
Odisha ओडिशा: ओडिशा के राज्यपाल और कुलाधिपति डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने राज्य के सभी कुलपतियों (Vice Chancellors) से विश्वविद्यालयों की भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए सक्रिय और सख्त कदम उठाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों की संपत्तियों की सुरक्षा उनके दीर्घकालिक विकास और विस्तार के लिए बेहद जरूरी है।
राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने यह बात राजधानी भुवनेश्वर के लोक भवन में आयोजित दो दिवसीय कुलपतियों के सम्मेलन के समापन सत्र में कही। इस सम्मेलन में राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि ओडिशा के कई शैक्षणिक संस्थान अपनी भूमि संपत्तियों पर अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे हैं, जिससे उनके विस्तार और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कुलपतियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने संस्थानों में भूमि की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और अतिक्रमण रोकने के लिए एक मजबूत और प्रभावी तंत्र विकसित करें।
डॉ. कंभमपति ने स्पष्ट रूप से कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमि केवल एक संपत्ति नहीं है, बल्कि यह शिक्षा और अनुसंधान के भविष्य से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण धरोहर है। इसलिए इसकी सुरक्षा संस्थानों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अतिक्रमण को नहीं रोका गया तो भविष्य में शैक्षणिक विस्तार में गंभीर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि राज्य सरकार अतिक्रमित भूमि को पुनः प्राप्त करने में अपनी भूमिका निभाएगी, लेकिन संस्थानों की भी समान जिम्मेदारी है कि वे आगे किसी भी प्रकार के नए अतिक्रमण को रोकने के लिए सक्रिय रहें। उन्होंने कुलपतियों से नियमित निगरानी, भूमि रिकॉर्ड के अद्यतन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों को डिजिटल भूमि रिकॉर्ड प्रणाली अपनानी चाहिए ताकि उनकी संपत्तियों का सही विवरण उपलब्ध रहे और किसी भी तरह के अवैध कब्जे की तुरंत पहचान की जा सके। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
सम्मेलन के दौरान शिक्षा क्षेत्र के विकास, शोध की गुणवत्ता, और विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की गई। राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को न केवल अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान देना चाहिए, बल्कि अपने संसाधनों की सुरक्षा और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अतिक्रमण की समस्या कई विश्वविद्यालयों के विस्तार में एक बड़ी बाधा बन रही है। ऐसे में राज्यपाल द्वारा दिया गया यह निर्देश संस्थानों को अधिक सतर्क और संगठित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
राज्यपाल ने अंत में कहा कि यदि विश्वविद्यालय अपनी भूमि और संसाधनों की रक्षा में सफल होते हैं, तो वे भविष्य में बेहतर शैक्षणिक वातावरण और शोध सुविधाएँ विकसित कर सकेंगे, जिससे राज्य की उच्च शिक्षा प्रणाली को मजबूती मिलेगी।





