
Odisha ओडिशा: ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से पुलिस पर गंभीर आरोप सामने आए हैं। तलचुआ मरीन पुलिस स्टेशन में एक महिला और उसके बेटे को कथित रूप से थर्ड-डिग्री टॉर्चर देने का मामला सामने आया है। इस घटना को लेकर शिकायत पट्टामुंडई SDPO कार्यालय में दर्ज कराई गई है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया है।
शिकायत के अनुसार, बाघमारी पंचायत के गिरियापाही गांव के निवासी पबन कुमार मंडल की पत्नी अन्नपूर्णा मंडल (58) और उनके बेटे अनंत कुमार मंडल 25 मई को पारिवारिक विवाद से जुड़ी शिकायत दर्ज कराने पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। लेकिन आरोप है कि उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
महिला अन्नपूर्णा मंडल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थाना प्रभारी (IIC) संध्यारानी जेना ने उनके साथ गाली-गलौज की, उन्हें बालों से पकड़कर घसीटा और थप्पड़ मारे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके माथे से सिंदूर पोंछ दिया गया, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से अपमानित महसूस हुआ।
इसके अलावा, महिला ने आरोप लगाया कि उनके बेटे अनंत कुमार मंडल को थाने के अंदर टॉयलेट में ले जाया गया, जहां IIC और एक कांस्टेबल ने मिलकर उसकी पिटाई की। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उसके बेटे का गला दबाने की कोशिश की।
शिकायतकर्ता के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्हें धमकाया गया और कहा गया कि यदि उन्होंने इस बारे में किसी को बताया तो उन्हें झूठे मामलों में फंसा दिया जाएगा। आरोप यह भी है कि पुलिस ने उनके बेटे का मोबाइल फोन जब्त कर लिया और दोनों से जबरन खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाए।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें शाम करीब 6 बजे से रात 11:40 बजे तक पुलिस स्टेशन में हिरासत में रखा गया और इस दौरान उनके साथ कथित रूप से मारपीट और दुर्व्यवहार किया गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर पुलिस स्टेशन में ही इस तरह की घटनाएं होती हैं तो आम नागरिक अपनी शिकायत लेकर कहां जाएंगे।
फिलहाल मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दी गई है और जांच की मांग की जा रही है। पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
मानवाधिकार संगठनों ने भी इस घटना को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यह मामला अब राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और सभी की नजरें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आगे क्या कार्रवाई होती है।





