
कटक : ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और प्रकाशन में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच ओडिशा हाई कोर्ट ने स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के तीन निलंबित असिस्टेंट डायरेक्टरों को अंतरिम राहत दी है। अदालत ने मंगलवार को इन अधिकारियों को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।
मामला राज्य में स्कूली किताबों की गुणवत्ता, तैयार करने की प्रक्रिया और प्रकाशन से जुड़ी कथित गड़बड़ियों से संबंधित है। आरोप है कि पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और प्रकाशन के दौरान नियमों का पालन नहीं किया गया और प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गईं। इस मामले में जांच आगे बढ़ने के बाद SCERT के तीन असिस्टेंट डायरेक्टरों को निलंबित कर दिया गया था।
निलंबित अधिकारियों ने गिरफ्तारी से राहत की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने फिलहाल उन्हें अंतरिम सुरक्षा देने का आदेश दिया। हालांकि, यह राहत मामले की अंतिम सुनवाई तक लागू रहेगी या नहीं, इस पर आगे की सुनवाई में फैसला लिया जाएगा।
हाई कोर्ट के इस आदेश से तीनों अधिकारियों को तत्काल राहत मिली है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं और इसके बाद गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक का निर्देश जारी किया।
पाठ्यपुस्तक विवाद सामने आने के बाद राज्य के शिक्षा विभाग में भी हलचल तेज हो गई थी। स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़े इस मामले में विपक्ष और विभिन्न संगठनों ने भी सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि बच्चों के लिए तैयार की जाने वाली किताबों की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
वहीं, अधिकारियों की ओर से अपने बचाव में कहा गया है कि उन्हें मामले में उचित प्रक्रिया के बिना कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि जांच में सहयोग करने के लिए वे तैयार हैं, लेकिन गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई से उन्हें सुरक्षा दी जाए।
मामले की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पाठ्यपुस्तकों की तैयारी और प्रकाशन के दौरान किन नियमों का पालन किया गया और क्या किसी स्तर पर प्रक्रियागत खामियां हुईं। जांच एजेंसियां दस्तावेजों, निर्णय प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा कर रही हैं।
स्कूली पाठ्यपुस्तकें शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं, इसलिए इनके निर्माण और प्रकाशन में पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि किताबों की सामग्री, संपादन, अनुमोदन और छपाई की पूरी प्रक्रिया तय मानकों के अनुसार होनी चाहिए।
इस मामले ने राज्य में शिक्षा प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर बहस भी शुरू कर दी है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से बचने के लिए पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश के बाद तीनों निलंबित अधिकारियों को गिरफ्तारी से राहत मिल गई है, लेकिन मामले की जांच जारी रहेगी। अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान जांच की प्रगति और अन्य तथ्यों पर विचार किया जाएगा।
ओडिशा शिक्षा विभाग के लिए यह मामला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसका संबंध सीधे तौर पर स्कूली छात्रों के लिए तैयार होने वाली पाठ्य सामग्री से जुड़ा है। आने वाले दिनों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि इस विवाद में जिम्मेदारी किसकी तय होती है।





