
Odisha ओडिशा: ओडिशा विजिलेंस विभाग ने मलकानगिरी जिले में कोरापुट सेंट्रल को-ऑपरेटिव (KCC) बैंक की शाखा से जुड़े कथित ₹1.08 करोड़ से अधिक के गबन मामले में आज दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुश्री निबेदिता तराई और उनके लिव-इन पार्टनर नृसिंह प्रसाद खमारी के रूप में हुई है। दोनों पर बैंक फंड के दुरुपयोग और उसे इधर-उधर ट्रांसफर करने की साजिश में शामिल होने का आरोप है।
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, ये दोनों पहले से गिरफ्तार बैंक ब्रांच मैनेजर सुधांशु खोरा के करीबी थे। खोरा को 5 मई को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल पुलिस हिरासत में पूछताछ के लिए रखे गए हैं।
जांच में सामने आया है कि मनी ट्रेल के अनुसार खोरा ने कथित तौर पर गलत तरीके से निकाले गए धन में से लगभग ₹63 लाख तराई और खमारी के खातों में ट्रांसफर किए थे। इसका उद्देश्य पैसे को अलग-अलग खातों में घुमाकर उसकी पहचान छिपाना बताया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि बैंक मैनेजर सुधांशु खोरा की पहचान निबेदिता तराई से फेसबुक के माध्यम से हुई थी, जिन्हें कुछ जगहों पर सुश्री सुलग्ना के नाम से भी जाना जाता है। इसके बाद दोनों ने कथित रूप से बैंक से धन निकालने की योजना बनाई।
जांचकर्ताओं का कहना है कि नृसिंह प्रसाद खमारी, जो लंबे समय से तराई के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है, इस पूरे वित्तीय हेरफेर में अहम भूमिका निभा सकता है। दोनों पर मिलकर एक संगठित तरीके से बैंकिंग फंड का दुरुपयोग करने का संदेह जताया गया है।
विजिलेंस विभाग को शक है कि यह मामला केवल एक बैंक तक सीमित नहीं है। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि दोनों आरोपी ओडिशा के अलावा अन्य राज्यों में भी कई वित्तीय धोखाधड़ी मामलों में शामिल हो सकते हैं। खमारी के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस कमिश्नरेट में 14 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला पहले से दर्ज है।
इसके अलावा जांच एजेंसियों को जगतसिंहपुर में 30 लाख रुपये की एक और कथित धोखाधड़ी के सुराग मिले हैं। बारीपदा, पारादीप और भुवनेश्वर में भी ऐसे ही मामलों की जांच की जा रही है, जिससे इस नेटवर्क के व्यापक होने की आशंका जताई जा रही है।
चल रही जांच के तहत विजिलेंस टीमें दोनों आरोपियों से जुड़े लगभग 25 बैंक खातों की जांच कर रही हैं। इसके साथ ही वित्तीय विशेषज्ञों और बैंकिंग विश्लेषकों की मदद से 12 स्टॉक ट्रेडिंग अकाउंट की भी जांच शुरू की गई है, ताकि पैसे के पूरे फ्लो और संभावित हेरफेर का पता लगाया जा सके।
अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला हो सकता है, जिसकी जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं। फिलहाल जांच जारी है और आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।





