
भुवनेश्वर। ओडिशा में चक्रवात 'अर्नाब' के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक लगाने के साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों, झरनों और बांधों जैसे पर्यटन स्थलों पर लोगों के प्रवेश को प्रतिबंधित करने का फैसला किया गया है। सरकार ने दक्षिणी ओडिशा के छह संवेदनशील जिलों में आपदा प्रबंधन से जुड़े संसाधन तैनात किए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हालात की निगरानी और प्रशासनिक तैयारियों के समन्वय के लिए आठ मंत्रियों को अलग-अलग स्थानों पर जिम्मेदारी सौंपी है।
छह संवेदनशील जिलों में विशेष तैयारी
राज्य सरकार ने दक्षिणी ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगड़ा, मलकानगिरी, कोरापुट और नबरंगपुर जिलों को विशेष निगरानी में रखा है। इन जिलों में संभावित चक्रवाती प्रभाव को देखते हुए प्रशासनिक तैयारियों पर जोर दिया जा रहा है।
चक्रवात के दौरान तेज हवाओं और भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका रहती है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, निचले इलाकों में जलभराव और नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
इन्हीं जोखिमों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों में संसाधन तैनात करने का कदम उठाया है।
समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक
चक्रवाती परिस्थितियों में समुद्र में तेज हवाएं चलने और ऊंची लहरें उठने का खतरा रहता है। ऐसे में मछुआरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समुद्री मछली पकड़ने की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इस फैसले का उद्देश्य मछुआरों और उनकी नौकाओं को संभावित खतरे से बचाना है। खराब मौसम के दौरान समुद्र में मौजूद छोटी नौकाओं के लिए तट तक सुरक्षित लौटना कठिन हो सकता है।
सरकार के इस कदम से मछली पकड़ने का काम प्रभावित हो सकता है, लेकिन प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है।
पहाड़ों, झरनों और बांधों पर पर्यटकों की एंट्री बंद
संभावित चक्रवात को देखते हुए सरकार ने पर्यटन गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।
विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों, झरनों और बांधों पर पर्यटकों के प्रवेश को रोका गया है।
भारी बारिश के दौरान झरनों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। इसी तरह पहाड़ी रास्तों पर फिसलन और भूस्खलन का जोखिम बढ़ जाता है।
बांधों तथा जलाशयों के आसपास भी मौसम खराब होने पर दुर्घटनाओं की आशंका रहती है। इसलिए पर्यटकों को ऐसे स्थानों से दूर रखने का निर्णय सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने आठ मंत्रियों को सौंपी जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने चक्रवात की तैयारियों की निगरानी के लिए आठ मंत्रियों को अलग-अलग जिलों में तैनात किया है। इनमें दोनों उपमुख्यमंत्री भी शामिल हैं।
मंत्रियों को स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर राहत एवं बचाव व्यवस्था की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का उद्देश्य किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराना है।
28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के 26 अक्टूबर के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात 'अर्नाब' के 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र से टकराने की संभावना है।
तूफान के अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका जताई गई है। इसके प्रभाव से दक्षिणी ओडिशा के कई इलाकों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, तूफान के तट से टकराने के समय हवा की रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जबकि झोंकों की गति 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक होने का अनुमान है।
एनडीआरएफ और ओडीआरएएफ की टीमें तैनात
संभावित आपदा से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ), अग्निशमन सेवाओं और पुलिस को सतर्क किया गया है।
प्रभावित होने की आशंका वाले क्षेत्रों में 24 ओडीआरएएफ और छह एनडीआरएफ टीमें तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इन टीमों की जिम्मेदारी आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित निकालने, राहत पहुंचाने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की होगी।
28 और 29 अक्टूबर को शिक्षण संस्थान बंद
चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में स्कूलों, कॉलेजों और आंगनबाड़ी केंद्रों को 28 और 29 अक्टूबर को बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, गंजाम, गजपति, रायगड़ा, कोरापुट और मलकानगिरी में शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे। अन्य जिलों में स्थिति के अनुसार जिला प्रशासन निर्णय ले सकता है।
इस कदम का उद्देश्य खराब मौसम के दौरान बच्चों और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की तैयारी
प्रशासन ने कच्चे मकानों, झोपड़ियों और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
जोखिम वाले क्षेत्रों से लोगों को चक्रवात आश्रय स्थलों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। गर्भवती महिलाओं को जरूरत के अनुसार पहले ही स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को जनहानि रोकने के लक्ष्य के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द
आपातकालीन तैयारियों के तहत संवेदनशील जिलों में सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
जिला प्रशासन को नियंत्रण कक्ष सक्रिय रखने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बिजली, सड़क संपर्क, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित होने की स्थिति में जल्द बहाल करने की तैयारियां भी की जा रही हैं।
किसानों को फसल सुरक्षित रखने की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को उन फसलों की कटाई करके सुरक्षित भंडारण करने की सलाह दी है, जो लगभग 80 से 85 प्रतिशत तक पक चुकी हैं।
भारी बारिश और तेज हवाओं से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में किसानों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने को कहा गया है।
कृषि संबंधी सहायता के लिए हेल्पलाइन की व्यवस्था भी की गई है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
ओडिशा सरकार ने लोगों से मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।
समुद्र, पहाड़ी इलाकों, झरनों और जलाशयों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।
चक्रवात 'अर्नाब' के संभावित प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने राहत और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाना है।





