
Odisha ओडिशा: ओडिशा के कोरापुट जिले में बॉक्साइट खनन को लेकर ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन एक बार फिर तेज हो गया है। ग्रामीणों ने कथित रूप से “बुलडोज़ क्लीयरेंस” के तहत कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आंदोलन किया है। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मंगलवार को बयान जारी करते हुए कहा कि कोरापुट में ग्रामीणों का यह विरोध बॉक्साइट माइनिंग से जुड़े कथित नियमों के उल्लंघन के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन ओडिशा में खनन गतिविधियों के कारण बढ़ते तनाव और स्थानीय लोगों की चिंताओं को दर्शाता है।
जयराम रमेश के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप है कि खनन परियोजनाओं के लिए जमीन खाली कराने की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कोरापुट में चल रहा यह विरोध क्षेत्र में बढ़ते असंतोष का नया उदाहरण है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आदिवासी मामलों के मंत्री जुआल ओराम को इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में ऐसे आंदोलन क्यों हो रहे हैं और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को कैसे दूर किया जा सकता है।
The latest protest of villagers in Odisha against violations of the law to bulldoze clearances for bauxite mining is now ongoing in Koraput district. Kalinga Alumina Ltd is being accused of illegally diverting about 400 acres of forest lands over which the agitationists have…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) June 2, 2026
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कलिंगा एल्युमिना लिमिटेड पर लगभग 400 एकड़ वन भूमि को कथित रूप से गैर-कानूनी तरीके से अन्य उपयोग में बदलने का मामला सामने आया है। उनका कहना है कि इस जमीन पर स्थानीय आदिवासी समुदायों के पारंपरिक और आध्यात्मिक अधिकार फॉरेस्ट राइट्स एक्ट, 2006 के तहत मान्य हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि खनन परियोजनाओं के विस्तार से उनकी आजीविका, पर्यावरण और पारंपरिक अधिकारों पर असर पड़ रहा है। इस कारण क्षेत्र में लगातार विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं।
वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच और संबंधित प्रक्रियाएं नियमों के तहत की जा रही हैं। हालांकि इस मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर तनाव की स्थिति बनी हुई है।
कोरापुट में चल रहा यह आंदोलन राज्य में खनन नीति और आदिवासी अधिकारों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर रहा है। राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर आरोप-प्रत्यारोप भी जारी है।





