
Odisha ओडिशा: सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी और क्लीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट पर हाई-लेवल समीक्षा बैठक की। यह बैठक हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की एडिशनल चीफ सेक्रेटरी उषा पाधी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में प्रोजेक्ट की प्रगति, योजना की समयसीमा और विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गई।
इस पहल में CRUT, NTPC और GRIDCO साझेदारी कर रहे हैं। इसका उद्देश्य ओडिशा में हाइड्रोजन से चलने वाला पब्लिक ट्रांसपोर्ट शुरू करना और अर्बन मोबिलिटी के लिए राज्य का पहला ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम बनाना है। यह प्रोजेक्ट भारत सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत है और देश के नेट ज़ीरो एमिशन लक्ष्य को पूरा करने में योगदान देगा।
बैठक के दौरान अधिकारियों ने NTPC, GRIDCO और CRUT के बीच तीन-तरफ़ा समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद हुई प्रगति का रिव्यू किया। प्रस्तावित योजना में भुवनेश्वर में CRUT के पोखरिपुट डिपो में ग्रीन हाइड्रोजन प्रोडक्शन और रिफ्यूलिंग फैसिलिटी स्थापित करना शामिल है। इसके साथ ही पायलट प्रोजेक्ट के रूप में तीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जाएगा।
प्रोजेक्ट का लक्ष्य प्रतिदिन लगभग 260 किलोग्राम ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करना है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसें सही हालात में रोज़ाना लगभग 600 किलोमीटर तक चल सकती हैं। इस पहल से न केवल पब्लिक ट्रांसपोर्ट का एक साफ और कुशल विकल्प मिलेगा, बल्कि टेलपाइप एमिशन में भी कमी आएगी। अनुमान है कि इससे हर साल लगभग 900 टन कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होगा।
उषा पाधी ने बैठक में कहा कि यह प्रोजेक्ट ओडिशा में पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने अधिकारियों और सभी साझेदार संस्थानों को निर्देश दिया कि तकनीकी चुनौतियों और लॉजिस्टिक समस्याओं का समाधान करते हुए समय पर प्रोजेक्ट को लागू किया जाए।
बैठक में चर्चा की गई कि भविष्य में इस मॉडल को और शहरों में विस्तार किया जा सकता है। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट में नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इसके अलावा, यह पहल स्थानीय क्लीन फ्यूल टेक्नोलॉजी और हाइड्रोजन उद्योग को भी मजबूत करेगी।
इस प्रोजेक्ट से न केवल शहरी क्षेत्र में स्वच्छ परिवहन मिलेगा बल्कि यह ओडिशा की ऊर्जा सुरक्षा को भी बढ़ाएगा। हाइड्रोजन आधारित ई-बसें पारंपरिक डीज़ल या पेट्रोल पर चलने वाले वाहनों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल होंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहल भारत में ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी को गति देगी और देश के क्लीन एनर्जी मिशन को सफल बनाएगी। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, प्रोजेक्ट के सफल होने पर यह अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकता है।





