
Odisha ओडिशा: केंद्रपाड़ा (ओडिशा) में सोमवार को ओडिशा विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एक स्कूल हेडमास्टर को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। आरोपी पर आरोप है कि उसने एक स्टाफ मेंबर से उसकी बकाया सैलरी जारी कराने के एवज में 5,000 रुपये की रिश्वत ली थी। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
गिरफ्तार हेडमास्टर की पहचान रघुनाथ दास के रूप में हुई है, जो महाकालपाड़ा क्षेत्र के चाडेगुआन स्थित एक हाई स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत था। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, यह मामला लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान से जुड़ा हुआ है, जिसमें कथित तौर पर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया।
शिकायतकर्ता, जो स्कूल में नया स्टाफ मेंबर था, ने बताया कि उसने अगस्त 2025 में स्कूल में जॉइन किया था, लेकिन तब से उसकी सैलरी का भुगतान नहीं किया गया था। कई बार अनुरोध करने के बावजूद वेतन जारी नहीं हुआ, जिसके बाद उसने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की।
विजिलेंस की जानकारी के अनुसार, स्टाफ मेंबर ने हेडमास्टर से लगातार संपर्क कर अपनी सैलरी प्रोसेस कराने की मांग की थी। इसके लिए हेडमास्टर को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO), केंद्रपाड़ा के कार्यालय में ड्रॉइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (DDO) के पास अटेंडेंस शीट जमा करनी थी, ताकि भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
हालांकि, आरोप है कि हेडमास्टर ने इस प्रक्रिया को पूरा करने के बदले 5,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। पीड़ित कर्मचारी ने जब इस दबाव और परेशानी को सहन नहीं कर पाया, तो उसने ओडिशा विजिलेंस विभाग से संपर्क कर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस विभाग ने योजना बनाकर ट्रैप ऑपरेशन चलाया। इसी दौरान आरोपी हेडमास्टर को रिश्वत की राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों ने मौके से संबंधित दस्तावेज और नकदी भी बरामद की है।
विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस पूरे प्रकरण में अन्य कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच होगी कि क्या इसी तरह की शिकायतें पहले भी स्कूल या अन्य मामलों में सामने आई थीं।
इस घटना के बाद स्थानीय शिक्षा विभाग में भी चर्चा तेज हो गई है। सरकारी स्कूलों में प्रशासनिक प्रक्रिया और वेतन भुगतान व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कुल मिलाकर, यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है, जहां एक सामान्य वेतन प्रक्रिया के लिए भी रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप सामने आया है।





