
भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में ओडिशा ट्रैवल बाजार 2026 के सातवें संस्करण का आयोजन तीन से पांच अक्टूबर तक भुवनेश्वर के मेफेयर सैंक्चुअरी में किया जाएगा। उप-मुख्यमंत्री प्रवति परिदा ने गुरुवार को इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का फोकस पर्यटन क्षेत्र में कारोबारी अवसर बढ़ाने, स्थानीय समुदायों को सशक्त करने और ओडिशा की सांस्कृतिक तथा प्राकृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने पर है।
ओडिशा ट्रैवल बाजार को राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण बिजनेस-टू-बिजनेस प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य राज्य के पर्यटन व्यवसायों को देश और विदेश के खरीदारों, टूर ऑपरेटरों और ट्रैवल कंपनियों से सीधे जोड़ना है।
उप-मुख्यमंत्री प्रवति परिदा ने मेफेयर लैगून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि ओडिशा के पास धार्मिक, प्राकृतिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य अब इन्हें बड़े पैमाने पर देश और दुनिया के सामने पेश करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
तीन दिवसीय इस आयोजन में 200 से अधिक खरीदार शामिल होंगे। इसके अलावा 100 से ज्यादा पर्यटन व्यवसाय और 27 देशों के विदेशी टूर ऑपरेटर भी कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इससे राज्य के स्थानीय पर्यटन व्यवसायों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा।
ओडिशा पर्यटन विभाग और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी FICCI की साझेदारी में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों, होटल संचालकों, रिसॉर्ट मालिकों, ट्रैवल एजेंसियों और टूर ऑपरेटरों के बीच सीधे संवाद की व्यवस्था की जाएगी।
आयोजन में 6,000 से अधिक पूर्व निर्धारित बी2बी बैठकों की योजना बनाई गई है। इन बैठकों के माध्यम से राज्य के पर्यटन व्यवसायों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ सीधे चर्चा करने का अवसर मिलेगा।
इन बैठकों में पर्यटन पैकेज, होटल बुकिंग, विरासत पर्यटन, इको टूरिज्म, धार्मिक पर्यटन, समुद्री पर्यटन और अन्य क्षेत्रों में कारोबारी संभावनाओं पर चर्चा होने की उम्मीद है।
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा में पर्यटन की संभावनाएं केवल पुरी और कोणार्क तक सीमित नहीं हैं। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे स्थान हैं, जिन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान दिलाई जा सकती है।
ओडिशा अपने मंदिरों, समुद्री तटों, वन्यजीव अभयारण्यों, झीलों, पर्वतीय क्षेत्रों, आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक कला के लिए जाना जाता है। राज्य सरकार इन सभी पर्यटन उत्पादों को एक संयुक्त ब्रांड के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही है।
परिदा ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र रोजगार सृजन का भी एक बड़ा माध्यम है। यदि किसी क्षेत्र में पर्यटन बढ़ता है तो वहां होटल, परिवहन, स्थानीय बाजार, हस्तशिल्प, खानपान और गाइड सेवाओं से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलता है।
इसी वजह से राज्य सरकार पर्यटन विकास को केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी इससे जोड़ना चाहती है।
सरकार का प्रयास है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में भी पर्यटन आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिले। स्थानीय हस्तशिल्प, लोककला और खानपान को भी पर्यटन से जोड़कर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
ओडिशा ट्रैवल बाजार में विदेशी टूर ऑपरेटरों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 27 देशों से आने वाले प्रतिनिधि राज्य के अलग-अलग पर्यटन स्थलों और सेवाओं के बारे में जानकारी लेंगे।
इससे ओडिशा को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अधिक मजबूती से स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के दौरान पर्यटन कारोबारियों को अपने उत्पाद और सेवाएं सीधे खरीदारों के सामने रखने का मौका मिलेगा। इससे भविष्य में नए टूर पैकेज और कारोबारी समझौते बनने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजन के माध्यम से निवेश आकर्षित करना भी है। पर्यटन क्षेत्र में होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस सेंटर और अन्य सुविधाओं के विकास के लिए निजी निवेश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ओडिशा ट्रैवल बाजार को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि यहां सामान्य प्रदर्शनी से ज्यादा कारोबारी बैठकों पर जोर रहेगा।
पूर्व निर्धारित बी2बी मीटिंग्स के कारण खरीदार और विक्रेता अपनी जरूरतों के अनुसार पहले से बैठक तय कर सकेंगे। इससे कम समय में अधिक व्यावसायिक संपर्क स्थापित किए जा सकेंगे।
कार्यक्रम में घरेलू खरीदारों की भागीदारी भी बड़ी संख्या में होगी। देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले टूर ऑपरेटरों को ओडिशा के नए पर्यटन स्थलों और पैकेजों की जानकारी दी जाएगी।
इससे राज्य के भीतर कम चर्चित पर्यटन स्थलों को भी नए पर्यटक मिल सकते हैं।
उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत राज्य की सबसे बड़ी ताकत है। इन संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता है।
राज्य सरकार टिकाऊ पर्यटन पर भी जोर दे रही है, ताकि पर्यटन विकास से पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर नकारात्मक असर न पड़े।
ओडिशा के धार्मिक पर्यटन में श्री जगन्नाथ मंदिर, कोणार्क और अन्य प्रमुख मंदिरों की बड़ी भूमिका है। वहीं चिलिका झील, समुद्री तट और वन्यजीव क्षेत्र प्रकृति पर्यटन के प्रमुख आकर्षण हैं।
इसके अलावा राज्य की आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक त्योहार और हस्तशिल्प भी विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं।
ओडिशा ट्रैवल बाजार के जरिए इन सभी पहलुओं को एक मंच पर पेश किया जाएगा।
पर्यटन विभाग का मानना है कि बेहतर मार्केटिंग और अंतरराष्ट्रीय संपर्क से राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।
कार्यक्रम में शामिल होने वाले पर्यटन व्यवसाय अपने होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल सेवाएं और टूर पैकेज खरीदारों के सामने प्रस्तुत करेंगे।
इससे छोटे और मध्यम स्तर के पर्यटन व्यवसायों को भी बड़ा बाजार मिल सकता है।
तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में कारोबारी बैठकों के साथ ओडिशा की पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने पर विशेष जोर रहेगा।
विदेशी टूर ऑपरेटरों को राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों और अनुभव आधारित पर्यटन के बारे में जानकारी दी जाएगी।
उप-मुख्यमंत्री प्रवति परिदा ने कहा कि राज्य सरकार ओडिशा को भारत के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में बढ़ते निवेश और कारोबार से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के अवसर भी बढ़ेंगे।
तीन से पांच अक्टूबर तक होने वाला ओडिशा ट्रैवल बाजार 2026 इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम के दौरान होने वाली 6,000 से अधिक बी2बी बैठकों से राज्य के पर्यटन कारोबारियों को बड़े स्तर पर नेटवर्किंग का मौका मिलेगा।
अब राज्य सरकार की नजर इस आयोजन से बनने वाले कारोबारी संपर्कों और संभावित समझौतों पर रहेगी।
ओडिशा ट्रैवल बाजार का यह सातवां संस्करण राज्य की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का बड़ा मंच बनने जा रहा है।





