ओडिशा

केन्या में ISKCON की रथ यात्रा में भारतीय अधिकारियों की भागीदारी पर ओडिशा में नाराजगी

Kavita2
12 July 2026 11:11 AM IST
केन्या में ISKCON की रथ यात्रा में भारतीय अधिकारियों की भागीदारी पर ओडिशा में नाराजगी
x

भुवनेश्वर : केन्या में आयोजित एक रथ यात्रा कार्यक्रम में भारतीय उच्चायोग (Indian High Commission) के अधिकारियों की भागीदारी को लेकर ओडिशा में भगवान जगन्नाथ के भक्तों के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। यह कार्यक्रम इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (ISKCON) द्वारा आयोजित किया गया था। भक्तों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन निर्धारित रीति-रिवाजों के अनुसार होना चाहिए।

मामला सामने आने के बाद प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से अपील की है कि वे विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों को इस तरह के धार्मिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर उचित दिशा-निर्देश दें।

सुदर्शन पटनायक ने विदेश मंत्री से की अपील

सुदर्शन पटनायक ने सोशल मीडिया के माध्यम से विदेश मंत्री एस जयशंकर से अनुरोध किया कि भारतीय राजदूतों और राजनयिक अधिकारियों को सलाह दी जाए कि वे केवल उन्हीं रथ यात्रा आयोजनों में शामिल हों, जो भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक मान्यताओं और निर्धारित तिथियों के अनुसार आयोजित किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ओडिशा की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का प्रतीक है। इसलिए इससे जुड़े आयोजनों में परंपराओं और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना जरूरी है।

केन्या में ISKCON ने आयोजित की थी रथ यात्रा

जानकारी के अनुसार, केन्या में ISKCON द्वारा आयोजित रथ यात्रा कार्यक्रम में भारतीय उच्चायोग के अधिकारी शामिल हुए थे। इस दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की रथ यात्रा निकाली गई।

कार्यक्रम में भारतीय अधिकारियों की मौजूदगी को लेकर कुछ भक्तों और धार्मिक संगठनों ने सवाल उठाए। उनका कहना है कि जगन्नाथ रथ यात्रा की अपनी निर्धारित परंपराएं और तिथियां हैं, जिनका पालन पुरी की परंपरा के अनुसार किया जाना चाहिए।

ओडिशा के भक्तों में नाराजगी

ओडिशा में भगवान जगन्नाथ के लाखों भक्त इस मुद्दे को धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं। भक्तों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन इसके आयोजन में परंपरागत नियमों और धार्मिक मर्यादाओं का पालन होना चाहिए।

पुरी की प्रसिद्ध रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास में विशेष तिथि और विधि-विधान के अनुसार आयोजित होती है। इसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के विग्रहों को रथों पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाता है।

ISKCON की भूमिका पर पहले भी उठे सवाल

ISKCON दुनिया के कई देशों में भगवान कृष्ण और वैष्णव परंपरा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करता है। संस्था विदेशों में भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार के लिए जानी जाती है।

हालांकि, जगन्नाथ परंपरा को लेकर ISKCON द्वारा आयोजित कुछ कार्यक्रमों पर समय-समय पर विवाद भी सामने आते रहे हैं। कुछ धार्मिक समूहों का मानना है कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े अनुष्ठानों में पुरी की परंपराओं और सेवायत व्यवस्था का विशेष महत्व है।

धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का मुद्दा

सुदर्शन पटनायक की अपील के बाद यह मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता से जुड़ी बहस का विषय बन गया है। उनका कहना है कि विदेशों में भारतीय प्रतिनिधियों की भागीदारी से जुड़े कार्यक्रमों में देश की सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने विदेशों में तैनात भारतीय अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे भारत की संस्कृति और परंपराओं के प्रतिनिधि होते हैं, इसलिए किसी भी धार्मिक आयोजन में भाग लेते समय स्थानीय भावनाओं और परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए।

विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रचार को लेकर चर्चा

भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय हैं। विदेशों में भारतीय समुदाय विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहता है। इनमें मंदिर उत्सव, धार्मिक यात्राएं और सांस्कृतिक समारोह शामिल हैं।

ऐसे आयोजनों में भारतीय दूतावासों और उच्चायोगों के अधिकारियों की भागीदारी आम बात है। हालांकि, धार्मिक आयोजनों से जुड़े मामलों में परंपरा और मान्यताओं को लेकर सावधानी बरतने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।

आगे की प्रतिक्रिया पर नजर

फिलहाल इस मामले में विदेश मंत्रालय या भारतीय उच्चायोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन सुदर्शन पटनायक की अपील के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है।

भगवान जगन्नाथ की परंपराओं से जुड़े भक्तों की मांग है कि भविष्य में भारतीय अधिकारी विदेशों में होने वाले ऐसे आयोजनों में शामिल होने से पहले धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं का ध्यान रखें।

यह विवाद एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े आयोजनों को लेकर देश और विदेश दोनों जगह संवेदनशीलता और परंपराओं के सम्मान की आवश्यकता है।

Next Story