
भुवनेश्वर। जलवायु परिवर्तन और तेजी से बदलते आपदा जोखिमों के बीच ओडिशा सरकार ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए लंबी अवधि की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि ओडिशा जलवायु परिवर्तन और नई तरह की आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए 50 साल का रोडमैप तैयार कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य आने वाले दशकों में संभावित प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को समझना और उसके अनुरूप तैयारी करना है।
मंत्री ने यह बात भुवनेश्वर स्थित उत्कल यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘पुनश्च पृथ्वी’ (अर्थ अगेन) कॉन्फ्रेंस 2026 के तीसरे संस्करण के दूसरे दिन कही। यह सम्मेलन ‘संबाद’ और ‘आमा ओडिशा’ की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और भविष्य की चुनौतियों को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई।
जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल
सुरेश पुजारी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बन चुका है। मौसम के बदलते पैटर्न और प्राकृतिक आपदाओं की बदलती प्रकृति को देखते हुए भविष्य की तैयारी पहले से करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में संभावित आपदाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार को उसी के अनुरूप अपनी योजनाएं और व्यवस्थाएं तैयार करनी होंगी। उनके अनुसार, जिन क्षेत्रों में पहले प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान हो चुका है, वहां भविष्य में नुकसान कम करने के लिए जरूरी कदमों की पहचान की जा रही है।
मंत्री ने कहा कि सरकार यह समझने की कोशिश कर रही है कि जिन स्थानों पर पहले नुकसान हुआ है, वहां किस तरह की स्थायी व्यवस्था विकसित की जा सकती है। इसके लिए मौजूदा अनुभवों का इस्तेमाल भविष्य की योजना बनाने में किया जा रहा है।
50 साल की योजना क्यों महत्वपूर्ण
ओडिशा लंबे समय से चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता रहा है। राज्य की भौगोलिक स्थिति और लंबी तटरेखा के कारण यहां आपदा प्रबंधन हमेशा एक महत्वपूर्ण विषय रहा है। ऐसे में 50 साल का रोडमैप तैयार करने का उद्देश्य केवल तत्काल राहत और बचाव तक सीमित न रहकर दीर्घकालिक जोखिम को कम करने की दिशा में योजना बनाना है।
जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम संबंधी घटनाओं के स्वरूप में बदलाव की आशंका के बीच सरकार के सामने बुनियादी ढांचे, शहरी नियोजन, जल प्रबंधन, कृषि और आपदा प्रतिक्रिया व्यवस्था को भविष्य की परिस्थितियों के अनुरूप तैयार करने की चुनौती है।
लंबी अवधि के रोडमैप के जरिए अलग-अलग क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जा सकती हैं। इसमें आपदा संभावित क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित बुनियादी ढांचे का विकास और प्रभावित इलाकों में पुनर्निर्माण की बेहतर रणनीति जैसे पहलू महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
नुकसान वाले इलाकों पर विशेष ध्यान
मंत्री ने अपने संबोधन में उन इलाकों पर भी ध्यान देने की बात कही, जहां पहले आपदाओं के कारण नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर यह तय करना जरूरी है कि भविष्य में नुकसान को कैसे कम किया जा सकता है।
आपदा के बाद केवल राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है। प्रभावित क्षेत्र में दोबारा वही नुकसान न हो, इसके लिए पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में जोखिम को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसी सोच के तहत सरकार पुराने अनुभवों का अध्ययन कर भविष्य की तैयारियों को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
ओडिशा में पहले भी चक्रवात और बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाए जाते रहे हैं। अब बदलती परिस्थितियों को देखते हुए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
नई तरह की आपदाओं के लिए तैयारी
सुरेश पुजारी ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को केवल उन आपदाओं तक सीमित नहीं माना जा सकता, जिनका सामना राज्य पहले करता रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं के स्वरूप में बदलाव हो सकता है और नई तरह के जोखिम सामने आ सकते हैं।
इसलिए सरकार को संभावित परिस्थितियों का आकलन करते हुए अपनी आपदा प्रबंधन क्षमता को लगातार मजबूत करना होगा। इसमें प्रशासनिक तैयारी के साथ स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी और जागरूकता भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों के बीच संवाद ऐसे रोडमैप को तैयार करने में उपयोगी हो सकता है। इसी कारण ‘पुनश्च पृथ्वी’ जैसे सम्मेलन जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराते हैं।
सम्मेलन में पर्यावरण और भविष्य पर चर्चा
उत्कल यूनिवर्सिटी में आयोजित इस सम्मेलन के दौरान पृथ्वी, पर्यावरण और बदलती जलवायु से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन के नाम ‘पुनश्च पृथ्वी’ का मूल उद्देश्य भी पृथ्वी और पर्यावरण को लेकर लोगों के बीच संवाद को बढ़ाना है।
कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और आपदा जोखिम को कम करने की जरूरत जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बदलते पर्यावरणीय हालात में सरकार, विशेषज्ञों, शिक्षण संस्थानों और आम लोगों की भूमिका पर भी विचार किया गया।
मंत्री के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों का सामना करने के लिए केवल सरकार की कोशिश पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए लंबे समय की योजना, वैज्ञानिक अध्ययन और स्थानीय परिस्थितियों की समझ जरूरी होगी।
भविष्य की चुनौतियों पर अभी से तैयारी
ओडिशा सरकार की ओर से 50 साल का रोडमैप तैयार करने की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया भर में दीर्घकालिक रणनीतियों पर जोर दिया जा रहा है। राज्य के लिए यह योजना खास महत्व रखती है क्योंकि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का अनुभव ओडिशा के प्रशासनिक तंत्र का अहम हिस्सा रहा है।
अब चुनौती यह है कि भविष्य में संभावित जोखिमों को पहले से पहचानकर ऐसी व्यवस्था तैयार की जाए, जिससे जान-माल और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। मंत्री सुरेश पुजारी के बयान से स्पष्ट है कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को केवल घटना के बाद की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि लंबी अवधि की योजना और जोखिम कम करने की रणनीति के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।





