ओडिशा

Odisha : पेंशन योजना घोटाला, 30.78 लाख के गबन में दो पूर्व पंचायत अधिकारी गिरफ्तार

Kavita2
3 July 2026 5:56 PM IST
Odisha : पेंशन योजना घोटाला, 30.78 लाख के गबन में दो पूर्व पंचायत अधिकारी गिरफ्तार
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Odisha ओडिशा: विजिलेंस विभाग ने शुक्रवार को मधु बाबू पेंशन योजना (एमबीपीवाई) के तहत लाभार्थियों के लिए निर्धारित 30.78 लाख रुपये से अधिक की राशि के गबन के आरोप में पुरी जिले के दो पूर्व पंचायत कार्यकारी अधिकारियों (पीईओ) को गिरफ्तार किया है। यह मामला सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजना के धन के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है, जिसमें बुजुर्गों, दिव्यांगों और निराश्रित लाभार्थियों के लिए निर्धारित राशि का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।

विजिलेंस विभाग के अनुसार, गिरफ्तार किए गए अधिकारियों की पहचान सुलेमानी जानी और टूना प्रधान के रूप में हुई है। सुलेमानी जानी सदर ब्लॉक के अंतर्गत गदामरुग्सिरा और जमरसुआं ग्राम पंचायत के पूर्व पीईओ रह चुके हैं और वर्तमान में सदर ब्लॉक कार्यालय से जुड़े हुए हैं। वहीं टूना प्रधान कनास ब्लॉक के अंतर्गत साहुपाड़ा ग्राम पंचायत के पूर्व पीईओ रहे हैं और वर्तमान में गोप ब्लॉक कार्यालय से जुड़े हुए हैं।

जांच एजेंसी ने बताया कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए पेंशन योजना के तहत लाभार्थियों को वितरित की जाने वाली सरकारी राशि को रोक लिया और उसे निजी उपयोग में लगाया।

यह मामला वर्ष 2022 से 2025 के बीच की अवधि का बताया जा रहा है, जिसमें आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने पेंशन वितरण प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं। जांच में यह भी सामने आया कि लाभार्थियों को दी जाने वाली राशि समय पर वितरित नहीं की गई और कई मामलों में धन को रोककर रखा गया।

विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, सुलेमानी जानी पर कुल 15,74,820 रुपये के गबन का आरोप है, जबकि टूना प्रधान पर 15,03,800 रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। दोनों मामलों को मिलाकर कुल गबन की राशि 30,78,620 रुपये तक पहुंचती है।

जांच में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने पेंशन योजना के अंतर्गत आने वाले बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लाभार्थियों के लिए भेजी गई सरकारी राशि का गलत तरीके से उपयोग किया। यह धन सीधे लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय कथित रूप से अधिकारियों के पास ही रहा।

विजिलेंस विभाग ने कहा कि यह एक गंभीर वित्तीय अपराध है क्योंकि इसमें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए निर्धारित सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। ऐसे मामलों में न केवल सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं, बल्कि जरूरतमंद लोगों के अधिकारों का भी हनन होता है।

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को विशेष न्यायाधीश, सतर्कता, भुवनेश्वर की अदालत में पेश किया जा रहा है। आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके खिलाफ विस्तृत जांच और ट्रायल की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और यह भी देखा जा रहा है कि क्या इस घोटाले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका या संलिप्तता है। साथ ही बैंक लेन-देन और दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।

इस घटना ने ओडिशा में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण स्तर पर लागू होने वाली योजनाओं में डिजिटल निगरानी और नियमित ऑडिट से इस तरह की अनियमितताओं को रोका जा सकता है। साथ ही कड़ी कार्रवाई से ऐसे मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

फिलहाल विजिलेंस विभाग ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की जांच तेज कर दी है, और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस घोटाले का दायरा कितना व्यापक है।

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