ओडिशा

Odisha लेबर मार्केट में सुधार के साथ वेतन उल्लंघन पर चिंता

Kavita2
12 May 2026 11:26 AM IST
Odisha लेबर मार्केट में सुधार के साथ वेतन उल्लंघन पर चिंता
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Odisha ओडिशा: ओडिशा के लेबर मार्केट को लेकर जारी नई रिपोर्ट ने सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की तस्वीर पेश की है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) द्वारा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) 2025 के आधार पर तैयार की गई स्टडी में राज्य में रोजगार की गुणवत्ता और वर्कफोर्स पार्टिसिपेशन में सुधार दर्ज किया गया है, लेकिन साथ ही न्यूनतम वेतन उल्लंघन और अनौपचारिक रोजगार को लेकर गंभीर चिंताएं भी सामने आई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा उन राज्यों में शामिल है जहां लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) अपेक्षाकृत अधिक है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार की गुणवत्ता में भी सुधार देखा गया है, जिससे यह कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है। स्टडी में बताया गया कि ओडिशा ने रोजगार सृजन के साथ-साथ श्रमिकों के लिए नौकरी की स्थिरता और सुरक्षा को भी बेहतर बनाने की दिशा में प्रगति की है।

रिपोर्ट में “वर्क क्वालिटी इंडेक्स” के आधार पर आकलन किया गया, जिसमें लिखित रोजगार अनुबंध, पेड लीव और सामाजिक सुरक्षा लाभों की उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया। इन मानकों पर ओडिशा का प्रदर्शन बेहतर पाया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में औपचारिक रोजगार के अवसरों में सुधार हुआ है।

हालांकि, इन सकारात्मक संकेतकों के बीच रिपोर्ट ने एक गंभीर समस्या की ओर भी ध्यान दिलाया है। अध्ययन के अनुसार, ओडिशा में लगभग 66 प्रतिशत कैजुअल श्रमिक न्यूनतम वेतन से कम आय प्राप्त कर रहे हैं। यह स्थिति राज्य में श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।

कम वेतन पाने वाले कैजुअल वर्कर्स के मामले में ओडिशा देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर बताया गया है। यह स्थिति विशेष रूप से निर्माण, उद्योग और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में अधिक गंभीर पाई गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में निगरानी और श्रम कानूनों के लागू होने की कमी इस समस्या को और बढ़ा रही है। कई जगहों पर न्यूनतम वेतन नियमों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे श्रमिकों को उनका उचित अधिकार नहीं मिल पा रहा है।

रिपोर्ट के निष्कर्षों को लेबर विभाग और संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि श्रम निरीक्षण प्रणाली को मजबूत किया जाए और अनौपचारिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और वेतन सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएं।

कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दिखाती है कि ओडिशा ने रोजगार की गुणवत्ता और भागीदारी के क्षेत्र में प्रगति की है, लेकिन न्यूनतम वेतन उल्लंघन और अनौपचारिक रोजगार की समस्या अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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