
भुवनेश्वर: ओडिशा विधानसभा की स्पीकर सुरमा पाधी ने सोमवार को 11 विधायकों (BJD के आठ और कांग्रेस के तीन) के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन विधायकों पर 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग करने का आरोप था।
स्पीकर ने हर विधायक के लिए अलग-अलग आदेश जारी करते हुए कहा कि याचिकाओं में सही वेरिफिकेशन और सपोर्टिंग सबूतों की कमी थी। उन्होंने इन याचिकाओं को खारिज करने के लिए 'ओडिशा विधानसभा सदस्य (दल-बदल के आधार पर अयोग्यता) नियम' के नियम 6, खासकर उप-नियम (6) और (7) का हवाला दिया।
विपक्षी विधायकों पर आरोप था कि उन्होंने BJP समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की, जिससे संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार दत्तेश्वर होता की हार हुई। चुनाव के नतीजे घोषित होने के तुरंत बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया था।
BJD और कांग्रेस ने संविधान की दसवीं अनुसूची और पार्टी व्हिप के उल्लंघन के आधार पर विधानसभा से उनकी सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर के पास याचिका दायर की थी। क्रॉस-वोटिंग और पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले BJD विधायकों में चक्रमणि कन्हार (बालीगुडा), नबा किशोर मल्लिक (जयदेव), सौविक बिस्वाल (चौद्वार-कटक), सुबासिनी जेना (बास्ता), रमाकांत भोई (तिरतोल) और देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी) शामिल हैं। दो अन्य विधायक अरविंद महापात्रा (पाटकुरा) और सनातन महाकुड (चंपुआ), जिन्होंने कथित तौर पर राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग की थी, उन्हें पहले ही पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण सस्पेंड कर दिया गया था।





