
Odisha ओडिशा: ओडिशा में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव तय समय से कुछ आगे खिसक सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission-SEC) ने संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना 2027 की जनगणना पूरी होने के बाद ही जारी की जाएगी। आयोग का मानना है कि नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर मतदाता सूची और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, पंचायत चुनाव जून 2027 तक संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है, जबकि चुनाव की अधिसूचना अप्रैल 2027 में जारी होने की संभावना है। इसके लिए आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज कर दी हैं और विभिन्न जिलों के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
जनगणना के बाद जारी होगी अधिसूचना
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पंचायत चुनावों की प्रक्रिया नई जनगणना के आंकड़ों के अनुरूप कराई जाएगी। इससे मतदाता सूची को अद्यतन करने, निर्वाचन क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने और चुनावी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
यदि जनगणना निर्धारित समय पर पूरी होती है, तो अप्रैल 2027 में चुनाव की अधिसूचना जारी की जा सकती है और उसके बाद चुनावी कार्यक्रम घोषित किया जाएगा।
जून 2027 तक चुनाव कराने की तैयारी
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसका लक्ष्य जून 2027 तक पंचायत चुनाव संपन्न कराना है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।
चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयोग प्रशासनिक अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है।
RDC और कलेक्टरों के साथ बैठकें
चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए आयोग पहले ही रेवेन्यू डिविजनल कमिश्नरों (RDC) और सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ बैठक कर चुका है।
इसके अलावा, 21 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला अधिकारियों के साथ एक और समीक्षा बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में चुनावी तैयारियों की प्रगति, मतदाता सूची, मतदान केंद्रों और अन्य व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
पहली बार घर-घर सर्वे की तैयारी
इस बार राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव से पहले एक नई पहल करने जा रहा है। पहली बार पंचायत चुनाव से पूर्व घर-घर जाकर सर्वे कराया जाएगा।
इस सर्वे का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। आयोग का मानना है कि इस प्रक्रिया से फर्जी, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान करने में आसानी होगी।
बूथ स्तर पर होगा सत्यापन
घर-घर सर्वे के साथ-साथ प्रत्येक बूथ पर अलग से सत्यापन अभियान भी चलाया जाएगा। बूथवार सर्वे के जरिए मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों की पहचान की जाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, इससे मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी और वास्तविक मतदाताओं को मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल समय पर चुनाव कराना नहीं, बल्कि पूरी चुनाव प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाना भी है।
इसी कारण मतदाता सूची के अद्यतन, बूथ सत्यापन और प्रशासनिक तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोग चाहता है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या सामने न आए।
राजनीतिक दलों की नजर तैयारियों पर
पंचायत चुनावों को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल भी आयोग की तैयारियों पर नजर बनाए हुए हैं। पंचायत चुनाव राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर जनप्रतिनिधियों का चुनाव होता है।
ऐसे में मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सभी राजनीतिक दलों के लिए अहम मुद्दा है।
आगे की रणनीति
आने वाले महीनों में आयोग जनगणना की प्रगति, प्रशासनिक तैयारियों और मतदाता सूची के अद्यतन कार्य की लगातार समीक्षा करेगा। यदि सभी प्रक्रियाएं निर्धारित समय के अनुसार पूरी होती हैं, तो अप्रैल 2027 में चुनाव अधिसूचना जारी कर जून 2027 तक पंचायत चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं।
फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव की तैयारी पूरी गंभीरता के साथ की जा रही है और मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने के लिए इस बार तकनीक और जमीनी स्तर के सर्वे दोनों का सहारा लिया जाएगा।





