
Odisha ओडिशा : ओडिशा में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत विजिलेंस विभाग ने रविवार को एक बड़ी गिरफ्तारी की है। सुबरनपुर जिले के निम्ना ग्राम पंचायत के सरपंच को एक सेल्फ-हेल्प ग्रुप (SHG) के अधिकारी से रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया है। यह मामला मछली पालन की सुविधाओं से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बदले पैसे मानवता से संबंधित है।
गिरफ्तार सरपंच की पहचान सूर्यकांति पांडे के रूप में हुई है, जो सुबरनपुर जिले के उलुंडा ब्लॉक के निम्ना ग्राम पंचायत के प्रमुख हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी सुविधाएं जारी कराने और आवश्यक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
ओडिशा सतर्कता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा मामला तब सामने आया जब एक सेल्फ-हेल्प ग्रुप ने मछली पालन के लिए पंचायत के एक तालाब को पांच सालों के लिए लीज पर लिया था। सुविधाएं प्राप्त करने और जिला मत्स्य विभाग से औपचारिकताएं पूरी करने के लिए ग्राम पंचायत सरपंच के हस्ताक्षर आवश्यक थे।
जांच में सामने आया कि सरपंच ने शुरुआत में SHG के अधिकारी से 40,000 रुपये की मांग की थी। यह राशि दाखिल पर हस्ताक्षर करने और रियायत प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बदले में दी गई थी। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा इतनी बड़ी राशि देने में असमर्थता जताने के बाद बातचीत के दौरान कथित मांग को पूरा 20,000 रुपये कर दिया गया।
SHG के अधिकारी ने सरपंच की इस मांग से परेशान होकर मामले की शिकायत विजिलेंस विभाग से कर दी। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने योजना बनाकर कार्रवाई की और सरपंच को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
अधिकारियों ने बताया कि शिकायत की पुष्टि के बाद पूरी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया गया, जिसमें सरपंच को तय रकम लेते हुए पकड़ा गया। गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों की जांच भी शुरू कर दी गई है।
ओडिशा में इस तरह की कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। विजिलेंस विभाग लगातार सरकारी योजनाओं और पंचायत स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार के मामलों पर नजर बनाए हुए है।
इस मामले में शिकायतकर्ता सेल्फ-हेल्प ग्रुप ने बताया कि वे मछली पालन के तरीकों से अपनी आजीविका बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पंचायत स्तर पर अड़चनों का सामना करना पड़ रहा था। गांवों पर हस्ताक्षर न होने के कारण रियायत प्रक्रिया अटक गई थी, जिसके चलते उन्हें आर्थिक नुकसान भी हो रहा था।
जांच मजदूरों के अनुसार, सरपंच द्वारा की गई यह मांग पूरी तरह से अवैध थी और सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश मानी जा रही है। यदि विजिलेंस विभाग आगे की जांच में जुटा है और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि पंचायत स्तर पर विस्थापन और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतों तक पहुंच सके।
इस घटना के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देख रहे हैं।





