित बेहरा की कला, उनकी शिक्षाएं और उनके द्वारा छोड़ी गई सांस्कृतिक विरासत हमेशा याद की जाएगी। उन्होंने अपने जीवनकाल में पाला कला को जो सम्मान दिलाया, वह ओडिशा की लोक संस्कृति के इतिहास में हमेशा दर्ज रहेगा।
101 वर्ष की उम्र में उनके निधन के साथ ओडिशा ने अपने एक महान लोक कलाकार को खो दिया है। हालांकि, उनकी कला और योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे। ‘पाला सम्राट’ पंडित जगन्नाथ बेहरा की विरासत ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी।





