
Odisha ओडिशा: सरकार के स्किल डेवलपमेंट विभाग ने जानकारी दी है कि गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, भुवनेश्वर के 400 से अधिक छात्रों को कैंपस रिक्रूटमेंट ड्राइव के जरिए विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी मिली है। यह प्लेसमेंट ‘कैंपस टू करियर’ कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया, जिसमें राज्य के स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी शिक्षा मंत्री संपद चंद्र स्वैन ने छात्रों को नियुक्ति पत्र सौंपे।
अधिकारियों के अनुसार, इन छात्रों ने अलग-अलग ट्रेड में अपनी तकनीकी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 32 से अधिक नामी कंपनियों में रोजगार प्राप्त किया है। इनमें टाटा पावर, JSW, पेटीएम, याज़ाकी और मेडप्लस जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं। कुल चयनित उम्मीदवारों में 175 पुरुष और 234 महिला छात्र शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, कुछ कंपनियों ने छात्रों को 3.95 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज ऑफर किया है। इस अवसर पर मंत्री संपद चंद्र स्वैन ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य में चल रहे स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों की सफलता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आज के समय में स्किल डेवलपमेंट केवल नौकरी पाने का साधन नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धी बाजार में खुद को स्थापित करने का माध्यम भी है।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने संस्थान परिसर में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ स्किल पार्क का भी उद्घाटन किया। यह पार्क संस्थान की विभिन्न लैब्स और ट्रेनिंग यूनिट्स से निकलने वाले स्क्रैप, बेकार सामग्री और पुरानी मशीनरी के पुर्जों को पुनः उपयोग में लाकर तैयार किया गया है। मंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के साथ-साथ छात्रों में ग्रीन स्किल्स विकसित करने में भी मदद करेगी।
इसके अलावा, इस अवसर पर एक पुस्तक ‘नारी वंदना: एम्पावरिंग नारीशक्ति’ का भी विमोचन किया गया। यह पुस्तक गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक, भुवनेश्वर की 168 महिला छात्रों की सफलता की कहानियों पर आधारित है, जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद ‘सुदाक्ष्या’ योजना के माध्यम से प्लेसमेंट हासिल किया है।
सरकारी अधिकारियों ने कहा कि यह पूरी पहल राज्य में तकनीकी शिक्षा और रोजगार क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कैंपस रिक्रूटमेंट और स्किल आधारित प्रशिक्षण से युवाओं को बेहतर अवसर मिल रहे हैं और उद्योग जगत की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
यह उपलब्धि ओडिशा के स्किल डेवलपमेंट मॉडल को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।





